हेमंत सरकार का संवैधानिक संस्थाओं को निष्क्रिय करने का खेल: प्रतुल शाहदेव का गंभीर आरोप

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हेमंत सरकार का संवैधानिक संस्थाओं को निष्क्रिय करने का खेल: प्रतुल शाहदेव का गंभीर आरोप

सारांश

रांची में भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने हेमंत सोरेन सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं को जानबूझकर निष्क्रिय करने का आरोप लगाया है। क्या यह लोकतंत्र के लिए खतरा है?

Key Takeaways

  • हेमंत सरकार की संवैधानिक संस्थाओं के प्रति निष्क्रियता
  • भ्रष्टाचार और जवाबदेही का मुद्दा
  • लोकायुक्त और सूचना आयोग की महत्वता
  • महिला एवं बाल आयोग का निष्क्रिय होना
  • सरकार के खिलाफ भाजपा का अभियान

रांची, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के झारखंड प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने हेमंत सोरेन सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं को जानबूझकर निष्क्रिय करने का गंभीर आरोप लगाया है।

उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत लोकायुक्त, सूचना आयोग, महिला आयोग और बाल संरक्षण आयोग जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं को बेकार रख रही है। झारखंड हाईकोर्ट की बार-बार की फटकार के बावजूद इन संस्थाओं में नियुक्तियों को लेकर सरकार का टालमटोल वाला रवैया लोकतंत्र के लिए खतरा है।

प्रतुल शाहदेव ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इन संस्थाओं के नाम पर कार्यालयों, भवनों और कर्मचारियों के वेतन पर जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपए खर्च हो रहे हैं, लेकिन प्रमुख पदों के रिक्त होने के कारण जनता को इनका कोई लाभ नहीं मिल रहा है।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब सरकार इन संस्थाओं को चलाने में रुचि नहीं रखती, तो दिखावे के लिए इन पर खर्च क्यों किया जा रहा है? भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि सरकार को पारदर्शिता और जवाबदेही से डर है, इसलिए वह जानबूझकर नियुक्तियां नहीं कर रही है।

उन्होंने कहा कि लोकायुक्त भ्रष्टाचार पर रोक लगाता है और सूचना आयोग पारदर्शिता सुनिश्चित करता है, जो शायद इस सरकार की प्राथमिकताओं में नहीं है। वहीं, महिला एवं बाल आयोग जैसे संवेदनशील संस्थाओं का निष्क्रिय होना समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। प्रतुल शाहदेव ने मांग की है कि सरकार हाईकोर्ट के निर्देशों का सम्मान करते हुए तुरंत इन रिक्त पदों को भरे।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द नियुक्तियां नहीं की गईं तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि भ्रष्टाचार और जवाबदेही से बचने के लिए सरकार ने इन संवैधानिक ढांचों को जानबूझकर ठप रखा है। भाजपा इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाएगी ताकि सरकार की इस 'असंवेदनशीलता' का खुलासा हो सके।

Point of View

यह आरोप गंभीर है। संवैधानिक संस्थाओं की निष्क्रियता लोकतंत्र के मूलभूत सिद्धांतों को चुनौती देती है। यह जरूरी है कि सरकार इन संस्थाओं को सक्रिय बनाए और जनता के अधिकारों की रक्षा करे।
NationPress
11/03/2026

Frequently Asked Questions

प्रतुल शाहदेव ने किस सरकार पर आरोप लगाया है?
प्रतुल शाहदेव ने हेमंत सोरेन सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं को निष्क्रिय करने का आरोप लगाया है।
सरकार ने किन संवैधानिक संस्थाओं को निष्क्रिय रखा है?
सरकार ने लोकायुक्त, सूचना आयोग, महिला आयोग और बाल संरक्षण आयोग जैसी संस्थाओं को निष्क्रिय रखा है।
प्रतुल शाहदेव ने क्या चेतावनी दी है?
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि नियुक्तियां नहीं की गईं, तो सरकार की भ्रष्टाचार और जवाबदेही से बचने की मंशा स्पष्ट हो जाएगी।
सरकार के रवैये पर प्रतुल शाहदेव ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि सरकार जानबूझकर इन संस्थाओं में नियुक्तियां नहीं कर रही है।
भाजपा इस मुद्दे को कैसे उठाने वाली है?
भाजपा इस मुद्दे को जनता के बीच उठाएगी ताकि सरकार की असंवेदनशीलता का खुलासा हो सके।
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