सरमा का राहुल गांधी पर कटाक्ष: 'खड़गे के बरामदे में बन सकते हैं PM, लोकसभा में नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा व्यंग्य करते हुए कहा कि वे केवल मल्लिकार्जुन खड़गे के बरामदे में ही प्रधानमंत्री बन सकते हैं, लोकसभा में कभी नहीं। सरमा की यह टिप्पणी 'इंडिया' ब्लॉक द्वारा 31 अक्टूबर को खड़गे के आवास पर आयोजित मॉक पार्लियामेंट सत्र को लेकर आई, जिसमें राहुल गांधी ने समापन भाषण दिया था।
मुख्यमंत्री सरमा का बयान
सरमा ने विपक्ष की इस प्रतीकात्मक कवायद को सीधे खारिज करते हुए कहा, 'राहुल गांधी केवल मल्लिकार्जुन खड़गे के बरामदे में ही प्रधानमंत्री बन सकते हैं। वह कभी लोकसभा में प्रधानमंत्री नहीं बन सकते। लोकसभा में नरेंद्र मोदी ही प्रधानमंत्री बने रहेंगे।' उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष की यह संसदीय नाटकबाज़ी राजनीतिक वास्तविकता से कोसों दूर है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) और 'इंडिया' ब्लॉक के बीच भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के कामकाज को लेकर राजनीतिक तनाव तेज़ हो गया है।
मॉक पार्लियामेंट का पूरा घटनाक्रम
31 अक्टूबर को नई दिल्ली में खड़गे के आवास पर आयोजित इस 'नकली' संसदीय कार्यवाही की अध्यक्षता लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार ने की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की माँग करते हुए एक प्रस्ताव पेश किया।
विपक्षी नेताओं ने इसे CEC के विरुद्ध एक तरह का 'सार्वजनिक महाभियोग' करार दिया। राहुल गांधी ने इस कार्यवाही में समापन भाषण देकर विपक्ष की माँगों को रेखांकित किया।
विपक्ष के आरोप और माँगें
'इंडिया' ब्लॉक ने चुनाव आयोग पर चुनावी निष्पक्षता से समझौते का आरोप लगाया और मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) को लेकर गंभीर चिंताएँ जताईं। विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही अनिवार्य है।
इस पहल के ठीक बाद 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली आयोजित की गई, जिसमें 'इंडिया' ब्लॉक के नेताओं ने 'वोट चोरी' के अपने आरोपों को दोहराया और चुनाव आयोग से जवाबदेही की माँग की।
BJP का पलटवार
BJP ने विपक्ष के इस अभियान की कड़ी आलोचना करते हुए सवाल उठाया कि संसद के बाहर इस तरह की प्रतीकात्मक कार्यवाही का क्या औचित्य है। सत्ताधारी दल ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य का बचाव करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य सटीक मतदाता सूचियाँ सुनिश्चित करना और चुनावी पारदर्शिता को मज़बूत करना है।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब BJP और विपक्ष के बीच चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर टकराव हुआ हो — बीते कुछ वर्षों में यह विवाद कई बार सतह पर आ चुका है।
आगे क्या
इंडिया ब्लॉक ने चुनाव आयोग के विरुद्ध अपना राजनीतिक अभियान जारी रखने के संकेत दिए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मुद्दा आने वाले विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में और अधिक गरमा सकता है, क्योंकि दोनों पक्ष जनमत को अपने पक्ष में करने की कोशिश में हैं।