अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026: 5,000 स्थानों पर 8.30 लाख एनसीसी कैडेट और तटरक्षक जवानों ने किया एकसाथ योग
सारांश
मुख्य बातें
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 पर 21 जून को देशभर में 8.30 लाख से अधिक राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) कैडेटों और अधिकारियों ने एकसाथ योगाभ्यास किया। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह आयोजन 5,000 से अधिक स्थानों पर एकसाथ संपन्न हुआ, जो इसे देश के सबसे बड़े संगठित योग अभियानों में से एक बनाता है। भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने भी 'योग संगम 2026' पहल के तहत इस उत्सव में सक्रिय भागीदारी निभाई।
किसने लिया हिस्सा
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन कार्यक्रमों में एनसीसी कैडेट, एसोसिएट एनसीसी अधिकारी, स्थायी प्रशिक्षक और अन्य कर्मचारी शामिल हुए। भारतीय तटरक्षक बल के सभी जहाजों और प्रतिष्ठानों पर भी एकसाथ योग सत्र आयोजित किए गए, जिनमें हजारों तटरक्षक कर्मियों और उनके परिवारों ने भाग लिया।
प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों पर हुआ आयोजन
इस वर्ष के योग सत्र देश के कई प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक स्थलों पर आयोजित किए गए। इनमें अहमदाबाद का साबरमती रिवरफ्रंट, हैदराबाद का गोलकोंडा किला, बिहार का बोधगया, मुंबई का वानखेड़े स्टेडियम, गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी का किनारा, वाराणसी का नमो घाट, कोलकाता का मिलेनियम पार्क, चंडीगढ़ की सुखना झील, चेन्नई का मरीना बीच और ओडिशा का कोणार्क सूर्य मंदिर शामिल रहे।
इस वर्ष की थीम और उद्देश्य
इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम 'स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग' रखी गई थी। कार्यक्रमों में सभी आयु वर्ग के प्रतिभागियों के लिए योग के स्वास्थ्य लाभों, मानसिक मजबूती और भावनात्मक संतुलन पर विशेष जोर दिया गया। प्रशिक्षित योग शिक्षकों के मार्गदर्शन में योगासन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास कराया गया।
एनसीसी और तटरक्षक बल की भूमिका
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि एनसीसी युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित कर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। तटरक्षक बल के कार्यक्रमों में ऐसे योग अभ्यासों पर विशेष ध्यान दिया गया जिन्हें रोज़मर्रा की जिंदगी में आसानी से अपनाया जा सके और जो कठिन परिस्थितियों में कार्यरत कर्मियों की कार्यक्षमता को भी मजबूत करें।
आगे की राह
इस वृहद आयोजन ने एक बार फिर यह रेखांकित किया कि भारत में योग अब केवल व्यक्तिगत अभ्यास नहीं, बल्कि संस्थागत स्वास्थ्य नीति का हिस्सा बन चुका है। रक्षा बलों में इसके व्यापक समावेश से आने वाले वर्षों में इसके दायरे के और विस्तार की संभावना है।