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FSSAI नियमों में बड़ा बदलाव: गैर-विनिर्माण खाद्य कारोबारियों को FIFO-FEFO अनुपालन से मिली छूट

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FSSAI नियमों में बड़ा बदलाव: गैर-विनिर्माण खाद्य कारोबारियों को FIFO-FEFO अनुपालन से मिली छूट

सारांश

केंद्र सरकार ने FSSAI के लाइसेंसिंग नियमों में संशोधन कर गैर-विनिर्माण खाद्य कारोबारियों को FIFO-FEFO स्टॉक रिकॉर्ड की बाध्यता से मुक्त किया। यह राहत खुदरा विक्रेताओं और MSME के लिए अनुपालन बोझ घटाने की दिशा में एक ठोस कदम है, जबकि विनिर्माण इकाइयों पर सख्त मानक बरकरार हैं।

मुख्य बातें

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने FSSAI के लाइसेंसिंग एवं रजिस्ट्रेशन रेगुलेशंस, 2011 में संशोधन की अधिसूचना जारी की।
गैर-विनिर्माण खाद्य कारोबारियों को FIFO और FEFO आधारित स्टॉक रोटेशन रिकॉर्ड रखने की अनिवार्यता से छूट मिली।
खाद्य निर्माण इकाइयों पर स्टॉक प्रबंधन और ट्रेसबिलिटी के नियम पूर्ववत कड़े बने रहेंगे।
इस बदलाव से खुदरा विक्रेता, MSME और स्ट्रीट फूड विक्रेता सर्वाधिक लाभान्वित होंगे।
संशोधन नीति आयोग की उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों के अनुरूप हैं।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 27 जून 2025 को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (लाइसेंसिंग एंड रजिस्ट्रेशन ऑफ फूड बिजनेस) रेगुलेशंस, 2011 में संशोधन की अधिसूचना जारी कर खुदरा विक्रेताओं सहित गैर-विनिर्माण खाद्य कारोबारियों को स्टॉक रोटेशन रिकॉर्ड रखने की अनिवार्यता से राहत दी है। यह कदम ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने और एमएसएमई पर अनुपालन बोझ घटाने की व्यापक नीतिगत दिशा का हिस्सा है। खाद्य निर्माण इकाइयों पर पूर्ववत नियम लागू रहेंगे।

मुख्य बदलाव क्या हैं

अब तक सभी लाइसेंसधारी खाद्य कारोबारियों के लिए फर्स्ट इन फर्स्ट आउट (FIFO) अथवा फर्स्ट एक्सपायरी फर्स्ट आउट (FEFO) के आधार पर स्टॉक प्रबंधन और उससे जुड़े रिकॉर्ड रखना अनिवार्य था। संशोधित नियमों के तहत यह दायित्व अब केवल खाद्य निर्माण इकाइयों तक सीमित कर दिया गया है। खुदरा विक्रेता, वितरक और अन्य गैर-विनिर्माण व्यवसाय इन रिकॉर्ड-कीपिंग आवश्यकताओं से मुक्त होंगे।

किसे मिलेगा फायदा

इस संशोधन का सबसे अधिक लाभ छोटे और मध्यम स्तर के कारोबारियों (MSME), किराना दुकानदारों, स्ट्रीट फूड विक्रेताओं और खाद्य वितरकों को मिलेगा। मंत्रालय के अनुसार, इन वर्गों पर अनुपालन का प्रशासनिक बोझ उल्लेखनीय रूप से कम होगा। गौरतलब है कि भारत में खाद्य क्षेत्र में पंजीकृत व्यवसायों की बड़ी संख्या गैर-विनिर्माण श्रेणी में आती है।

खाद्य सुरक्षा पर असर

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जहाँ खाद्य सुरक्षा और उत्पाद की ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करना अनिवार्य है — अर्थात् विनिर्माण इकाइयों में — वहाँ नियंत्रण पूर्ववत कड़े बने रहेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार जोखिम-आधारित और परिणाम-केंद्रित नियामकीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जिसमें निगरानी उन बिंदुओं पर केंद्रित हो जहाँ वास्तविक जोखिम सबसे अधिक है।

व्यापक सुधार प्रक्रिया का हिस्सा

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, ये संशोधन राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और खाद्य उद्योग के हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श के बाद तैयार किए गए हैं। ये बदलाव नीति आयोग की गैर-वित्तीय नियामकीय सुधारों पर गठित उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों के अनुरूप भी हैं। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने स्थायी लाइसेंस व्यवस्था, टर्नओवर सीमा में संशोधन, स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के लिए दोहरे अनुपालन की अनिवार्यता समाप्त करना और जोखिम-आधारित निरीक्षण प्रणाली जैसे कई सुधार किए हैं।

आगे की राह

मंत्रालय ने दोहराया है कि सरकार विज्ञान-आधारित नियमों और सरल अनुपालन व्यवस्था के ज़रिये भारत की खाद्य सुरक्षा प्रणाली को और सुदृढ़ बनाने की दिशा में काम जारी रखेगी। आलोचकों का कहना है कि इन सुधारों की वास्तविक परख तब होगी जब क्षेत्र-स्तरीय क्रियान्वयन और निरीक्षण तंत्र की प्रभावशीलता सामने आएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन का है। FIFO-FEFO से छूट खुदरा स्तर पर कागज़ी बोझ घटाएगी, पर इसके साथ यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि गैर-विनिर्माण श्रृंखला में एक्सपायर्ड उत्पादों की निगरानी का कोई विकल्प तंत्र मौजूद हो। भारत में खाद्य मिलावट और एक्सपायर्ड उत्पादों की बिक्री से जुड़ी शिकायतें अब भी बड़ी संख्या में आती हैं — ऐसे में नियामकीय सरलीकरण और उपभोक्ता सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना FSSAI की सबसे बड़ी चुनौती होगी। नीति आयोग की सिफारिशों का हवाला देना सुधार को वैधता देता है, लेकिन राज्य-स्तरीय निरीक्षण क्षमता के बिना ये बदलाव कागज़ों तक सीमित रह सकते हैं।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

FSSAI नियमों में हुए नए संशोधन क्या हैं?
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (लाइसेंसिंग एंड रजिस्ट्रेशन ऑफ फूड बिजनेस) रेगुलेशंस, 2011 में संशोधन कर गैर-विनिर्माण खाद्य कारोबारियों को FIFO और FEFO आधारित स्टॉक रिकॉर्ड रखने की बाध्यता से मुक्त किया है। खाद्य निर्माण इकाइयों पर यह नियम पहले की तरह लागू रहेगा।
FIFO और FEFO क्या होता है और इसकी ज़रूरत क्यों थी?
FIFO (फर्स्ट इन फर्स्ट आउट) और FEFO (फर्स्ट एक्सपायरी फर्स्ट आउट) स्टॉक प्रबंधन के तरीके हैं जिनमें पहले आए या जल्दी एक्सपायर होने वाले उत्पाद पहले बेचे जाते हैं। ये खाद्य सुरक्षा और उत्पाद की ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य किए गए थे।
इस बदलाव से किन कारोबारियों को फायदा होगा?
इस संशोधन से खुदरा विक्रेता, वितरक, स्ट्रीट फूड विक्रेता और अन्य गैर-विनिर्माण खाद्य व्यवसाय — विशेषकर छोटे और मध्यम स्तर के कारोबारी (MSME) — लाभान्वित होंगे। इनके लिए अनुपालन का प्रशासनिक बोझ उल्लेखनीय रूप से कम होगा।
क्या इस बदलाव से खाद्य सुरक्षा प्रभावित होगी?
मंत्रालय के अनुसार, खाद्य निर्माण इकाइयों पर स्टॉक प्रबंधन और ट्रेसबिलिटी के नियम पूर्ववत बने रहेंगे, इसलिए खाद्य सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं होगा। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि गैर-विनिर्माण स्तर पर निगरानी के वैकल्पिक तंत्र की ज़रूरत होगी।
यह संशोधन किन सिफारिशों के आधार पर किया गया है?
ये बदलाव नीति आयोग की गैर-वित्तीय नियामकीय सुधारों पर गठित उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों के अनुरूप हैं। इन्हें राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और खाद्य उद्योग के हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श के बाद अंतिम रूप दिया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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