11 अगस्त 2026
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बदरुद्दीन अजमल का आरोप: हिमंत सरमा की नफरत भरी राजनीति से असम के मुसलमान भय में जी रहे हैं

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बदरुद्दीन अजमल का आरोप: हिमंत सरमा की नफरत भरी राजनीति से असम के मुसलमान भय में जी रहे हैं

सारांश

AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने असम CM हिमंत बिस्वा सरमा को 'नफरत भरे भाषण में नंबर वन' करार दिया और कहा कि उनकी राजनीति से मुसलमान डर में जी रहे हैं। साथ ही उन्होंने जनगणना में मुसलमानों से असमिया भाषा दर्ज कराने और कांग्रेस में रकीबुल हुसैन को APCC अध्यक्ष बनाने की अपील की।

मुख्य बातें

AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने 22 जून 2026 को गुवाहाटी में असम CM हिमंत बिस्वा सरमा पर नफरत भरी राजनीति का आरोप लगाया।
अजमल का दावा — सरमा के बयानों और राजनीति के कारण असम के मुसलमान भय के माहौल में जी रहे हैं।
अजमल हाल ही में बिन्नाकंडी विधानसभा सीट से जीतकर दूसरी बार विधायक बने हैं।
अजमल फाउंडेशन के संस्थानों में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के छात्र पढ़ते हैं — अजमल ने सांप्रदायिक सद्भाव का हवाला दिया।
आगामी जनगणना में असम के मुसलमानों से असमिया मातृभाषा दर्ज कराने की अपील।
धुबरी सांसद रकीबुल हुसैन को APCC अध्यक्ष बनाने का सुझाव, मौजूदा अध्यक्ष गौरव गोगोई की जगह।

ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने 22 जून 2026 को गुवाहाटी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर गंभीर आरोप लगाए। अजमल ने दावा किया कि सरमा की राजनीति और सार्वजनिक बयानों के कारण असम का मुस्लिम समुदाय भय के वातावरण में जीने पर मजबूर है।

मुख्य आरोप और बयान

अजमल ने सीधे शब्दों में कहा, 'नफरत भरी बातें करने के मामले में हिमंत बिस्वा सरमा नंबर वन हैं। उनकी राजनीति और बयानों के कारण असम के मुसलमान डर में जी रहे हैं।' उन्होंने मुख्यमंत्री पर समाज को बाँटने वाले भाषण देने का आरोप लगाया और कहा कि इस तरह के बयान राज्य में सामाजिक तनाव को बढ़ाते हैं।

गौरतलब है कि अजमल हाल ही में संपन्न राज्य विधानसभा चुनावों में बिन्नाकंडी विधानसभा सीट से जीत दर्ज कर दूसरी बार विधायक बने हैं। इस जीत के बाद उनका यह पहला प्रमुख राजनीतिक बयान है।

सामाजिक सद्भाव और अजमल फाउंडेशन

AIUDF नेता ने यह भी स्पष्ट किया कि मुस्लिम समुदाय असम में सामाजिक सद्भाव और विकास के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने अपने चैरिटेबल संगठन अजमल फाउंडेशन के शैक्षिक कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा, 'अजमल फाउंडेशन के संस्थानों में न केवल मुस्लिम छात्र, बल्कि हिंदू लड़के-लड़कियाँ भी पढ़ते हैं। हमने हमेशा बिना किसी भेदभाव के शिक्षा और सामाजिक विकास के लिए काम किया है।'

जनगणना पर अहम अपील

अजमल ने आगामी जनगणना प्रक्रिया पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने असम के मुसलमानों से अपनी मातृभाषा के रूप में 'असमिया' दर्ज कराने का आग्रह किया। उनके अनुसार, 'इस बार जनगणना के दौरान मुसलमानों को अपनी भाषा के तौर पर असमिया लिखना चाहिए। इससे असमिया संस्कृति और समाज के साथ हमारे जुड़ाव की सच्चाई सामने आएगी।' यह कदम मुस्लिम समुदाय और असमिया समाज के बीच संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

असम कांग्रेस नेतृत्व पर सुझाव

अजमल ने असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) के नेतृत्व पर भी अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने सुझाव दिया कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता और धुबरी लोकसभा सांसद रकीबुल हुसैन को मौजूदा अध्यक्ष गौरव गोगोई के स्थान पर राज्य कांग्रेस की कमान सौंपी जानी चाहिए। अजमल का तर्क था कि हुसैन का लंबा राजनीतिक अनुभव और जमीनी स्तर पर जनसंपर्क आगामी चुनावी मुकाबलों से पहले असम में कांग्रेस संगठन को मज़बूती दे सकता है।

यह ऐसे समय में आया है जब असम की राजनीति में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी दलों के बीच तनाव बढ़ता दिख रहा है। आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री सरमा की तरफ से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया आने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मुसलमानों को असमिया भाषा अपनाने की अपील, और कांग्रेस के आंतरिक नेतृत्व पर सुझाव — जो उनकी बहुआयामी रणनीति दर्शाता है। जनगणना में असमिया भाषा दर्ज कराने की अपील राजनीतिक रूप से चतुर है, क्योंकि यह मुस्लिम समुदाय को 'बाहरी' बताने वाले उस नैरेटिव को चुनौती देती है जो भाजपा के लिए चुनावी हथियार रहा है। हालाँकि, मुख्यमंत्री सरमा की प्रतिक्रिया के बिना यह बहस एकतरफा है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बदरुद्दीन अजमल ने हिमंत बिस्वा सरमा पर क्या आरोप लगाए?
अजमल ने आरोप लगाया कि सरमा 'नफरत भरी बातें करने में नंबर वन' हैं और उनकी राजनीति व बयानों के कारण असम के मुसलमान भय के माहौल में जी रहे हैं। यह बयान उन्होंने 22 जून 2026 को गुवाहाटी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया।
बदरुद्दीन अजमल कौन हैं और उनकी राजनीतिक स्थिति क्या है?
बदरुद्दीन अजमल ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के प्रमुख हैं। वे हाल ही में हुए असम विधानसभा चुनावों में बिन्नाकंडी सीट से जीतकर दूसरी बार विधायक बने हैं।
अजमल ने जनगणना के बारे में मुसलमानों से क्या अपील की?
अजमल ने असम के मुसलमानों से आगामी जनगणना में अपनी मातृभाषा के रूप में 'असमिया' दर्ज कराने का आग्रह किया। उनका कहना है कि इससे असमिया संस्कृति और समाज के साथ मुस्लिम समुदाय के जुड़ाव की सच्चाई सामने आएगी।
अजमल ने असम कांग्रेस नेतृत्व पर क्या सुझाव दिया?
अजमल ने सुझाव दिया कि धुबरी लोकसभा सांसद रकीबुल हुसैन को मौजूदा APCC अध्यक्ष गौरव गोगोई की जगह असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि हुसैन का जमीनी अनुभव कांग्रेस को चुनावी रूप से मज़बूत कर सकता है।
अजमल फाउंडेशन क्या है और इसका सांप्रदायिक सद्भाव से क्या संबंध है?
अजमल फाउंडेशन बदरुद्दीन अजमल का चैरिटेबल संगठन है जो असम में शैक्षिक संस्थान चलाता है। अजमल के अनुसार इन संस्थानों में मुस्लिम और हिंदू दोनों समुदायों के छात्र बिना किसी भेदभाव के शिक्षा ग्रहण करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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