बदरुद्दीन अजमल का आरोप: हिमंत सरमा की नफरत भरी राजनीति से असम के मुसलमान भय में जी रहे हैं
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने 22 जून 2026 को गुवाहाटी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर गंभीर आरोप लगाए। अजमल ने दावा किया कि सरमा की राजनीति और सार्वजनिक बयानों के कारण असम का मुस्लिम समुदाय भय के वातावरण में जीने पर मजबूर है।
मुख्य आरोप और बयान
अजमल ने सीधे शब्दों में कहा, 'नफरत भरी बातें करने के मामले में हिमंत बिस्वा सरमा नंबर वन हैं। उनकी राजनीति और बयानों के कारण असम के मुसलमान डर में जी रहे हैं।' उन्होंने मुख्यमंत्री पर समाज को बाँटने वाले भाषण देने का आरोप लगाया और कहा कि इस तरह के बयान राज्य में सामाजिक तनाव को बढ़ाते हैं।
गौरतलब है कि अजमल हाल ही में संपन्न राज्य विधानसभा चुनावों में बिन्नाकंडी विधानसभा सीट से जीत दर्ज कर दूसरी बार विधायक बने हैं। इस जीत के बाद उनका यह पहला प्रमुख राजनीतिक बयान है।
सामाजिक सद्भाव और अजमल फाउंडेशन
AIUDF नेता ने यह भी स्पष्ट किया कि मुस्लिम समुदाय असम में सामाजिक सद्भाव और विकास के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने अपने चैरिटेबल संगठन अजमल फाउंडेशन के शैक्षिक कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा, 'अजमल फाउंडेशन के संस्थानों में न केवल मुस्लिम छात्र, बल्कि हिंदू लड़के-लड़कियाँ भी पढ़ते हैं। हमने हमेशा बिना किसी भेदभाव के शिक्षा और सामाजिक विकास के लिए काम किया है।'
जनगणना पर अहम अपील
अजमल ने आगामी जनगणना प्रक्रिया पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने असम के मुसलमानों से अपनी मातृभाषा के रूप में 'असमिया' दर्ज कराने का आग्रह किया। उनके अनुसार, 'इस बार जनगणना के दौरान मुसलमानों को अपनी भाषा के तौर पर असमिया लिखना चाहिए। इससे असमिया संस्कृति और समाज के साथ हमारे जुड़ाव की सच्चाई सामने आएगी।' यह कदम मुस्लिम समुदाय और असमिया समाज के बीच संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
असम कांग्रेस नेतृत्व पर सुझाव
अजमल ने असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) के नेतृत्व पर भी अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने सुझाव दिया कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता और धुबरी लोकसभा सांसद रकीबुल हुसैन को मौजूदा अध्यक्ष गौरव गोगोई के स्थान पर राज्य कांग्रेस की कमान सौंपी जानी चाहिए। अजमल का तर्क था कि हुसैन का लंबा राजनीतिक अनुभव और जमीनी स्तर पर जनसंपर्क आगामी चुनावी मुकाबलों से पहले असम में कांग्रेस संगठन को मज़बूती दे सकता है।
यह ऐसे समय में आया है जब असम की राजनीति में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी दलों के बीच तनाव बढ़ता दिख रहा है। आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री सरमा की तरफ से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया आने की संभावना है।