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मूल्य आधारित पत्रकारिता राष्ट्र निर्माण की नींव: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का हिंदी पत्रकारिता की 200वीं वर्षगांठ पर संबोधन

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मूल्य आधारित पत्रकारिता राष्ट्र निर्माण की नींव: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का हिंदी पत्रकारिता की 200वीं वर्षगांठ पर संबोधन

सारांश

हिंदी पत्रकारिता की 200वीं वर्षगांठ पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट संदेश दिया — गति नहीं, सटीकता और मूल्य ही पत्रकारिता की असली पहचान है। 'उदंत मार्तंड' से शुरू हुई यात्रा आज डिजिटल युग में भी उसी जिम्मेदारी की माँग करती है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 1 जून को मुंबई हिंदी पत्रकार संघ के कार्यक्रम में हिंदी पत्रकारिता की 200वीं वर्षगांठ पर संबोधन दिया।
उन्होंने मातृभाषा में शिक्षा को ज्ञान आत्मसात करने का सबसे प्रभावी माध्यम बताया।
भारत के पहले हिंदी समाचार पत्र 'उदंत मार्तंड' का उल्लेख करते हुए हिंदी पत्रकारिता के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को रेखांकित किया।
फडणवीस ने कहा कि समाचार की सटीकता और विश्वसनीयता उसकी गति से अधिक महत्वपूर्ण है।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने हिंदी को विश्व की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा बताया।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार, 1 जून को मुंबई में आयोजित एक विशेष समारोह में कहा कि मातृभाषा में शिक्षा, भारतीय भाषाओं का संरक्षण और मूल्य-आधारित पत्रकारिता देश के समग्र विकास के लिए अपरिहार्य हैं। यह कार्यक्रम मुंबई हिंदी पत्रकार संघ द्वारा हिंदी पत्रकारिता की 200वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था, जिसमें फडणवीस मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

मातृभाषा और भारतीय भाषाओं का महत्व

मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि ज्ञान, संस्कृति और मूल्यों की विरासत को भावी पीढ़ियों तक सबसे प्रभावी ढंग से मातृभाषा और भारतीय मूल की भाषाओं के माध्यम से ही पहुँचाया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब शिक्षा मातृभाषा में दी जाती है, तो विद्यार्थी ज्ञान को कहीं अधिक गहराई से आत्मसात कर पाते हैं। उन्होंने लोगों को अन्य भारतीय भाषाओं में भी दक्षता हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि व्यापक सांस्कृतिक एकता को बल मिल सके।

हिंदी पत्रकारिता का ऐतिहासिक योगदान

फडणवीस ने कहा, 'हिंदी पत्रकारिता का एक समृद्ध और गौरवशाली इतिहास है। इसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जन जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।' उन्होंने याद दिलाया कि भारत में प्रकाशित पहले हिंदी समाचार पत्र 'उदंत मार्तंड' से शुरू हुई इस यात्रा ने देश के सामाजिक और राजनीतिक विमर्श को सफलतापूर्वक आकार दिया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि स्वतंत्रता आंदोलन के अनेक नेताओं ने राष्ट्रवाद की प्रबल भावना जगाने के लिए पत्रकारिता को एक शक्तिशाली माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया।

महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के बीच सांस्कृतिक सेतु

मुख्यमंत्री ने महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंदी और मराठी दोनों ही संस्कृत परंपरा से विकसित हुई हैं और देवनागरी लिपि के कारण इनमें स्वाभाविक निकटता है। उन्होंने इस भाषाई साझेदारी को दोनों राज्यों की साझा विरासत का प्रतीक बताया।

बदलते मीडिया परिदृश्य में पत्रकारिता के मूल्य

पत्रकारिता के बदलते स्वरूप पर टिप्पणी करते हुए फडणवीस ने कहा कि प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और सोशल मीडिया के विस्तार ने सूचना के प्रसार को पूरी तरह बदल दिया है। हालाँकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी समाचार की सटीकता और विश्वसनीयता उसके प्रसारण की गति से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने पत्रकारिता को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में रेखांकित करते हुए कहा कि इसे बदलते समय में भी अपने मूल मूल्यों के साथ जनहित में काम करते रहना चाहिए।

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का संबोधन

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी इस अवसर पर संबोधित करते हुए कहा कि हिंदी दुनिया की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है और यह सभी को जोड़ने का कार्य करती है। यह आयोजन हिंदी पत्रकारिता की दो शताब्दियों की यात्रा का उत्सव था, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसलिए 'मूल्य-आधारित पत्रकारिता' का आह्वान तब और अधिक वजनदार होता जब सरकारी विज्ञापन वितरण में पारदर्शिता की भी बात होती। हिंदी पत्रकारिता की 200 वर्षों की यात्रा वास्तव में गौरवशाली है, लेकिन इस उत्सव का असली मूल्य तब होगा जब नीति-निर्माता स्वतंत्र पत्रकारिता को संरक्षण देने वाले ठोस कदम उठाएँ।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुख्यमंत्री फडणवीस ने हिंदी पत्रकारिता की 200वीं वर्षगांठ पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि मूल्य-आधारित पत्रकारिता लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि समाचार की सटीकता और विश्वसनीयता उसकी गति से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
हिंदी पत्रकारिता की 200वीं वर्षगांठ का क्या महत्व है?
भारत में पहला हिंदी समाचार पत्र 'उदंत मार्तंड' प्रकाशित हुआ था, और इस ऐतिहासिक यात्रा के 200 वर्ष पूरे होने पर मुंबई हिंदी पत्रकार संघ ने यह कार्यक्रम आयोजित किया। इस यात्रा ने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज के डिजिटल युग तक भारत के सामाजिक-राजनीतिक विमर्श को आकार दिया है।
मातृभाषा में शिक्षा को लेकर फडणवीस ने क्या कहा?
फडणवीस ने कहा कि जब शिक्षा मातृभाषा में दी जाती है, तो विद्यार्थी ज्ञान को कहीं अधिक प्रभावी ढंग से आत्मसात कर पाते हैं। उन्होंने लोगों को अन्य भारतीय भाषाओं में भी दक्षता हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया ताकि सांस्कृतिक एकता मजबूत हो।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कार्यक्रम में क्या कहा?
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि हिंदी दुनिया की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है और यह सभी को जोड़ने का कार्य करती है। उन्होंने हिंदी की व्यापक पहुँच और एकता में उसकी भूमिका को रेखांकित किया।
डिजिटल युग में पत्रकारिता के भविष्य पर फडणवीस का क्या दृष्टिकोण है?
फडणवीस ने कहा कि प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और सोशल मीडिया ने सूचना प्रसार को पूरी तरह बदल दिया है, लेकिन बदलते समय में भी पत्रकारिता को अपने मूल मूल्यों के साथ जनहित में काम करना चाहिए। उनके अनुसार समाचार की विश्वसनीयता ही उसकी सबसे बड़ी पूँजी है।
राष्ट्र प्रेस
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