केएस भगवान पर भगवान राम और हिंदू धर्म पर कथित टिप्पणियों को लेकर दावणगेरे में एफआईआर दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के दावणगेरे जिले में हरिहर ग्रामीण पुलिस ने लेखक और तर्कवादी केएस भगवान के खिलाफ 12 जून 2025 को प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की है। आरोप है कि भगवान ने 9 जून को आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भगवान राम, हिंदू धार्मिक मान्यताओं और वाल्मीकि रामायण के विरुद्ध कथित तौर पर अपमानजनक एवं भड़काऊ बयान दिए। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 196(1)(ए) और 299 के तहत दर्ज किया गया है।
कार्यक्रम की पृष्ठभूमि
जिस कार्यक्रम में यह विवाद उत्पन्न हुआ, वह कर्नाटक दलित संघर्ष समिति की ओर से बी. कृष्णप्पा जयंती और भीमराव अंबेडकर जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। 9 जून को हुए इस कार्यक्रम में लेखक केएस भगवान एक वक्ता के रूप में उपस्थित थे। गौरतलब है कि केएस भगवान कर्नाटक में एक जाने-माने तर्कवादी और लेखक हैं, जो अपने विवादास्पद सामाजिक-धार्मिक विचारों के लिए पहले भी चर्चा में रहे हैं।
शिकायत में क्या आरोप लगाए गए
शिकायत हरिहर के केआर नगर निवासी दिनेश ने दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, केएस भगवान ने कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर कहा कि 'भगवान श्री राम का जन्म राजा दशरथ से नहीं हुआ था।' शिकायत में यह भी आरोप है कि उन्होंने कहा, 'हिंदू देवताओं की पूजा नहीं की जानी चाहिए। हिंदू देवता हत्या करने वाले देवता हैं और वाल्मीकि ने रामायण के बारे में गलत जानकारी देकर धर्मग्रंथ का अपमान किया है।'
शिकायतकर्ता का कहना है कि इन कथित बयानों से हिंदुओं की धार्मिक भावनाएँ गंभीर रूप से आहत हुई हैं और समाज में विभिन्न समुदायों के बीच अशांति, तनाव व दुश्मनी फैलाने का प्रयास किया गया है।
कानूनी कार्रवाई
हरिहर ग्रामीण पुलिस ने शिकायत के आधार पर बीएनएस की धारा 196(1)(ए) — जो धार्मिक आधार पर शत्रुता को बढ़ावा देने से संबंधित है — और धारा 299 — जो धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करने से जुड़ी है — के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने आगे की जाँच शुरू कर दी है। फिलहाल केएस भगवान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों में कानूनी कार्रवाई की घटनाएँ बढ़ी हैं। आलोचकों का कहना है कि तर्कवादी विचारकों पर इस तरह के मुकदमे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर असर डाल सकते हैं, जबकि शिकायतकर्ता पक्ष का तर्क है कि सार्वजनिक मंच से दिए गए बयान सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुँचाते हैं। मामले की जाँच जारी है और अदालती प्रक्रिया आगे तय करेगी कि आरोप कितने ठोस हैं।
आगे क्या होगा
पुलिस जाँच के बाद आरोप-पत्र दाखिल होने की स्थिति में मामला न्यायालय के समक्ष जाएगा। केएस भगवान को कानूनी नोटिस या पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। इस घटनाक्रम पर कर्नाटक के सामाजिक और साहित्यिक हलकों की नज़र बनी हुई है।