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हिज्बुल प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन समेत 4 आतंकियों को श्रीनगर कोर्ट का समन, 14 जुलाई को पेशी का आदेश

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हिज्बुल प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन समेत 4 आतंकियों को श्रीनगर कोर्ट का समन, 14 जुलाई को पेशी का आदेश

सारांश

तीन दशक पुराने मामले में श्रीनगर की विशेष अदालत ने हिज्बुल मुजाहिदीन प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन समेत चार फरार आतंकवादियों को 14 जुलाई तक पेश होने का आदेश दिया है। कथित तौर पर PoK में छिपे ये आतंकी अब BNSS-2023 की धारा 84 के तहत न्यायिक दबाव में हैं।

मुख्य बातें

काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (CIK) ने 12 जून को अदालत का उद्घोषणा आदेश लागू किया।
हिज्बुल मुजाहिदीन प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन समेत 4 आतंकवादियों को 14 जुलाई को सुबह 10 बजे श्रीनगर कोर्ट में पेश होने का निर्देश।
आदेश BNSS-2023 की धारा 84 के तहत जारी; मामला FIR नंबर 05/1996 से जुड़ा है।
रिपोर्टों के अनुसार चारों आतंकवादी कथित तौर पर पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (PoK) में छिपे हैं।
उद्घोषणा आदेश आरोपियों के ठिकानों और मुख्य द्वार पर चिपकाया गया; प्रक्रिया की फोटो और वीडियो भी दर्ज।
14 जुलाई को अनुपस्थित रहने पर कानून के तहत कठोर आगे की कार्रवाई की चेतावनी।

काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (CIK) ने शुक्रवार, 12 जून को श्रीनगर की विशेष अदालत द्वारा जारी उद्घोषणा आदेश लागू किया, जिसमें प्रतिबंधित आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन के चीफ कमांडर मोहम्मद यूसुफ शाह उर्फ सैयद सलाहुद्दीन सहित चार फरार आतंकवादियों को 14 जुलाई को सुबह 10 बजे अदालत के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS)-2023 की धारा 84 के तहत जारी किया गया है।

मामले की पृष्ठभूमि

CIK पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR नंबर 05/1996 के तहत यह कार्रवाई की गई है। TADA/POTA (NIA अधिनियम के तहत नियुक्त स्पेशल जज) के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, श्रीनगर ने यह उद्घोषणा आदेश तब जारी किया जब जाँच के दौरान चारों आरोपी जानबूझकर गिरफ्तारी से बचते रहे और कानूनी कार्रवाई की अनदेखी करते रहे। गौरतलब है कि यह मामला तीन दशक पुराना है और अब न्यायिक प्रक्रिया के तहत इसे नए सिरे से आगे बढ़ाया जा रहा है।

चारों आरोपी आतंकवादियों की पहचान

अदालत के आदेश में जिन चार आतंकवादियों का नाम है, वे इस प्रकार हैं:

1. मोहम्मद यूसुफ शाह उर्फ सैयद सलाहुद्दीन (पिता: गुलाम रसूल शाह, निवासी: सोइबुग, बडगाम) — घोषित आतंकवादी और यूनाइटेड जिहाद काउंसिल (UJC) के चेयरमैन।

2. गुलाम नबी खान उर्फ अमीर खान (पिता: गुलाम रसूल खान, निवासी: लिवर श्रीगुफवारा, अनंतनाग) — घोषित आतंकवादी और हिज्बुल मुजाहिदीन कमांडर।

3. शेर मोहम्मद उर्फ बहादुर उर्फ रियाज (पिता: शेर अहमद, निवासी: मलंगम, बांदीपोरा)।

4. नासिर यूसुफ कादरी (पिता: मोहम्मद यूसुफ कादरी, निवासी: शीलटंग, डार मोहल्ला, हब्बा कदल, श्रीनगर)।

उद्घोषणा आदेश कैसे लागू किया गया

CIK की टीम ने सभी कानूनी प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन करते हुए उद्घोषणा आदेश को आरोपियों के संबंधित ठिकानों पर तथा उनके मुख्य द्वार सहित सभी प्रमुख स्थानों पर चिपकाया। CIK के बयान के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया की तस्वीरें और वीडियो भी दर्ज किए गए। यदि चारों आरोपी 14 जुलाई को अदालत में उपस्थित नहीं होते, तो कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

आरोपियों का ठिकाना और सुरक्षा अभियान

रिपोर्टों के अनुसार, ये चारों आतंकवादी कथित तौर पर पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (PoK) में छिपे हुए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बल अंदरूनी इलाकों में आतंकवादियों, उनके ओवरग्राउंड वर्करों (OGW) और समर्थकों के खिलाफ व्यापक संयुक्त अभियान चला रहे हैं। इन अभियानों का उद्देश्य केंद्र शासित प्रदेश में आतंकवाद के सपोर्ट नेटवर्क को जड़ से समाप्त करना है।

आगे क्या होगा

अदालत ने स्पष्ट किया है कि 14 जुलाई की निर्धारित तिथि पर उपस्थित न होने की स्थिति में BNSS-2023 के प्रावधानों के तहत कठोर कानूनी कदम उठाए जाएँगे। यह न्यायिक प्रक्रिया भारत के उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है जिसमें सीमा पार छिपे आतंकियों को भी कानूनी दायरे में लाने की कोशिश की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन PoK में बैठे आतंकियों तक उसकी व्यावहारिक पहुँच शून्य है। सलाहुद्दीन दशकों से पाकिस्तान की छत्रछाया में काम कर रहे हैं — ऐसे में यह समन प्रतीकात्मक न्यायिक दबाव तो है, पर वास्तविक जवाबदेही की राह अभी लंबी है। असली सवाल यह है कि क्या यह कदम किसी ठोस अंतरराष्ट्रीय कानूनी रणनीति का हिस्सा है, या केवल घरेलू प्रक्रिया की पूर्ति मात्र।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सैयद सलाहुद्दीन के खिलाफ कोर्ट का उद्घोषणा आदेश क्या है?
श्रीनगर की विशेष अदालत ने BNSS-2023 की धारा 84 के तहत हिज्बुल मुजाहिदीन प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन समेत चार आतंकवादियों को 14 जुलाई को सुबह 10 बजे अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। यह आदेश FIR नंबर 05/1996 के मामले में जारी किया गया है।
काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर ने उद्घोषणा आदेश कैसे लागू किया?
CIK टीम ने सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए उद्घोषणा आदेश को आरोपियों के संबंधित ठिकानों और मुख्य द्वार पर चिपकाया। पूरी प्रक्रिया की फोटो और वीडियो भी दर्ज किए गए।
14 जुलाई को अदालत में पेश न होने पर क्या होगा?
यदि चारों आरोपी 14 जुलाई को सुबह 10 बजे श्रीनगर अदालत में उपस्थित नहीं होते, तो BNSS-2023 के प्रावधानों के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसमें संपत्ति कुर्की जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।
ये चारों आतंकवादी अभी कहाँ हैं?
रिपोर्टों के अनुसार, चारों आतंकवादी कथित तौर पर पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (PoK) में छिपे हुए हैं। यही कारण है कि वे वर्षों से गिरफ्तारी से बचते आए हैं।
हिज्बुल मुजाहिदीन और सैयद सलाहुद्दीन कौन हैं?
हिज्बुल मुजाहिदीन भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित एक आतंकी संगठन है। सैयद सलाहुद्दीन, जिनका असली नाम मोहम्मद यूसुफ शाह है, इस संगठन के चीफ कमांडर और यूनाइटेड जिहाद काउंसिल (UJC) के चेयरमैन हैं, और भारत सरकार द्वारा घोषित आतंकवादी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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