हिजबुल आतंकी इम्तियाज कंडू के खिलाफ इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस, 2013 के सोपोर हमले में थी मुख्य भूमिका
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एसआईए) ने प्रतिबंधित संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के घोषित आतंकवादी इम्तियाज अहमद कंडू (उर्फ फयाज, उर्फ सज्जाद) के खिलाफ इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवाया है। यह नोटिस 26 अप्रैल 2013 को सोपोर के ह्यगाम इलाके में हुए उस आतंकवादी हमले से जुड़े मामले में जारी किया गया है, जिसमें जम्मू-कश्मीर पुलिस के चार जवान शहीद हो गए थे। एसआईए कश्मीर ने 11 जुलाई को यह जानकारी दी।
मुख्य घटनाक्रम
26 अप्रैल 2013 को सोपोर के ह्यगाम इलाके के पीर मोहल्ला में ऑटोमैटिक हथियारों से लैस आतंकवादियों ने एक पुलिस पार्टी पर अचानक हमला बोल दिया था। इस हमले में जम्मू-कश्मीर पुलिस के चार जवान शहीद हो गए थे। जांचकर्ताओं के अनुसार, यह उस दौर में सुरक्षा बलों पर हुए सबसे गंभीर आतंकवादी हमलों में से एक था।
यह मामला शुरू में तराजू पुलिस स्टेशन, सोपोर में दर्ज किया गया था। 2024 में इसे व्यापक जांच के लिए एसआईए कश्मीर को सौंप दिया गया। एसआईए ने साक्ष्यों का बारीकी से विश्लेषण किया, गवाहों से पूछताछ की और पूरी साजिश की परतें उघाड़ीं।
चार्जशीट और आरोपियों की स्थिति
विस्तृत जांच के बाद जुलाई 2024 में सक्षम ट्रायल कोर्ट में छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। जांच और उसके बाद के अभियानों के दौरान दो आरोपी — कलामाबाद, हंदवाड़ा के तारिक अहमद मीर और बटापोरा, सोपोर के कयूम नजर — सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए।
तीन अन्य आरोपी — सोपोर के जावेद अहमद मट्टू, रऊफ नजर और दलाल मोहल्ला, श्रीनगर के अहमदुल्लाह मल्ला — गिरफ्तार किए जा चुके हैं और उन पर मुकदमा चल रहा है। छठा और मुख्य आरोपी इम्तियाज अहमद कंडू फरार है और माना जाता है कि वह पाकिस्तान भाग गया है।
इम्तियाज कंडू: कौन है यह आतंकी
सोपोर के क्रालटंग के रहने वाले इम्तियाज अहमद कंडू 2010 से प्रतिबंधित संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के सक्रिय सदस्य और कमांडर रहे हैं। आतंकवादी गतिविधियों में लगातार संलिप्तता के कारण भारत सरकार ने अक्टूबर 2022 में उन्हें 'नामित व्यक्तिगत आतंकवादी' घोषित किया था।
एसआईए की जांच में यह स्थापित हुआ कि ह्यगाम हमले में कंडू की सक्रिय और मुख्य भूमिका थी। इसके अलावा, वह कम से कम दस अन्य आतंकी मामलों में वांछित हैं — जिनमें 15 से अधिक लोगों की हत्याएं, हथियार एवं गोला-बारूद की तस्करी और नार्को-टेरर फाइनेंसिंग शामिल हैं।
इंटरपोल नोटिस का महत्व
यह रेड कॉर्नर नोटिस अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को कंडू का पता लगाने, उसे हिरासत में लेने और भारत प्रत्यर्पित करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू करने में सहायक होगा। गौरतलब है कि इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस किसी फरार अपराधी के खिलाफ सबसे प्रभावी अंतरराष्ट्रीय कानूनी साधनों में से एक माना जाता है, जो 195 सदस्य देशों की पुलिस को सतर्क करता है।
यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में एसआईए पुराने अनसुलझे आतंकी मामलों की पुनः जांच कर उन्हें अंजाम तक पहुँचाने की मुहिम में जुटी है। आने वाले समय में कंडू के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया भारत-पाकिस्तान संबंधों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक दबाव पर भी निर्भर करेगी।