हूल क्रांति की 171वीं वर्षगांठ: BJP ने झारखंड के सभी मंडलों में दी श्रद्धांजलि, सरकार पर जनजातीय विरासत की उपेक्षा का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 30 जून 2025 को 1855 की हूल संथाल क्रांति की 171वीं वर्षगांठ पर झारखंड के सभी मंडलों में कार्यक्रम आयोजित कर क्रांति के नायकों सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और वीरांगनाओं फूलो-झानो को श्रद्धांजलि अर्पित की। राजधानी रांची के मोरहाबादी स्थित सिदो-कान्हू पार्क, साहिबगंज के भोगनाडीह और प्रदेश कार्यालय सहित राज्य के विभिन्न जिलों में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शहीदों को नमन किया।
रांची में वरिष्ठ नेताओं ने किया माल्यार्पण
रांची के सिदो-कान्हू पार्क में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में BJP प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने शहीदों की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस अवसर पर साहू ने कहा कि हूल दिवस जनजातीय समाज के स्वाभिमान, साहस और बलिदान का प्रतीक है। उन्होंने रेखांकित किया कि 30 जून 1855 को भोगनाडीह से शुरू हुई हूल क्रांति ने ब्रिटिश शासन और शोषण के विरुद्ध देश के स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा प्रदान की थी।
सरकार पर प्रशासनिक पाबंदियों का आरोप
साहू ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि श्रद्धांजलि कार्यक्रमों को लेकर जिस प्रकार की प्रशासनिक पाबंदियाँ लगाई गईं और भारी संख्या में पुलिस बल तथा मजिस्ट्रेट तैनात किए गए, उससे सरकार की मानसिकता अंग्रेजी शासन जैसी प्रतीत होती है। उन्होंने सवाल किया कि क्या अब आदिवासियों को अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने के लिए भी अनुमति लेनी पड़ेगी। साहू ने इसे सरकार का 'तानाशाही रवैया' बताते हुए कहा कि जनजातीय समाज की संस्कृति और विरासत से जुड़े आयोजनों में अनावश्यक हस्तक्षेप उचित नहीं है।
मरांडी ने उठाया आदिवासी भूमि का मुद्दा
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि 1855 का हूल आंदोलन ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियों के खिलाफ एक ऐतिहासिक जनविद्रोह था। उन्होंने कहा कि सिदो मुर्मू, कान्हू मुर्मू, चांद, भैरव तथा वीरांगनाओं फूलो और झानो के नेतृत्व में संथाल समाज ने जल, जंगल, जमीन और अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए अभूतपूर्व संघर्ष किया था। मरांडी के अनुसार यह आंदोलन केवल अंग्रेजी सत्ता के विरुद्ध विद्रोह नहीं था, बल्कि स्वतंत्रता, स्वाभिमान और अधिकारों के लिए जनजागरण का प्रतीक बन गया था।
मरांडी ने यह भी आरोप लगाया कि हूल आंदोलन के बाद जिस प्रधान व्यवस्था को भूमि बंदोबस्ती की जिम्मेदारी मिली थी, आज वह व्यवस्था कमजोर की जा रही है। उन्होंने राज्य सरकार पर आदिवासी भूमि और संसाधनों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
पाकुड़ सहित अन्य जिलों में भी श्रद्धांजलि
पाकुड़ में BJP के संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह ने हूल क्रांति के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि सिदो-कान्हू का बलिदान देश और समाज को अपनी मिट्टी तथा अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष की प्रेरणा देता रहेगा। राज्य के अन्य जिलों में भी BJP कार्यकर्ताओं ने हूल दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर शहीदों को नमन किया।
क्या होगा आगे
BJP के इन आरोपों के बाद झारखंड में जनजातीय विरासत और आदिवासी भूमि अधिकारों का मुद्दा राजनीतिक रूप से और अधिक तीखा होने की संभावना है। गौरतलब है कि हूल दिवस झारखंड में राजकीय पर्व के रूप में मनाया जाता है, और इस दिन होने वाले आयोजनों पर किसी भी प्रशासनिक सख्ती को जनजातीय समाज में संवेदनशील मुद्दे के रूप में देखा जाता है।