30 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

हूल क्रांति की 171वीं वर्षगांठ: BJP ने झारखंड के सभी मंडलों में दी श्रद्धांजलि, सरकार पर जनजातीय विरासत की उपेक्षा का आरोप

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
हूल क्रांति की 171वीं वर्षगांठ: BJP ने झारखंड के सभी मंडलों में दी श्रद्धांजलि, सरकार पर जनजातीय विरासत की उपेक्षा का आरोप

सारांश

हूल क्रांति की 171वीं वर्षगांठ पर BJP ने झारखंड भर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए — लेकिन यह केवल स्मरण नहीं था। भोगनाडीह में प्रशासनिक पाबंदियों और पुलिस तैनाती को लेकर पार्टी ने राज्य सरकार पर 'अंग्रेजी शासन जैसी मानसिकता' का आरोप लगाया, जिससे जनजातीय विरासत का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में आ गया है।

मुख्य बातें

BJP ने 30 जून 2025 को हूल क्रांति की 171वीं वर्षगांठ पर झारखंड के सभी मंडलों में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए।
रांची के सिदो-कान्हू पार्क में प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू , नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने माल्यार्पण किया।
साहू ने भोगनाडीह में प्रशासनिक पाबंदियों और भारी पुलिस तैनाती को लेकर राज्य सरकार पर 'तानाशाही रवैये' का आरोप लगाया।
मरांडी ने आरोप लगाया कि हूल आंदोलन के बाद स्थापित प्रधान भूमि व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है और आदिवासी भूमि-संसाधनों की अनदेखी हो रही है।
पाकुड़ में संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह सहित राज्यभर के BJP नेताओं ने शहीदों को नमन किया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 30 जून 2025 को 1855 की हूल संथाल क्रांति की 171वीं वर्षगांठ पर झारखंड के सभी मंडलों में कार्यक्रम आयोजित कर क्रांति के नायकों सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और वीरांगनाओं फूलो-झानो को श्रद्धांजलि अर्पित की। राजधानी रांची के मोरहाबादी स्थित सिदो-कान्हू पार्क, साहिबगंज के भोगनाडीह और प्रदेश कार्यालय सहित राज्य के विभिन्न जिलों में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शहीदों को नमन किया।

रांची में वरिष्ठ नेताओं ने किया माल्यार्पण

रांची के सिदो-कान्हू पार्क में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में BJP प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने शहीदों की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस अवसर पर साहू ने कहा कि हूल दिवस जनजातीय समाज के स्वाभिमान, साहस और बलिदान का प्रतीक है। उन्होंने रेखांकित किया कि 30 जून 1855 को भोगनाडीह से शुरू हुई हूल क्रांति ने ब्रिटिश शासन और शोषण के विरुद्ध देश के स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा प्रदान की थी।

सरकार पर प्रशासनिक पाबंदियों का आरोप

साहू ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि श्रद्धांजलि कार्यक्रमों को लेकर जिस प्रकार की प्रशासनिक पाबंदियाँ लगाई गईं और भारी संख्या में पुलिस बल तथा मजिस्ट्रेट तैनात किए गए, उससे सरकार की मानसिकता अंग्रेजी शासन जैसी प्रतीत होती है। उन्होंने सवाल किया कि क्या अब आदिवासियों को अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने के लिए भी अनुमति लेनी पड़ेगी। साहू ने इसे सरकार का 'तानाशाही रवैया' बताते हुए कहा कि जनजातीय समाज की संस्कृति और विरासत से जुड़े आयोजनों में अनावश्यक हस्तक्षेप उचित नहीं है।

मरांडी ने उठाया आदिवासी भूमि का मुद्दा

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि 1855 का हूल आंदोलन ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियों के खिलाफ एक ऐतिहासिक जनविद्रोह था। उन्होंने कहा कि सिदो मुर्मू, कान्हू मुर्मू, चांद, भैरव तथा वीरांगनाओं फूलो और झानो के नेतृत्व में संथाल समाज ने जल, जंगल, जमीन और अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए अभूतपूर्व संघर्ष किया था। मरांडी के अनुसार यह आंदोलन केवल अंग्रेजी सत्ता के विरुद्ध विद्रोह नहीं था, बल्कि स्वतंत्रता, स्वाभिमान और अधिकारों के लिए जनजागरण का प्रतीक बन गया था।

मरांडी ने यह भी आरोप लगाया कि हूल आंदोलन के बाद जिस प्रधान व्यवस्था को भूमि बंदोबस्ती की जिम्मेदारी मिली थी, आज वह व्यवस्था कमजोर की जा रही है। उन्होंने राज्य सरकार पर आदिवासी भूमि और संसाधनों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।

पाकुड़ सहित अन्य जिलों में भी श्रद्धांजलि

पाकुड़ में BJP के संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह ने हूल क्रांति के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि सिदो-कान्हू का बलिदान देश और समाज को अपनी मिट्टी तथा अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष की प्रेरणा देता रहेगा। राज्य के अन्य जिलों में भी BJP कार्यकर्ताओं ने हूल दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर शहीदों को नमन किया।

क्या होगा आगे

BJP के इन आरोपों के बाद झारखंड में जनजातीय विरासत और आदिवासी भूमि अधिकारों का मुद्दा राजनीतिक रूप से और अधिक तीखा होने की संभावना है। गौरतलब है कि हूल दिवस झारखंड में राजकीय पर्व के रूप में मनाया जाता है, और इस दिन होने वाले आयोजनों पर किसी भी प्रशासनिक सख्ती को जनजातीय समाज में संवेदनशील मुद्दे के रूप में देखा जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि झारखंड में जनजातीय राजनीति की ज़मीन पर दावेदारी का प्रयास भी है — ऐसे समय में जब राज्य में सत्तारूढ़ दल आदिवासी वोट बैंक पर मजबूत पकड़ रखता है। भोगनाडीह में प्रशासनिक पाबंदियों का मुद्दा उठाकर पार्टी ने सरकार को रक्षात्मक स्थिति में लाने की कोशिश की है, लेकिन इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। आदिवासी भूमि अधिकार और प्रधान व्यवस्था का सवाल झारखंड की राजनीति में दशकों पुराना है — और इसे हूल दिवस के मंच से उठाना BJP की उस रणनीति का हिस्सा लगता है जो जनजातीय पहचान को विपक्षी एजेंडे के केंद्र में रखना चाहती है।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हूल क्रांति क्या है और इसकी 171वीं वर्षगांठ क्यों महत्वपूर्ण है?
हूल क्रांति 30 जून 1855 को साहिबगंज के भोगनाडीह से शुरू हुआ संथाल समाज का ऐतिहासिक जनविद्रोह था, जिसमें सिदो मुर्मू और कान्हू मुर्मू के नेतृत्व में आदिवासियों ने ब्रिटिश शासन और जमींदारी शोषण के खिलाफ संघर्ष किया था। 171वीं वर्षगांठ इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिन झारखंड में राजकीय पर्व के रूप में मनाया जाता है और जनजातीय अस्मिता का प्रतीक माना जाता है।
BJP ने 30 जून 2025 को झारखंड में क्या कार्यक्रम आयोजित किए?
BJP ने झारखंड के सभी मंडलों में हूल दिवस पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए। रांची के सिदो-कान्हू पार्क में प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने माल्यार्पण किया, जबकि पाकुड़ सहित अन्य जिलों में भी पार्टी नेताओं ने शहीदों को नमन किया।
BJP ने झारखंड सरकार पर क्या आरोप लगाए?
BJP प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने आरोप लगाया कि भोगनाडीह में श्रद्धांजलि कार्यक्रमों पर प्रशासनिक पाबंदियाँ लगाई गईं और भारी पुलिस बल व मजिस्ट्रेट तैनात किए गए, जो उन्हें 'अंग्रेजी शासन जैसी मानसिकता' का प्रमाण लगा। नेता प्रतिपक्ष मरांडी ने अलग से आरोप लगाया कि सरकार आदिवासी भूमि अधिकारों और प्रधान व्यवस्था को कमजोर कर रही है।
सिदो-कान्हू और फूलो-झानो कौन थे?
सिदो मुर्मू और कान्हू मुर्मू 1855 की हूल क्रांति के प्रमुख नायक थे, जिन्होंने संथाल समाज को ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संगठित किया। चांद और भैरव उनके भाई थे, जबकि फूलो और झानो उनकी बहनें थीं जिन्होंने इस आंदोलन में वीरांगनाओं की भूमिका निभाई।
हूल दिवस पर प्रशासनिक पाबंदियों का मामला आगे कहाँ जाएगा?
BJP के आरोपों के बाद यह मुद्दा झारखंड विधानसभा और जनजातीय राजनीतिक मंचों पर उठने की संभावना है। हालाँकि राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, और प्रशासनिक पाबंदियों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि बाकी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. कल
  3. 12 महीने पहले
  4. 12 महीने पहले
  5. 1 साल पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले