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हैदराबाद बोनालु 2025: महाकाली मंदिरों में उमड़ी भक्तों की भीड़, 118वाँ वार्षिक उत्सव धूमधाम से संपन्न

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हैदराबाद बोनालु 2025: महाकाली मंदिरों में उमड़ी भक्तों की भीड़, 118वाँ वार्षिक उत्सव धूमधाम से संपन्न

सारांश

हैदराबाद में 118वाँ बोनालु उत्सव आस्था और परंपरा का संगम बना — महाकाली मंदिरों में हज़ारों भक्त उमड़े, विजय देवरकोंडा से लेकर केंद्रीय मंत्रियों तक सभी ने दर्शन किए। 2014 में राज्य त्योहार घोषित होने के बाद यह पर्व तेलंगाना की सांस्कृतिक पहचान का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुका है।

मुख्य बातें

हैदराबाद में 9 अगस्त को 118वाँ वार्षिक बोनालु उत्सव पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया।
लाल दरवाजा सिंहवाहिनी महाकाली मंदिर में विशेष पूजा; टॉलीवुड अभिनेता विजय देवरकोंडा और निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा ने दर्शन किए।
राज्य सरकार के कई मंत्रियों ने देवी को रेशमी साड़ी भेंट की; केंद्रीय मंत्री जी.
किशन रेड्डी और बंडी संजय कुमार भी उपस्थित रहे।
सुरक्षा के लिए 2,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात; तीनों कमिश्नरेट में शराब व बार बंद रखने का आदेश।
दो दिवसीय उत्सव का समापन सोमवार को अक्कन्ना मादन्ना मंदिर में होगा।
बोनालु को 2014 में तेलंगाना का राज्य त्योहार घोषित किया गया था।

तेलंगाना की सांस्कृतिक राजधानी हैदराबाद में रविवार, 9 अगस्त को वार्षिक बोनालु त्योहार पूरे पारंपरिक जोश और आस्था के साथ मनाया गया। शहर भर के महाकाली मंदिरों में सुबह से ही हज़ारों भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और महिलाओं ने सिर पर सजे 'बोनम' पात्र रखकर देवी को प्रसाद अर्पित किया।

बोनालु का महत्व और परंपरा

बोनालु तेलंगाना का प्रमुख राजकीय त्योहार है, जो प्रत्येक वर्ष आषाढ़ मास (जुलाई-अगस्त) में शक्ति की देवी महाकाली और उनके विभिन्न स्वरूपों को समर्पित होता है। मान्यता है कि यह पर्व बुराई का अंत करता है और जीवन में शांति व समृद्धि लाता है। इस अवसर पर महिलाएं पके हुए चावल, गुड़, दही और हल्दी वाले पानी से भरे स्टील और मिट्टी के बर्तन सिर पर रखकर मंदिर तक पैदल जाती हैं — यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।

गौरतलब है कि 2014 में तेलंगाना राज्य गठन के बाद बोनालु को आधिकारिक रूप से राज्य त्योहार घोषित किया गया था, जिसके बाद से इसका आयोजन और भव्य होता गया है।

118वाँ वार्षिक उत्सव: मुख्य आयोजन

ओल्ड सिटी के लाल दरवाजा स्थित सिंहवाहिनी महाकाली मंदिर में 118वें वार्षिक बोनालु उत्सव के उपलक्ष्य में विशेष पूजा-अर्चना की गई। यह मंदिर बोनालु उत्सव का केंद्रबिंदु माना जाता है और यहाँ सबसे अधिक भक्त एकत्रित होते हैं।

टॉलीवुड अभिनेता विजय देवरकोंडा, उनके भाई आनंद देवरकोंडा और निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा भी लाल दरवाजा मंदिर में दर्शन के लिए पहुँचे। मीडिया से बात करते हुए विजय देवरकोंडा ने बोनालु की शुभकामनाएं दीं और बताया कि उन्होंने संदीप रेड्डी के प्रोडक्शन हाउस 'भद्रकाली' के नाम से पूजा की।

राजनेताओं और मंत्रियों की सहभागिता

राज्य के मंत्री कोंडा सुरेखा और पोन्नम प्रभाकर, टीपीसीसी अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ और सांसद अनिल कुमार यादव ने लाल दरवाजा मंदिर में पूजा की। मंत्रियों ने राज्य सरकार की ओर से देवी को रेशमी साड़ी भेंट की। इस अवसर पर दान विभाग आयुक्त हनुमंथा राव, पुलिस कमिश्नर सज्जनार, हैदराबाद कलेक्टर प्रियंका आला और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

उद्योग और आईटी मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने ओल्ड सिटी के शाह अली बंदा स्थित ऐतिहासिक अक्कन्ना मादन्ना महाकाली मंदिर में दर्शन कर देवी को रेशमी साड़ी अर्पित की। पंचायत राज मंत्री सीतक्का और सरकार के सलाहकार वी. हनुमंथा राव ने अंबरपेट के महाकाली मंदिर में पूजा की। सीतक्का ने कहा कि उन्होंने लोगों के लिए अच्छी बारिश और समृद्धि की प्रार्थना की।

केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी और उनकी पत्नी ने अंबरपेट मंदिर में पूजा कर लोगों की खुशहाली की कामना की। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने मदन्नापेट के नल्लापोचम्मा मंदिर में पूजा की, जबकि राज्य स्वास्थ्य मंत्री दामोदर राज नरसिम्हा ने करवान क्षेत्र के दरबार मैसम्मा मंदिर में दर्शन किए।

विपक्षी दलों से भारत राष्ट्र समिति (BRS) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव चारमीनार के भाग्यलक्ष्मी मंदिर और लाल दरवाजा मंदिर पहुँचे। राज्य के भारतीय जनता पार्टी (BJP) अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने मलकाजगिरी के श्री उज्जैनी महाकाली अम्मावारी मंदिर में विशेष पूजा की।

सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था

भक्तों की सुविधा और सुरक्षा के लिए प्रशासन ने व्यापक इंतज़ाम किए। 2,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए और सरकार के विभिन्न विभागों ने पीने का पानी, साफ-सफाई, सड़क और बिजली की समुचित व्यवस्था की। त्योहार को देखते हुए हैदराबाद, साइबराबाद और रचकोंडा कमिश्नरेट में शराब की दुकानें, बार, रेस्तरां और ताड़ी की दुकानें बंद रखने का आदेश जारी किया गया।

आगे क्या

दो दिवसीय बोनालु उत्सव का समापन सोमवार को अक्कन्ना मादन्ना मंदिर में विशेष पूजा के साथ होगा। इस वर्ष के उत्सव ने एक बार फिर तेलंगाना की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता को रेखांकित किया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके साथ यह सवाल भी उठता है कि क्या सरकारी भागीदारी की बढ़ती दिखावट पर्व की जड़ों — यानी आम महिलाओं की सामूहिक आस्था — को पीछे धकेल रही है। हर दल के नेताओं का एक ही मंदिर में एकत्रित होना यह भी बताता है कि तेलंगाना में धार्मिक आयोजन अब चुनावी दृश्यता का अनिवार्य हिस्सा बन चुके हैं। असली उत्सव वे हज़ारों महिलाएं हैं जो सिर पर बोनम रखकर घंटों लाइन में खड़ी रहती हैं — उनकी कहानी अक्सर वीआईपी दर्शन की खबरों में दब जाती है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बोनालु त्योहार क्या है और यह कब मनाया जाता है?
बोनालु तेलंगाना का प्रमुख राजकीय त्योहार है, जो हर वर्ष आषाढ़ मास (जुलाई-अगस्त) में देवी महाकाली को समर्पित होता है। इसमें महिलाएं चावल, गुड़, दही और हल्दी वाले पानी से भरे बर्तन सिर पर रखकर मंदिरों में प्रसाद चढ़ाती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
हैदराबाद में 2025 का बोनालु उत्सव कितने वर्ष पुराना है?
इस वर्ष लाल दरवाजा सिंहवाहिनी महाकाली मंदिर में 118वाँ वार्षिक बोनालु उत्सव मनाया गया। यह परंपरा हैदराबाद में एक सदी से भी अधिक समय से चली आ रही है।
बोनालु को तेलंगाना का राज्य त्योहार कब घोषित किया गया?
तेलंगाना राज्य के गठन के बाद 2014 में बोनालु को आधिकारिक राज्य त्योहार घोषित किया गया। तब से यह पर्व और अधिक भव्य पैमाने पर मनाया जाने लगा है।
इस वर्ष के बोनालु उत्सव में कौन-कौन से प्रमुख मंदिर शामिल थे?
मुख्य आयोजन लाल दरवाजा के सिंहवाहिनी महाकाली मंदिर, शाह अली बंदा के अक्कन्ना मादन्ना महाकाली मंदिर, अंबरपेट के महाकाली मंदिर, चारमीनार के भाग्यलक्ष्मी मंदिर, मदन्नापेट के नल्लापोचम्मा मंदिर और मलकाजगिरी के श्री उज्जैनी महाकाली अम्मावारी मंदिर में हुए।
बोनालु के दौरान हैदराबाद में क्या-क्या प्रतिबंध लगाए गए?
त्योहार के मद्देनज़र हैदराबाद, साइबराबाद और रचकोंडा कमिश्नरेट में शराब की दुकानें, बार, रेस्तरां और ताड़ी की दुकानें बंद रखने का आदेश दिया गया। इसके अलावा 2,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए और पीने के पानी व सफाई की विशेष व्यवस्था की गई।
राष्ट्र प्रेस
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