डिब्रूगढ़ में 23 मई से आईसीएआई का दो दिवसीय सम्मेलन, 'सप्तसेतु' थीम पर 300 से अधिक विशेषज्ञ जुटेंगे
सारांश
मुख्य बातें
इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) के ईस्टर्न इंडिया रीजनल काउंसिल (EIRC) की डिब्रूगढ़, तिनसुकिया और गुवाहाटी शाखाओं के संयुक्त तत्वावधान में 23 मई से एक दो दिवसीय उप-क्षेत्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। डिब्रूगढ़ के मनोहारी टी रिजॉर्ट में होने वाले इस सम्मेलन की केंद्रीय थीम है — 'सप्तसेतु: सीए एक्सीलेंस के माध्यम से सात बहनों को जोड़ना'। यह पूर्वोत्तर भारत के चार्टर्ड अकाउंटेंट्स समुदाय के लिए पेशेवर संवाद और क्षेत्रीय एकजुटता का एक महत्वपूर्ण मंच बनने जा रहा है।
सम्मेलन का उद्देश्य और प्रतिभागी
पेशेवर उत्कृष्टता और क्षेत्रीय एकता को प्राथमिकता देते हुए आयोजित इस सम्मेलन में पूर्वोत्तर भारत सहित देश के विभिन्न हिस्सों से चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, उद्योगपति, विविध क्षेत्रों के विशेषज्ञ, शिक्षाविद और नीति-निर्माता भाग लेंगे। आईसीएआई के केंद्रीय और क्षेत्रीय परिषद के सदस्यों समेत कुल 300 से अधिक विशिष्ट प्रतिभागियों के जुटने की उम्मीद है। सम्मेलन में ज्ञान के आदान-प्रदान, पेशेवर विमर्श और नेटवर्किंग पर विशेष ज़ोर दिया जाएगा।
उद्घाटन समारोह: 23 मई
23 मई को सुबह 10 बजे आयोजित उद्घाटन समारोह में डिब्रूगढ़ जिले के उपायुक्त विक्रम कैरी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब पूर्वोत्तर भारत में व्यावसायिक और वित्तीय गतिविधियाँ तेज़ी से विस्तार पा रही हैं, और इस क्षेत्र में सीए पेशेवरों की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है।
सम्मान समारोह: 24 मई
सम्मेलन के दूसरे दिन 24 मई को सुबह 10 बजे एक विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया जाएगा। इसमें ऑयल इंडिया लिमिटेड के फाइनेंस एंड अकाउंट्स विभाग के कार्यकारी निदेशक ज्योतिर्मय भट्टाचार्य सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। गौरतलब है कि ऑयल इंडिया लिमिटेड का मुख्यालय डिब्रूगढ़ के निकट ही स्थित है, जो इस आयोजन को क्षेत्रीय उद्योग जगत से भी जोड़ता है।
चर्चा के प्रमुख विषय
दोनों दिनों में विशेषज्ञ कई समसामयिक विषयों पर अपने विचार रखेंगे। इनमें प्रमुख हैं — चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), आईपीओ की प्रक्रिया एवं रूपरेखा, 'उन्नति 2024' और एआईआईपीए 2019 के तहत सब्सिडी व प्रोत्साहन योजनाएँ, जीएसटी मामलों का सिमुलेशन और अदालतों के व्यावहारिक अनुभव, नया आयकर कानून 2025, अमेरिका-ईरान तनाव के आर्थिक निहितार्थ, तथा सीए प्रैक्टिस का ऑटोमेशन, गति और विस्तार। यह विषय-सूची दर्शाती है कि सम्मेलन केवल परंपरागत लेखा-परीक्षण तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक परिदृश्य और तकनीकी बदलावों को भी अपने दायरे में लेता है।
आगे क्या
यह सम्मेलन पूर्वोत्तर के सीए पेशेवरों को राष्ट्रीय विमर्श से जोड़ने की दिशा में एक सार्थक कदम माना जा रहा है। 24 मई को सम्मेलन के समापन के बाद प्रतिभागियों द्वारा साझा किए गए सुझाव और निष्कर्ष आईसीएआई की भावी नीतियों को दिशा देने में सहायक हो सकते हैं।