आईआईटी बॉम्बे में रेगुलर क्लासेस फिर शुरू, साहिल वाकोडे मामले में क्राइम ब्रांच की जाँच जारी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे में बुधवार, 23 सितंबर 2026 को नियमित कक्षाएँ फिर से शुरू हो गईं, जो द्वितीय वर्ष के बीटेक छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या के बाद भड़के छात्र-विरोध के चलते बाधित हो गई थीं। कैंपस के भीतर फ़िलहाल कोई विरोध-प्रदर्शन नहीं हो रहा है, हालाँकि बाहर कुछ छात्र अभी भी डटे हुए हैं।
कैंपस की मौजूदा स्थिति
12,000 से अधिक छात्रों और 700 से अधिक फैकल्टी सदस्यों वाले आईआईटी बॉम्बे परिसर के भीतर अब कहीं भी कोई धरना या प्रदर्शन नहीं हो रहा है। केवल मानविकी विभाग (Humanities) के कुछ छात्र और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के सदस्य कैंपस के बाहर बैठकर अपना विरोध जारी रखे हुए हैं।
क्राइम ब्रांच की जाँच में ताज़ा घटनाक्रम
मंगलवार को क्राइम ब्रांच ने साहिल वाकोडे के माता-पिता का बयान दर्ज किया। जाँच अधिकारियों के अनुसार, उनसे और जानकारी जुटाने के लिए दोबारा पूछताछ की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि साहिल के पास एक आईफोन था जो लॉक है; उसे अनलॉक करने के लिए तकनीकी सहायता ली जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, फोन खुलने के बाद चैट हिस्ट्री और जीपीटी हिस्ट्री की जाँच की जाएगी, ताकि मामले में लगाए गए दावों की पुष्टि या खंडन हो सके। यह एक महत्त्वपूर्ण तकनीकी कड़ी है जिस पर जाँच की अगली दिशा काफ़ी हद तक निर्भर करेगी।
एससी-एसटी सेल और काउंसलिंग सेंटर से माँगी जाएगी जानकारी
पुलिस ने बताया कि आईआईटी बॉम्बे में एससी-एसटी सेल और स्टूडेंट काउंसलिंग सेंटर मौजूद हैं। अधिकारियों ने कहा कि वे दोनों संस्थाओं को पत्र भेजकर यह जानकारी माँगेंगे कि क्या साहिल ने कभी वहाँ कोई शिकायत दर्ज कराई थी या उसकी काउंसलिंग हुई थी। यह कदम मामले की सामाजिक-संस्थागत पृष्ठभूमि को समझने की दिशा में उठाया जा रहा है।
निदेशक के इस्तीफे की अफवाह का खंडन
गौरतलब है कि सोमवार को आईआईटी बॉम्बे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर उन खबरों का खंडन किया जिनमें दावा किया गया था कि संस्थान के निदेशक प्रो. शिरीष बी. केदारे ने इस्तीफा दे दिया है। संस्थान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 'यह खबर पूरी तरह झूठी है।' इस खंडन के बाद सोशल मीडिया पर चल रही अटकलों पर कुछ हद तक विराम लगा।
आगे क्या होगा
क्राइम ब्रांच के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती साहिल के लॉक फोन से डेटा हासिल करना है, जो जाँच की अगली दिशा तय करेगा। माता-पिता से दोबारा पूछताछ और एससी-एसटी सेल से मिलने वाली जानकारी मिलकर यह तय करेगी कि मामले में कोई संस्थागत लापरवाही हुई या नहीं। इस बीच, कैंपस में सामान्य शैक्षणिक गतिविधियाँ बहाल होना प्रशासन के लिए राहत की बात है, लेकिन जाँच अभी लंबी चलने के आसार हैं।