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IIT एक्सप्लोरर फेलोशिप 2026: 56 छात्र टीमें 6 राज्यों की यात्रा पर, लैब से बाहर सीखेंगी भारत

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IIT एक्सप्लोरर फेलोशिप 2026: 56 छात्र टीमें 6 राज्यों की यात्रा पर, लैब से बाहर सीखेंगी भारत

सारांश

IIT की एक्सप्लोरर फेलोशिप 2026 इस साल 56 छात्र टीमों को छह राज्यों की छह-सप्ताह की यात्रा पर भेज रही है — स्लीपर ट्रेन, राज्य बसें और होमस्टे के सहारे। उद्देश्य सिर्फ पर्यटन नहीं, बल्कि भारत की सामाजिक-सांस्कृतिक विविधता से सीधा संवाद और लैब-केंद्रित इंजीनियरिंग शिक्षा में मानवीय आयाम जोड़ना है।

मुख्य बातें

IIT एक्सप्लोरर फेलोशिप 2026 के तहत 56 छात्र टीमें देश के 6 राज्यों की यात्रा करेंगी।
कुल 63 आवेदनों में से चयन के बाद 56 टीमों को अंतिम मंज़ूरी मिली।
हर टीम के लिए कम से कम एक राज्य पूर्वोत्तर , एक दक्षिण और एक उत्तर भारत से अनिवार्य।
यह 6-सप्ताह का कार्यक्रम स्लीपर ट्रेन, राज्य बसों, यूथ हॉस्टल और होमस्टे पर आधारित है।
IIT गांधीनगर ने कम-व्यय यात्रा ढाँचे के तहत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) की एक्सप्लोरर फेलोशिप 2026 के तहत 56 छात्र टीमें देश के छह राज्यों की यात्रा पर निकलेंगी, जिसका उद्देश्य लैब और क्लासरूम की चारदीवारी से बाहर निकलकर विद्यार्थियों को भारत की सामाजिक-सांस्कृतिक विविधता से सीधे जोड़ना है। 18 वर्ष से अधिक आयु के IIT छात्रों के लिए तैयार यह छह-सप्ताह का कार्यक्रम स्लीपर रेल यात्रा, राज्य परिवहन बसों, यूथ हॉस्टल और होमस्टे जैसे किफायती संसाधनों के माध्यम से संचालित किया जाएगा।

फेलोशिप की मुख्य विशेषताएँ

कार्यक्रम के नियमों के अनुसार, प्रत्येक टीम को कम से कम एक राज्य पूर्वोत्तर भारत से, एक दक्षिण भारत से और एक उत्तर भारत से चुनना अनिवार्य है। इस भौगोलिक विविधता का उद्देश्य छात्रों को अलग-अलग पृष्ठभूमियों, भाषाओं और जीवनशैलियों से रूबरू कराना है।

IIT गांधीनगर (IITGN) ने इन यात्राओं के लिए एक सुव्यवस्थित कम-व्यय यात्रा ढाँचे के अंतर्गत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई है, ताकि छात्र सीमित संसाधनों में जिम्मेदारीपूर्वक प्रबंधन करना भी सीख सकें।

चयन प्रक्रिया और आँकड़े

वर्ष 2026 संस्करण के लिए कुल 63 छात्र टीमों ने आवेदन किया, जिनमें से चयन प्रक्रिया के बाद 56 टीमों को अंतिम रूप से शामिल किया गया है। चयनित टीमें अपनी यात्रा को किसी एक विशिष्ट विषय — जैसे वास्तुकला, बाँध, यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, क्षेत्रीय व्यंजन या पारंपरिक परिधान — के इर्द-गिर्द गढ़ती हैं।

संस्थान का दृष्टिकोण

IIT के डीन, स्टूडेंट अफेयर्स प्रो. मनीष कुमार ने कहा, “IIT संस्थानों में अपनी तरह की यह पहली पहल छात्रों को परिसर से बाहर निकलकर लोगों, समुदायों और वास्तविकताओं से जुड़ने के लिए प्रेरित करती है। भारत की यात्रा करते हुए और अपरिचित परिस्थितियों का सामना करते हुए छात्र आत्मविश्वास, सहानुभूति, स्वतंत्रता और बेहतर निर्णय लेने की क्षमता विकसित करते हैं।”

उन्होंने जोड़ा कि यह कार्यक्रम छात्रों को समग्र शिक्षा प्रदान करने की संस्थान की सतत प्रतिबद्धता का हिस्सा है।

विषयगत यात्राओं की रचनात्मकता

एक्सप्लोरर फेलोशिप के संयोजक प्रो. चेतन डी. पहलाजानी के अनुसार, “फेलोशिप की सबसे रोचक बातों में से एक यह है कि हर वर्ष छात्र अपनी यात्रा को किसी नवीन विषय के इर्द-गिर्द संगठित करने के लिए अत्यंत रचनात्मक विचार प्रस्तुत करते हैं। इन विषयों में वास्तुकला, बाँध, यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, क्षेत्रीय व्यंजनों की विविधताएँ तथा पारंपरिक परिधानों की विभिन्न शैलियाँ शामिल रही हैं।”

यात्राओं के दौरान छात्र स्थानीय संस्कृतियों, हस्तशिल्प एवं हथकरघा परंपराओं, विरासत स्थलों, सामुदायिक उद्यमों तथा विविध सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों का अध्ययन करते हैं।

क्या होगा आगे

संस्थान का लक्ष्य ऐसे सर्वांगीण इंजीनियर तैयार करना है जो तकनीकी दक्षता के साथ-साथ सामाजिक रूप से जागरूक, सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और नए वातावरण में आत्मविश्वास से काम करने में सक्षम हों। आने वाले हफ्तों में चयनित टीमें अपनी-अपनी विषयगत यात्राएँ शुरू करेंगी और लौटकर अनुभवों का दस्तावेज़ीकरण प्रस्तुत करेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

कोड और कैंपस प्लेसमेंट से बनी है — ऐसे में एक्सप्लोरर फेलोशिप एक मौन लेकिन ज़रूरी सुधार है। भारतीय इंजीनियरिंग शिक्षा लंबे समय से इस आलोचना का सामना करती रही है कि वह तकनीकी रूप से दक्ष पर सामाजिक रूप से कटे हुए स्नातक तैयार करती है। स्लीपर क्लास और होमस्टे का अनिवार्य ढाँचा प्रतीकात्मक नहीं, संरचनात्मक है — यह सुनिश्चित करता है कि छात्र उस भारत से मिलें जो उनके भविष्य के उत्पादों का उपभोक्ता बनेगा। असली कसौटी यह होगी कि क्या यह मॉडल अन्य IIT कैंपसों तक पहुँचता है और मूल्यांकन में जुड़ता है, या यह केवल एक प्रशंसनीय ऐच्छिक कार्यक्रम बनकर रह जाता है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IIT एक्सप्लोरर फेलोशिप 2026 क्या है?
यह IIT द्वारा शुरू की गई एक छह-सप्ताह की फेलोशिप है, जिसमें 18 वर्ष से अधिक आयु के छात्र छह राज्यों की यात्रा करते हुए स्थानीय समुदायों, संस्कृतियों और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों का अध्ययन करते हैं। 2026 संस्करण में 56 छात्र टीमों का चयन किया गया है।
फेलोशिप के लिए कौन-से छात्र पात्र हैं और चयन कैसे हुआ?
फेलोशिप 18 वर्ष से अधिक आयु के IIT छात्रों के लिए उपलब्ध है, जो टीम बनाकर आवेदन करते हैं। 2026 के लिए कुल 63 टीमों ने आवेदन किया, जिनमें से चयन प्रक्रिया के बाद 56 टीमों को मंज़ूरी मिली।
छात्रों को कौन-से राज्यों में यात्रा करनी होती है?
प्रत्येक टीम को छह राज्यों की यात्रा करनी होती है, जिनमें कम से कम एक राज्य पूर्वोत्तर भारत से, एक दक्षिण भारत से और एक उत्तर भारत से होना अनिवार्य है। इसका उद्देश्य भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता का अनुभव सुनिश्चित करना है।
यात्रा और रहने की व्यवस्था कैसी होती है?
छात्रों को स्लीपर श्रेणी की रेल यात्रा या राज्य परिवहन बसों का उपयोग करना होता है और यूथ हॉस्टल तथा होमस्टे जैसे किफायती आवासों में ठहरना होता है। IIT गांधीनगर एक कम-व्यय यात्रा ढाँचे के तहत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराता है।
फेलोशिप का छात्रों के लिए क्या महत्व है?
यह कार्यक्रम छात्रों में लचीलापन, अनुकूलन क्षमता, आत्मविश्वास, सहानुभूति और बेहतर निर्णय लेने की क्षमता विकसित करता है। इसके साथ ही छात्र स्थानीय हस्तशिल्प, क्षेत्रीय व्यंजनों, विरासत स्थलों और सामुदायिक उद्यमों का अध्ययन करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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