30 जून 2026
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गांधीनगर में आईआईटीई कैंपस विस्तार की आधारशिला, ₹127 करोड़ की परियोजना में 600+ छात्रों के लिए छात्रावास

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गांधीनगर में आईआईटीई कैंपस विस्तार की आधारशिला, ₹127 करोड़ की परियोजना में 600+ छात्रों के लिए छात्रावास

सारांश

गांधीनगर में आईआईटीई के विस्तार की आधारशिला रखी गई — ₹127 करोड़ की यह परियोजना 600+ छात्रों के लिए आवास, विज्ञान प्रयोगशालाएँ और अत्याधुनिक पुस्तकालय लाएगी। 2010 में मोदी की परिकल्पना से जन्मा यह संस्थान अब एनईपी 2020 के तहत बहुविषयक विश्वविद्यालय बनने की राह पर है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 30 जून 2026 को गांधीनगर में आईआईटीई कैंपस विस्तार का शिलान्यास किया।
राज्य सरकार ने परियोजना के लिए ₹127 करोड़ की मंजूरी दी है।
नए परिसर में 600 से अधिक छात्र-छात्राओं के लिए आधुनिक छात्रावास, विज्ञान प्रयोगशालाएँ, पुस्तकालय और खेल सुविधाएँ बनेंगी।
आईआईटीई की स्थापना 2010 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना के तहत हुई थी; अब इसे बहुविषयक विश्वविद्यालय के रूप में विकसित किया जा रहा है।
विश्वविद्यालय में सात नए स्कूल स्थापित किए गए हैं और आईटीईपी पाठ्यक्रम का डिजिटल शुभारंभ भी किया गया।

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 30 जून 2026 को गांधीनगर स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टीचर्स एजुकेशन (आईआईटीई) के नए कैंपस विस्तार का भूमि पूजन और शिलान्यास किया। राज्य सरकार ने इस परियोजना के लिए ₹127 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की है, जिसके तहत अत्याधुनिक शैक्षणिक एवं शोध सुविधाओं के साथ-साथ 600 से अधिक छात्र-छात्राओं के लिए आधुनिक छात्रावास का निर्माण किया जाएगा।

परियोजना में क्या शामिल है

नए परिसर में आधुनिक शैक्षणिक भवन, फैकल्टी ब्लॉक, एडवांस क्लासरूम, विज्ञान प्रयोगशालाएँ, सेमिनार हॉल, अत्याधुनिक पुस्तकालय, संग्रहालय और खेल सुविधाएँ विकसित की जाएंगी। इसके अलावा 600 से अधिक छात्र-छात्राओं के लिए आवासीय सुविधा भी इस परियोजना का अभिन्न हिस्सा है। कार्यक्रम के दौरान आईटीईपी पाठ्यक्रम का डिजिटल शुभारंभ भी किया गया।

मंत्रियों की प्रतिक्रिया

शिक्षा मंत्री प्रद्युमन वाजा ने इस अवसर पर कहा कि यह परियोजना केवल एक भवन के निर्माण की शुरुआत नहीं, बल्कि ऐसे उत्कृष्ट शिक्षकों के निर्माण की नई शुरुआत है जो भारत के भविष्य को दिशा देंगे। उन्होंने कहा, 'भारत को केवल शिक्षक ही नहीं, बल्कि ऐसे राष्ट्रनिर्माता शिक्षकों को तैयार करना चाहिए जो वैश्विक स्तर पर भी शिक्षा के क्षेत्र में नेतृत्व कर सकें।'

वाजा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि गुजरात इस नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल है। उन्होंने बताया कि समग्र शिक्षा और शोध को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय में सात नए स्कूल स्थापित किए गए हैं। राज्य मंत्री त्रिकम छंगा ने विश्वास जताया कि एनईपी 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ यह संस्थान आने वाले वर्षों में देश की शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव लाएगा।

आईआईटीई की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि आईआईटीई की स्थापना वर्ष 2010 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना के तहत विश्वस्तरीय शिक्षक शिक्षा संस्थान के रूप में की गई थी। अब इसे बहुविषयक विश्वविद्यालय के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो बहुविषयक शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल-आधारित शिक्षण पर केंद्रित है।

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य दोनों सरकारें एनईपी 2020 के तहत उच्च शिक्षा संस्थानों को पुनर्गठित करने की दिशा में काम कर रही हैं। इस समारोह में प्रधानमंत्री मोदी के विद्यालयी जीवन में उन्हें पढ़ाने वाले वडनगर के श्री बी.एन. हाई स्कूल के शिक्षकों का भी विशेष सम्मान किया गया।

कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख हस्तियाँ

शिलान्यास समारोह में शिक्षा मंत्री प्रद्युमन वाजा, राज्य मंत्री त्रिकम छंगा और रिवाबा जडेजा, गांधीनगर की महापौर मीरा पटेल, राज्यसभा सांसद राजेश शुक्ला, विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य, शैक्षणिक प्रमुख, निदेशक, प्राचार्य और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

आगे की राह

₹127 करोड़ की इस परियोजना के पूरा होने के बाद आईआईटीई गुजरात ही नहीं, बल्कि पूरे देश में शिक्षक प्रशिक्षण के क्षेत्र में एक प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर होगा। शिक्षा मंत्री वाजा के अनुसार, नई आधारशिला 'विकसित गुजरात' के माध्यम से 'विकसित भारत' के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि आईआईटीई से निकले शिक्षकों की गुणवत्ता को मापने का तंत्र क्या होगा। एनईपी 2020 के तहत 'बहुविषयक विश्वविद्यालय' बनाने की महत्वाकांक्षा तब तक अधूरी रहेगी जब तक संस्थान के आउटपुट — यानी प्रशिक्षित शिक्षकों की कक्षा-प्रदर्शन क्षमता — को सत्यापन-योग्य मानकों से नहीं जोड़ा जाता। गुजरात का एनईपी क्रियान्वयन में 'अग्रणी राज्य' होने का दावा उत्साहजनक है, परंतु बुनियादी ढाँचे की चमक और शिक्षण-गुणवत्ता के बीच की खाई को भरना इस परियोजना की असली परीक्षा होगी।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईआईटीई गांधीनगर कैंपस विस्तार परियोजना क्या है?
यह गांधीनगर स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टीचर्स एजुकेशन (आईआईटीई) के नए परिसर के निर्माण की ₹127 करोड़ की परियोजना है, जिसका शिलान्यास 30 जून 2026 को मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने किया। इसमें आधुनिक शैक्षणिक भवन, शोध सुविधाएँ और 600 से अधिक छात्रों के लिए छात्रावास शामिल हैं।
आईआईटीई की स्थापना कब और किसने की थी?
आईआईटीई की स्थापना वर्ष 2010 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना के तहत विश्वस्तरीय शिक्षक शिक्षा संस्थान के रूप में की गई थी। अब इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप बहुविषयक विश्वविद्यालय के रूप में विकसित किया जा रहा है।
नए कैंपस में कौन-कौन सी सुविधाएँ होंगी?
नए परिसर में आधुनिक शैक्षणिक भवन, फैकल्टी ब्लॉक, एडवांस क्लासरूम, विज्ञान प्रयोगशालाएँ, सेमिनार हॉल, अत्याधुनिक पुस्तकालय, संग्रहालय, खेल सुविधाएँ और 600 से अधिक छात्र-छात्राओं के लिए आधुनिक छात्रावास बनाए जाएंगे।
एनईपी 2020 और आईआईटीई विस्तार का क्या संबंध है?
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 बहुविषयक शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल-आधारित शिक्षण पर जोर देती है। इसी के तहत आईआईटीई को बहुविषयक विश्वविद्यालय के रूप में विकसित किया जा रहा है और विश्वविद्यालय में सात नए स्कूल भी स्थापित किए गए हैं।
आईटीईपी पाठ्यक्रम क्या है और इसका शुभारंभ कब हुआ?
आईटीईपी (इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम) शिक्षक प्रशिक्षण का एकीकृत पाठ्यक्रम है। इसका डिजिटल शुभारंभ 30 जून 2026 को आईआईटीई कैंपस विस्तार के शिलान्यास समारोह के दौरान किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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