नेपाल में उर्वरक संकट: भारत देगा 80,000 टन खाद, G2G समझौते के तहत अगस्त तक होगी आपूर्ति

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नेपाल में उर्वरक संकट: भारत देगा 80,000 टन खाद, G2G समझौते के तहत अगस्त तक होगी आपूर्ति

सारांश

नेपाल में धान रोपाई सीजन से पहले उर्वरक संकट गहरा गया — होर्मुज जलडमरूमध्य में गतिरोध के कारण खाड़ी से आने वाली खेप अटक गई। भारत ने G2G ढाँचे के तहत 80,000 टन उर्वरक देने का वादा किया — यह दक्षिण एशिया में भारत की 'पड़ोसी पहले' नीति का ताज़ा उदाहरण है।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 12 मई 2026 को पुष्टि की कि भारत नेपाल को उर्वरक आपूर्ति करेगा।
G2G समझौते के तहत कुल 80,000 टन उर्वरक — 60,000 टन यूरिया और 20,000 टन DAP — की आपूर्ति होगी।
आपूर्ति अगस्त मध्य तक नेपाल पहुँचने की संभावना; सरकारी कंपनी राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड करेगी आपूर्ति।
यह समझौता भारत-नेपाल के बीच 2022 में हुए व्यापक उर्वरक आपूर्ति MOU का हिस्सा है।
भारत बांग्लादेश, भूटान, श्रीलंका और मॉरीशस को भी ऊर्जा उत्पाद उपलब्ध करा रहा है।

भारत के विदेश मंत्रालय ने 12 मई 2026 को पुष्टि की कि नेपाल में उर्वरक की गंभीर कमी को देखते हुए भारत सरकार-से-सरकार (G2G) समझौते के तहत 80,000 टन उर्वरक की आपूर्ति करेगा। पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण वैश्विक आपूर्ति शृंखला बाधित होने के बाद काठमांडू ने नई दिल्ली से यह अनुरोध किया था, जिसे भारत ने स्वीकार कर लिया।

क्या है पूरा मामला

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में बताया,

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसने संकट के समय त्वरित निर्णय को संभव बनाया। हालाँकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि भारत की यह उदारता तब आती है जब चीन भी नेपाल में अपनी आर्थिक उपस्थिति बढ़ा रहा है — रणनीतिक संदर्भ को नज़रअंदाज़ करना मुश्किल है। असली कसौटी यह होगी कि क्या यह खेप धान रोपाई सीजन से पहले समय पर पहुँचती है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत नेपाल को कितना उर्वरक देगा?
भारत G2G समझौते के तहत नेपाल को कुल 80,000 टन उर्वरक देगा, जिसमें 60,000 टन यूरिया और 20,000 टन DAP शामिल हैं। यह आपूर्ति अगस्त मध्य तक नेपाल पहुँचने की संभावना है।
नेपाल में उर्वरक की कमी क्यों हुई?
पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में गतिरोध की वजह से खाड़ी क्षेत्र से आने वाली उर्वरक की एक खेप अटक गई, जिससे नेपाल में गंभीर कमी उत्पन्न हुई। नेपाल की कैबिनेट ने इस स्थिति को देखते हुए तत्काल खरीद को मंजूरी दी।
भारत-नेपाल उर्वरक समझौता किस आधार पर हुआ है?
यह समझौता भारत और नेपाल के बीच 2022 में हुए व्यापक उर्वरक आपूर्ति MOU का हिस्सा है। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने इसकी पुष्टि की है।
उर्वरक की आपूर्ति कौन सी कंपनी करेगी?
भारत की सरकारी कंपनी राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड यह आपूर्ति करेगी। खेप के अगस्त मध्य तक नेपाल पहुँचने की संभावना बताई जा रही है।
क्या भारत अन्य पड़ोसी देशों को भी ऊर्जा उत्पाद दे रहा है?
हाँ, विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत बांग्लादेश को हाई-स्पीड डीजल फ्रेंडशिप पाइपलाइन के ज़रिए डीजल दे रहा है और भूटान, श्रीलंका तथा मॉरीशस के साथ भी ऊर्जा आपूर्ति की व्यवस्थाएँ चल रही हैं।
राष्ट्र प्रेस