रूस में फंसे भारतीय नागरिकों की वापसी: MEA ने कहा — हर स्तर पर उठाया जा रहा मुद्दा
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 3 नवंबर 2026 को साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में स्पष्ट किया कि भारत, रूसी सेना में फँसे अपने नागरिकों की रिहाई का मुद्दा विभिन्न द्विपक्षीय स्तरों पर लगातार उठाता रहेगा। उन्होंने बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात की, जिसमें यूरोप और मध्य पूर्व के जारी संघर्षों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
मुख्य घटनाक्रम
प्रवक्ता जायसवाल ने कहा, 'विदेश मंत्री ने जी20 बैठक के दौरान कई द्विपक्षीय बैठकें कीं। इनमें से एक बैठक रूस के विदेश मंत्री के साथ थी, जिसमें यूरोप और मध्य पूर्व के मौजूदा संघर्षों पर चर्चा हुई।' अटलांटा में आयोजित इस जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि उन्होंने लावरोव के साथ यूक्रेन संघर्ष, खाड़ी क्षेत्र की स्थिति और बहुपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की।
प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका
जायसवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली और बिश्केक में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई बैठकों में भी इस मुद्दे को उठाया था। इसके अतिरिक्त, विदेश मंत्री जयशंकर स्वयं मॉस्को की यात्रा कर लावरोव से मिले थे और कीव भी गए थे — जो इस मुद्दे पर भारत की कूटनीतिक सक्रियता का प्रमाण है।
अब तक की वापसी और शेष मामले
पिछले महीने विदेश मंत्रालय ने खुलासा किया था कि कथित तौर पर 259 भारतीय नागरिकों की भर्ती रूसी सेना में हुई थी। इनमें से 139 लोगों को भारत सरकार के प्रयासों से सेवा मुक्त कराकर स्वदेश लाया जा चुका है। शेष 69 भारतीयों की वापसी के लिए मॉस्को के साथ बातचीत जारी है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि वह यह नहीं बता सकता कि इन नागरिकों में से कितनों ने रूसी नागरिकता ग्रहण कर ली है, क्योंकि उसके अभिलेख केवल भारतीय नागरिकों से संबंधित हैं।
मुद्दे का व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब भारत-रूस संबंध उभरते वैश्विक ध्रुवीकरण के बीच संतुलन की कोशिश कर रहे हैं। गौरतलब है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान रूसी सेना में भारतीय नागरिकों के शामिल होने की खबरें 2024 की शुरुआत से सामने आने लगी थीं, जिसके बाद भारत सरकार ने कूटनीतिक दबाव बढ़ाया था। कई मामलों में युवाओं को नौकरी के झूठे वादों के साथ भेजे जाने की बात सामने आई थी।
आगे की राह
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत का रुख स्पष्ट है — जब तक शेष 69 नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित नहीं हो जाती, यह मुद्दा द्विपक्षीय एजेंडे में सर्वोच्च प्राथमिकता पर बना रहेगा। आने वाले हफ्तों में भारत-रूस राजनयिक चैनलों के माध्यम से और दौर की वार्ता अपेक्षित है।