वेनेजुएला में भारतीय नाविक राकेश चौहान के शव से अंग निकाले जाने के आरोप, भारतीय दूतावास ने माँगी निष्पक्ष जाँच
सारांश
मुख्य बातें
काराकास स्थित भारतीय दूतावास ने 3 जुलाई 2026 को वेनेजुएला के अधिकारियों से दिवंगत भारतीय नाविक राकेश चौहान के पार्थिव शरीर के साथ कथित तौर पर की गई छेड़छाड़ और अंग निकाले जाने के गंभीर आरोपों की पूर्ण एवं पारदर्शी जाँच की माँग की है। उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के निवासी 33 वर्षीय राकेश चौहान की मृत्यु कथित तौर पर मई 2026 में वेनेजुएला में हृदय गति रुकने से हुई थी, और उनका शव मृत्यु के लगभग एक माह बाद भारत लौटाया गया।
परिवार के आरोप और भारत में पोस्टमार्टम के निष्कर्ष
चौहान के परिजनों ने तब गंभीर आशंका जताई जब भारत में कराए गए दोबारा पोस्टमार्टम में कथित तौर पर पता चला कि शव से मस्तिष्क, हृदय, फेफड़े, लिवर, किडनी, तिल्ली, अग्न्याशय, पेट और आँतें सहित लगभग सभी आंतरिक अंग अनुपस्थित थे। परिवार के अनुसार, शरीर पर बड़ी संख्या में टाँके भी मिले, जबकि अंगों की अनुपस्थिति के कारण मृत्यु का सटीक कारण निर्धारित करना संभव नहीं हो सका।
परिजनों ने यह भी बताया कि नवंबर 2025 में चौहान एक मर्चेंट नेवी जहाज पर क्रू सदस्य के रूप में वेनेजुएला गए थे।
भारतीय दूतावास की प्रतिक्रिया
भारतीय दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपने आधिकारिक बयान में कहा, "भारतीय दूतावास, काराकस ने दिवंगत राकेश चौहान के पार्थिव शरीर के अंगों को हटाने और उनके अपमान के मामले में वेनेजुएला के अधिकारियों से पूरी जाँच की माँग की है। घटना सामने आने के बाद से मिशन संबंधित स्थानीय अधिकारियों के साथ इस मामले को आगे बढ़ा रहा है।"
दूतावास ने स्पष्ट किया कि जब से यह मामला प्रकाश में आया है, वह लगातार वेनेजुएला के स्थानीय अधिकारियों के साथ संपर्क में है और मामले की प्रगति पर नज़र रख रहा है।
नाविक संघ की माँगें
फेडरेशन ऑफ सीफेयरर्स यूनियंस ऑफ इंडिया (FSUI) ने एक्स पर पोस्ट किए गए बयान में आरोप लगाया कि वेनेजुएला के अधिकारियों ने मृत्यु का कारण बताने के बावजूद बिना किसी ऑटोप्सी रिपोर्ट या आधिकारिक दस्तावेज़ के शव वापस भेज दिया। संगठन ने इस स्थिति को सर्वथा अस्वीकार्य करार देते हुए वेनेजुएला के अधिकारियों से पूर्ण जवाबदेही, पारदर्शिता और विस्तृत जाँच की माँग की है।
FSUI ने काराकास स्थित भारतीय दूतावास से तत्काल हस्तक्षेप करने, सम्पूर्ण ऑटोप्सी रिकॉर्ड सार्वजनिक करने और मृत्यु की परिस्थितियाँ स्पष्ट करने का आग्रह किया है।
विदेशों में भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर सवाल
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब विदेशों में कार्यरत भारतीय नाविकों की सुरक्षा, उचित दस्तावेज़ीकरण और कानूनी संरक्षण को लेकर चिंताएँ पहले से मौजूद हैं। गौरतलब है कि मर्चेंट नेवी में कार्यरत भारतीय नागरिक दुनिया के कई देशों में तैनात हैं, और ऐसी घटनाओं में संस्थागत जवाबदेही की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
आलोचकों का कहना है कि विदेशों में भारतीय नाविकों की मृत्यु के मामलों में मजबूत प्रोटोकॉल, अनिवार्य दस्तावेज़ीकरण और द्विपक्षीय समझौतों की सख्त जरूरत है। इस मामले की जाँच के नतीजे न केवल चौहान परिवार को न्याय दिलाने के लिए, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भी अहम होंगे।