भारतीय नाविक निशांत उर्थनाथन का पार्थिव शरीर डुकम पोर्ट पहुंचा, कानूनी प्रक्रिया के बाद स्वदेश लाया जाएगा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय नाविक निशांत उर्थनाथन का पार्थिव शरीर 14 जून 2025 को ओमान के डुकम बंदरगाह पर पहुँच गया। ओमान स्थित भारतीय दूतावास ने पुष्टि की है कि संबंधित ओमानी अधिकारी पार्थिव शरीर को जहाज से उतारने की सभी अनिवार्य प्रक्रियाएँ पूरी कर रहे हैं। ओमान में कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएँ पूरी होते ही निशांत के पार्थिव शरीर को यथाशीघ्र भारत भेजा जाएगा।
मुख्य घटनाक्रम
35 वर्षीय निशांत उर्थनाथन एमटी सेलेस्टियल जहाज पर दूसरे अधिकारी के रूप में कार्यरत थे। 11 जून 2025 की शाम को ओमान के तटवर्ती अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उस समय क्षेत्र में जारी तनाव के कारण उन्हें समय पर उचित चिकित्सा सहायता नहीं मिल सकी, जिसके चलते गुरुवार, 12 जून 2025 को उनका निधन हो गया।
दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर जानकारी दी: 'निशांत उर्थनाथन का पार्थिव शरीर ले जा रहा एमटी सेलेस्टियल जहाज अब डुकम पोर्ट पर पहुँच गया है, जहाँ संबंधित ओमानी अधिकारी पार्थिव शरीर को उतारने के लिए ज़रूरी प्रक्रिया पूरी करेंगे। मिशन ने पोर्ट पर इस प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए सभी आवश्यक इंतज़ाम कर लिए हैं।'
नाविक संघ की प्रतिक्रिया
फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) — भारत का सबसे बड़ा और पुराना नाविक व्यापार संघ — ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। संघ ने कहा, 'नाविकों के लिए एक और दुखद घटना। एमटी सेलेस्टियल के दूसरे अधिकारी की 11 जून की शाम 6 बजे तक समय पर मेडिकल मदद न मिलने की वजह से मौत हो गई। दो दिन बाद भी पार्थिव शरीर जहाज पर ही रहा। डुकम पोर्ट ने वाई-फाई और संचार सुविधाएँ बंद कर दीं और अधिकारी कोई जवाब नहीं दे रहे थे।'
FSUI ने यह भी रेखांकित किया कि नाविक दुनिया भर का व्यापार संचालित करते हैं, फिर भी उन्हें ऐसे संघर्षों के बीच चिकित्सा देखभाल और स्वदेश वापसी में घोर उपेक्षा का सामना करना पड़ता है, जिनसे उनका कोई संबंध नहीं होता।
भारतीय दूतावास के प्रयास
इससे पूर्व रविवार को भारतीय दूतावास ने बताया था कि वह लगातार निशांत के परिवार, जहाज के चालक दल के सदस्यों और संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है। दूतावास ने स्पष्ट किया कि चिकित्सीय कारणों से हुए इस निधन के बाद पार्थिव शरीर को यथाशीघ्र स्वदेश लाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
आम जनता और नाविक समुदाय पर असर
यह घटना अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर तैनात भारतीय नाविकों की सुरक्षा और चिकित्सा सहायता की गंभीर कमी को उजागर करती है। गौरतलब है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े नाविक-आपूर्तिकर्ता देशों में से एक है, और हज़ारों भारतीय नाविक इसी तरह के जोखिम भरे समुद्री क्षेत्रों में कार्यरत हैं।
क्या होगा आगे
ओमानी अधिकारियों द्वारा डुकम पोर्ट पर औपचारिकताएँ पूरी होने के बाद निशांत उर्थनाथन के पार्थिव शरीर को भारत भेजा जाएगा। भारतीय दूतावास ने परिवार को यथाशीघ्र अंतिम संस्कार की सुविधा दिलाने का आश्वासन दिया है।