30 जुलाई 2026
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एमटी सेलेस्टियल में भारतीय नाविक निशांत उर्थनाथन की मौत, दूतावास ने कहा — पार्थिव शरीर स्वदेश लाने के प्रयास जारी

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एमटी सेलेस्टियल में भारतीय नाविक निशांत उर्थनाथन की मौत, दूतावास ने कहा — पार्थिव शरीर स्वदेश लाने के प्रयास जारी

सारांश

ओमान के डुक्म बंदरगाह पर एमटी सेलेस्टियल जहाज पर भारतीय नाविक निशांत उर्थनाथन का स्वास्थ्य जटिलताओं से निधन हो गया। यह घटना खाड़ी में अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद सामने आई है, जिससे कूटनीतिक तनाव और गहरा हो गया है।

मुख्य बातें

भारतीय नागरिक निशांत उर्थनाथन का एमटी सेलेस्टियल जहाज पर स्वास्थ्य जटिलताओं के कारण निधन, पार्थिव शरीर डुक्म बंदरगाह , ओमान में।
मस्कट स्थित भारतीय दूतावास ने 14 जून को पुष्टि की कि पार्थिव शरीर को जल्द भारत भेजने की प्रक्रिया जारी है।
खाड़ी में अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों में एमटी सेट्टेबेलो पर हमले में 3 भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है।
तेल टैंकर मैरीवेक्स पर 8 जून के हमले में सवार 24 भारतीय सुरक्षित बचाए गए; जलवीर पर 11 जून को हमला हुआ जिसमें 20 भारतीय सवार थे।
जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से बातचीत में भारत का कड़ा विरोध दर्ज कराया।
भारत ने जेसन मीक्स (अमेरिकी दूतावास प्रभारी, नई दिल्ली) को तलब कर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई।

ओमान के डुक्म बंदरगाह पर खड़े मोटर टैंकर एमटी सेलेस्टियल पर स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण भारतीय नागरिक निशांत उर्थनाथन का 12 जून 2025 (गुरुवार) को निधन हो गया। मस्कट स्थित भारतीय दूतावास ने पुष्टि की है कि वह मृतक के परिवार, जहाज के चालक दल और संबंधित अधिकारियों के निरंतर संपर्क में है तथा पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत भेजने की प्रक्रिया सक्रिय रूप से जारी है।

दूतावास का बयान

भारतीय दूतावास ने 14 जून को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट के माध्यम से जानकारी दी कि दूतावास लगातार निशांत उर्थनाथन के परिवार, जहाज के चालक दल के सदस्यों और संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है। दूतावास ने स्पष्ट किया कि 'चिकित्सा संबंधी कारणों के चलते उनका दुर्भाग्यपूर्ण निधन हो गया और उनके पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द जहाज से उतारकर भारत भेजने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं।'

इससे एक दिन पहले, 13 जून (शनिवार) को भी दूतावास ने एक्स पर पोस्ट कर बताया था कि निशांत का निधन एमटी सेलेस्टियल पर ही हुआ और उनका शव फिलहाल डुक्म बंदरगाह पर खड़े पोत पर है। दूतावास ने पोत प्रबंधन कंपनी के साथ निरंतर समन्वय की भी जानकारी दी तथा शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।

व्यापक संदर्भ: खाड़ी में भारतीय नाविकों पर संकट

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब खाड़ी क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ उभरी हैं। अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों में भारत के तीन जहाजों को क्षति पहुँची थी। पलाऊ के ध्वज वाले एमटी सेट्टेबेलो पर हुए हमले में तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई थी।

इसके अलावा, पलाऊ के ध्वज वाले तेल टैंकर मैरीवेक्स पर 8 जून को हमला हुआ था, जिसमें सवार 24 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया। गिनी-बिसाऊ के ध्वज वाले टैंकर जलवीर पर 11 जून (गुरुवार) को हमला हुआ, जिसमें 20 भारतीय नागरिक सवार थे।

भारत की कूटनीतिक प्रतिक्रिया

भारत ने इन हमलों पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 13 जून को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ बातचीत में यह मुद्दा उठाया। जयशंकर ने एक्स पर लिखा, 'अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से बात हुई। मैंने खाड़ी में अमेरिकी नौसेना के हमलों, जिनमें तीन भारतीय नाविक मारे गए थे, पर भारत के कड़े विरोध को दोहराया।' उन्होंने यह भी कहा, 'कमर्शियल जहाजों के खिलाफ इस तरह का घातक हमला उचित नहीं है।'

भारत ने शुक्रवार, 13 जून को नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी जेसन मीक्स को तलब कर आपत्ति दर्ज कराई थी। इससे पहले बुधवार रात को भी एक वरिष्ठ कूटनीतिज्ञ को तलब किया गया था।

अमेरिकी सेंटकॉम का पक्ष

होर्मुज में नाकेबंदी कर रहे अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने कथित तौर पर दावा किया था कि उनके निर्देशों का पालन नहीं किया गया था, जिसके बाद उन्होंने निशाना साधा। हालाँकि, भारत ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए व्यावसायिक जहाजों पर हमले को अनुचित बताया है।

आगे की स्थिति

फिलहाल निशांत उर्थनाथन का पार्थिव शरीर डुक्म बंदरगाह पर खड़े जहाज पर है और दूतावास पोत प्रबंधन कंपनी के साथ मिलकर इसे स्वदेश लाने की औपचारिकताएँ पूरी करने में जुटा है। खाड़ी क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर राजनयिक दबाव आने वाले दिनों में और बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मैरीवेक्स और जलवीर पर हमले। यह प्रश्न अनुत्तरित है कि क्या भारत का कूटनीतिक विरोध — दूतावास अधिकारियों को तलब करना और जयशंकर-रूबियो वार्ता — व्यावसायिक जहाजों पर अमेरिकी कार्रवाई की नीति में कोई ठोस बदलाव ला पाएगा। होर्मुज जलडमरूमध्य में भारत के व्यापारिक हित और नाविकों की सुरक्षा दोनों दाँव पर हैं, और मुखर विरोध के बावजूद नई दिल्ली की कार्रवाई अब तक शब्दों तक सीमित रही है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निशांत उर्थनाथन कौन थे और उनकी मौत कैसे हुई?
निशांत उर्थनाथन एक भारतीय नागरिक और नाविक थे जो मोटर टैंकर एमटी सेलेस्टियल पर कार्यरत थे। ओमान के डुक्म बंदरगाह पर खड़े इस जहाज पर स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण उनका निधन हो गया।
एमटी सेलेस्टियल का पार्थिव शरीर कब तक भारत आएगा?
मस्कट स्थित भारतीय दूतावास ने 14 जून को बताया कि पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत भेजने की प्रक्रिया जारी है। अभी तक कोई निश्चित तिथि घोषित नहीं की गई है।
खाड़ी में अमेरिकी हमलों में कितने भारतीय नाविक प्रभावित हुए?
अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों में एमटी सेट्टेबेलो पर हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हुई। मैरीवेक्स पर 8 जून के हमले में 24 भारतीय सुरक्षित बचाए गए और जलवीर पर 11 जून को हुए हमले में 20 भारतीय नागरिक सवार थे।
भारत ने अमेरिकी हमलों पर क्या कदम उठाए हैं?
भारत ने नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी जेसन मीक्स को तलब कर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ बातचीत में भारत का कड़ा विरोध दोहराया और कमर्शियल जहाजों पर घातक हमलों को अनुचित बताया।
अमेरिकी सेंटकॉम ने हमलों को लेकर क्या तर्क दिया?
होर्मुज में नाकेबंदी कर रहे अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने कथित तौर पर दावा किया कि उनके निर्देशों का पालन नहीं किया गया था, जिसके बाद उन्होंने जहाजों को निशाना बनाया। भारत ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए व्यावसायिक जहाजों पर हमले की निंदा की है।
राष्ट्र प्रेस
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