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ओमान तट पर भारतीय नाविक निशांत उर्थनाथन की मौत, समय पर इलाज न मिलने से हुआ निधन

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ओमान तट पर भारतीय नाविक निशांत उर्थनाथन की मौत, समय पर इलाज न मिलने से हुआ निधन

सारांश

ओमान के दुकम बंदरगाह पर खड़े जहाज एमटी सेलेस्टियल पर 35 वर्षीय भारतीय नाविक निशांत उर्थनाथन की 11 जून को मौत हो गई — समय पर इलाज न मिलने के कारण। अमेरिका-ईरान तनाव की आँच में फँसे इस नाविक का पार्थिव शरीर दो दिन बाद भी जहाज पर पड़ा है।

मुख्य बातें

निशांत उर्थनाथन (35) , एमटी सेलेस्टियल के द्वितीय अधिकारी, की 11 जून 2026 को शाम 6 बजे ओमान तट पर मौत हुई।
कथित तौर पर समय पर चिकित्सा सहायता न मिलने के कारण निधन हुआ; अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच क्षेत्र में तनाव का हवाला।
पार्थिव शरीर दुकम बंदरगाह, ओमान पर जहाज पर ही; भारतीय दूतावास शीघ्र वापसी के प्रयास में।
FSUI ने आरोप लगाया कि दुकम बंदरगाह ने वाई-फाई और संचार बंद कर दिया, अधिकारी जवाब नहीं दे रहे।
दूतावास शिप मैनेजमेंट कंपनी और सभी संबंधित पक्षों के साथ समन्वय कर रहा है।

ओमान के तट पर तैनात जहाज एमटी सेलेस्टियल पर 11 जून 2026 को 35 वर्षीय भारतीय नाविक निशांत उर्थनाथन का निधन हो गया। ओमान स्थित भारतीय दूतावास ने पुष्टि की कि स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बावजूद उन्हें समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिल सकी, जिसके चलते उनकी जान चली गई। उनका पार्थिव शरीर ओमान के दुकम बंदरगाह पर जहाज पर ही रखा हुआ है।

मुख्य घटनाक्रम

भारतीय दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर जानकारी दी कि निशांत उर्थनाथन का निधन स्वास्थ्य परेशानियों के कारण हुआ और उनका पार्थिव शरीर अभी भी दुकम बंदरगाह पर एमटी सेलेस्टियल पर है। दूतावास ने कहा कि वह लगातार शिप मैनेजमेंट कंपनी के संपर्क में है और सभी संबंधित पक्षों के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत वापस लाया जा सके।

फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) — जो भारतीय नाविकों और मर्चेंट नेवी कर्मचारियों के अधिकारों के लिए लड़ने वाला देश का सबसे बड़ा और पुराना व्यापार संघ है — ने बताया कि एमटी सेलेस्टियल के द्वितीय अधिकारी की 11 जून को शाम 6 बजे मौत हुई। यूनियन ने आरोप लगाया कि दो दिन बाद भी पार्थिव शरीर जहाज पर ही पड़ा है और दुकम बंदरगाह ने वाई-फाई और संचार सुविधाएँ बंद कर दी हैं, जबकि बंदरगाह अधिकारी कोई जवाब नहीं दे रहे।

क्षेत्रीय तनाव का असर

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष की आँच ओमान तट तक पहुँच रही है। कथित तौर पर अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में जारी इस तनाव के बीच निशांत की तबीयत बिगड़ी और क्षेत्र में हमलों की आशंका के कारण उन्हें उचित चिकित्सा सुविधा समय पर नहीं मिल सकी। ओमान तट के निकट कई जहाजों को निशाना बनाए जाने की भी खबरें हैं।

FSUI की आवाज़ — नाविकों की अनदेखी पर सवाल

FSUI ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'नाविकों के लिए एक और दुखद घटना। वे दुनिया भर का व्यापार चलाते हैं, लेकिन उन झगड़ों में चिकित्सा देखभाल और वापसी में अनदेखी का सामना करते हैं जिनसे उनका कोई लेना-देना नहीं होता।' यूनियन ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर नाविकों की परवाह कौन करता है।

यह ऐसे समय में आया है जब समुद्री सुरक्षा और नाविकों के अधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बहस तेज़ हो रही है। गौरतलब है कि यह कोई पहली घटना नहीं है — युद्ध-क्षेत्रों के निकट तैनात नाविकों को चिकित्सा आपात स्थिति में बार-बार अकेला छोड़ा गया है।

भारतीय दूतावास की प्रतिक्रिया और परिवार के प्रति संवेदना

दूतावास ने कहा कि वह पीड़ित परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता है और पार्थिव शरीर को जल्द भारत वापस लाने के लिए आवश्यक इंतज़ाम किए जा रहे हैं। दूतावास सभी संबंधित पक्षों — शिप मैनेजमेंट कंपनी और स्थानीय अधिकारियों — के साथ समन्वय कर रहा है।

आगे क्या होगा

भारत सरकार और FSUI दोनों पर दबाव है कि वे इस मामले में तेज़ी लाएँ और नाविकों की सुरक्षा के लिए ठोस नीतिगत कदम उठाएँ। यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि संघर्षग्रस्त समुद्री क्षेत्रों में तैनात भारतीय नाविकों के लिए आपातकालीन चिकित्सा प्रोटोकॉल कितने मज़बूत हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

नीतिगत है। भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े समुद्री कार्यबलों में से एक है, फिर भी युद्ध-क्षेत्रों के निकट तैनात नाविकों के लिए कोई मज़बूत आपातकालीन निकासी प्रोटोकॉल सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है। दुकम बंदरगाह पर संचार बंद होने और पार्थिव शरीर के दो दिन तक जहाज पर पड़े रहने की खबर बताती है कि कूटनीतिक प्रतिक्रिया की गति और समुद्री श्रम अधिकारों की ज़मीनी हकीकत के बीच की खाई अभी भी बहुत गहरी है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निशांत उर्थनाथन कौन थे और उनकी मौत कैसे हुई?
निशांत उर्थनाथन 35 वर्षीय भारतीय नाविक थे जो जहाज एमटी सेलेस्टियल पर द्वितीय अधिकारी के रूप में तैनात थे। रिपोर्टों के अनुसार, 11 जून 2026 को ओमान तट पर तबीयत बिगड़ने के बावजूद उन्हें समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिली, जिसके चलते उनका निधन हो गया।
पार्थिव शरीर भारत कब वापस आएगा?
ओमान स्थित भारतीय दूतावास ने कहा है कि वह शिप मैनेजमेंट कंपनी और सभी संबंधित पक्षों के साथ मिलकर काम कर रहा है। पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत वापस लाने के लिए आवश्यक इंतज़ाम किए जा रहे हैं, हालाँकि कोई निश्चित तारीख अभी तक घोषित नहीं हुई है।
FSUI ने इस मामले में क्या आरोप लगाए हैं?
फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) ने आरोप लगाया कि मौत के दो दिन बाद भी पार्थिव शरीर जहाज पर है, दुकम बंदरगाह ने वाई-फाई और संचार सुविधाएँ बंद कर दी हैं और अधिकारी कोई जवाब नहीं दे रहे। यूनियन ने नाविकों की व्यापक अनदेखी पर सवाल उठाए।
ओमान तट पर भारतीय नाविकों को खतरा क्यों है?
कथित तौर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण ओमान तट के निकट समुद्री क्षेत्र में तनाव बना हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार इस क्षेत्र में कई जहाजों को निशाना बनाया गया है, जिससे चिकित्सा आपात स्थितियों में सहायता पहुँचाना मुश्किल हो गया है।
FSUI क्या है और नाविकों के अधिकारों में इसकी क्या भूमिका है?
फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) भारतीय नाविकों और मर्चेंट नेवी कर्मचारियों के अधिकारों के लिए लड़ने वाला देश का सबसे बड़ा और पुराना व्यापार संघ है। यह संगठन नाविकों की सुरक्षा, उचित वेतन और आपात स्थिति में सहायता सुनिश्चित करने के लिए सरकार और शिपिंग कंपनियों पर दबाव बनाता है।
राष्ट्र प्रेस
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