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भारत की कुल प्राथमिक ऊर्जा आपूर्ति 2024-25 में 39,055 पेटाजूल पहुँची, नवीकरणीय क्षमता दोगुनी से अधिक: राव इंद्रजीत सिंह

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भारत की कुल प्राथमिक ऊर्जा आपूर्ति 2024-25 में 39,055 पेटाजूल पहुँची, नवीकरणीय क्षमता दोगुनी से अधिक: राव इंद्रजीत सिंह

सारांश

भारत की ऊर्जा तस्वीर तेज़ी से बदल रही है — 2024-25 में कुल प्राथमिक ऊर्जा आपूर्ति 39,055 पेटाजूल पहुँची और नवीकरणीय क्षमता एक ही वर्ष में दोगुनी से अधिक हो गई। साथ ही GDP, IIP और CPI के बेस ईयर में बदलाव से सांख्यिकीय ढाँचा भी अंतरराष्ट्रीय मानकों के करीब पहुँच रहा है।

मुख्य बातें

भारत की कुल प्राथमिक ऊर्जा आपूर्ति (TPES) वर्ष 2024-25 में बढ़कर 39,055 पेटाजूल हो गई, जो 2023-24 में 37,936 पेटाजूल थी।
देश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता मार्च 2025 तक 47,04,043 मेगावाट पहुँची — एक वर्ष पूर्व यह 21,09,655 मेगावाट थी।
सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी करने का समय 8-9 महीनों से घटकर 45-90 दिन रह गया है।
GDP और IIP का बेस ईयर 2011-12 से बदलकर 2022-23 ; CPI का बेस ईयर 2012=100 से 2024=100 किया गया।
माइक्रोडाटा पोर्टल पर यूनिट-लेवल डेटा उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे शोधकर्ता और नीति निर्माता साक्ष्य-आधारित विश्लेषण कर सकते हैं।

भारत की कुल प्राथमिक ऊर्जा आपूर्ति (टोटल प्राइमरी एनर्जी सप्लाई — TPES) वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 39,055 पेटाजूल हो गई है, जो एक वर्ष पूर्व 2023-24 में 37,936 पेटाजूल थी। यह जानकारी केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की ओर से 22 जुलाई 2025 को लोकसभा में दी गई। साथ ही देश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में ऐतिहासिक उछाल

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राव इंद्रजीत सिंह ने सदन को बताया कि मार्च 2025 तक देश की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़कर 47,04,043 मेगावाट हो गई है। तुलनात्मक रूप से, 31 मार्च 2024 तक यह क्षमता 21,09,655 मेगावाट थी — अर्थात एक वर्ष में यह क्षमता दोगुने से भी अधिक हो गई। मंत्री ने स्पष्ट किया कि एक पेटाजूल ऊर्जा 10¹⁵ जूल (एक हजार लाख करोड़ जूल) अथवा लगभग 278 गीगावाट-घंटे के बराबर होती है।

डेटा संग्रह में डिजिटल क्रांति

मंत्री ने बताया कि MoSPI ने आधिकारिक आंकड़ों के समय पर संग्रह और प्रकाशन के लिए सुदृढ़ तंत्र विकसित किया है। नेशनल सैंपल सर्वे (NSS) के तहत प्राथमिक आंकड़े अब कंप्यूटर असिस्टेड पर्सनल इंटरव्यू (CAPI) और ई-सिग्मा जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से एकत्र किए जाते हैं। इन प्लेटफॉर्म में इन-बिल्ट वैलिडेशन, रियल-टाइम डेटा मॉनिटरिंग, AI-आधारित चैटबॉट और बहुभाषी इंटरफेस जैसी आधुनिक सुविधाएँ शामिल हैं।

आंकड़ों के अनुसार, इन डिजिटल उपकरणों के उपयोग से डेटा संग्रह की सटीकता बढ़ी है और सर्वेक्षण आंकड़ों का रियल-टाइम सत्यापन संभव हुआ है। इसके अतिरिक्त, वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण और फील्ड स्टाफ को निरंतर प्रशिक्षण दिया जाता है।

सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी करने में समय में भारी कमी

राव इंद्रजीत सिंह ने बताया कि इन सुधारों के परिणामस्वरूप सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी करने में लगने वाला समय पहले के 8-9 महीनों से घटकर 45 से 90 दिन रह गया है। वार्षिक सर्वेक्षण रिपोर्ट अब 90 से 120 दिनों में, तिमाही रिपोर्ट 45 से 60 दिनों में और मासिक रिपोर्ट 15 से 30 दिनों के भीतर जारी की जा रही हैं।

माइक्रोडाटा पोर्टल और पारदर्शिता

पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय के नए माइक्रोडाटा पोर्टल पर सर्वेक्षणों का गोपनीय यूनिट-लेवल डेटा भी उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे शोधकर्ता, नीति निर्माता और अन्य हितधारक आधिकारिक आंकड़ों का विश्लेषण कर साक्ष्य-आधारित नीतियाँ तैयार कर सकते हैं।

GDP, IIP और CPI के बेस ईयर में संशोधन

मंत्री ने यह भी बताया कि अर्थव्यवस्था में हुए बदलावों को सटीक रूप से दर्शाने और अंतरराष्ट्रीय सांख्यिकीय मानकों के अनुरूप बनाने के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP), औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के बेस ईयर में संशोधन किया गया है। GDP और IIP का बेस ईयर 2011-12 से बदलकर 2022-23 किया गया है, जबकि CPI का बेस ईयर 2012=100 से बदलकर 2024=100 कर दिया गया है। यह संशोधन भारत की सांख्यिकीय प्रणाली को वैश्विक मानकों के करीब लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'स्थापित क्षमता' और 'वास्तविक उत्पादन' के बीच का अंतर अक्सर सुर्खियों में नहीं आता — ग्रिड एकीकरण, भंडारण अवसंरचना और वितरण दक्षता की चुनौतियाँ इस संख्या की असली परीक्षा हैं। GDP और IIP के बेस ईयर में बदलाव सांख्यिकीय पारदर्शिता की दिशा में सकारात्मक कदम है, परंतु आलोचकों का कहना है कि बेस ईयर संशोधन के साथ ऐतिहासिक तुलना की विश्वसनीयता पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी करने के समय में कमी निःसंदेह शासन सुधार है, किंतु डेटा की गुणवत्ता और गति दोनों को एक साथ बनाए रखना दीर्घकालिक चुनौती बनी रहेगी।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत की कुल प्राथमिक ऊर्जा आपूर्ति (TPES) 2024-25 में कितनी रही?
वर्ष 2024-25 में भारत की कुल प्राथमिक ऊर्जा आपूर्ति बढ़कर 39,055 पेटाजूल हो गई, जो 2023-24 में 37,936 पेटाजूल थी। यह जानकारी MoSPI की ओर से लोकसभा में 22 जुलाई 2025 को दी गई।
भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता मार्च 2025 तक कितनी हो गई?
मार्च 2025 तक भारत की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 47,04,043 मेगावाट हो गई। एक वर्ष पूर्व 31 मार्च 2024 तक यह 21,09,655 मेगावाट थी, यानी एक वर्ष में यह क्षमता दोगुनी से अधिक हो गई।
GDP और IIP का बेस ईयर क्यों बदला गया?
अर्थव्यवस्था में हुए संरचनात्मक बदलावों को सटीक रूप से दर्शाने और अंतरराष्ट्रीय सांख्यिकीय मानकों के अनुरूप बनाने के लिए GDP और IIP का बेस ईयर 2011-12 से बदलकर 2022-23 किया गया है। CPI का बेस ईयर 2012=100 से बदलकर 2024=100 कर दिया गया है।
MoSPI के माइक्रोडाटा पोर्टल से क्या फायदा होगा?
MoSPI के नए माइक्रोडाटा पोर्टल पर सर्वेक्षणों का यूनिट-लेवल डेटा उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे शोधकर्ता, नीति निर्माता और हितधारक आधिकारिक आंकड़ों का गहन विश्लेषण कर साक्ष्य-आधारित नीतियाँ बना सकते हैं।
सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी करने में पहले कितना समय लगता था और अब कितना लगता है?
पहले सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी करने में 8-9 महीने लगते थे, जो अब घटकर 45 से 90 दिन रह गए हैं। वार्षिक रिपोर्ट 90-120 दिनों में, तिमाही रिपोर्ट 45-60 दिनों में और मासिक रिपोर्ट 15-30 दिनों में जारी की जा रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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