2 नवंबर 2026
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इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस: झारखंड के गैंगस्टर राहुल सिंह और राहुल दुबे की अंतरराष्ट्रीय तलाश शुरू

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इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस: झारखंड के गैंगस्टर राहुल सिंह और राहुल दुबे की अंतरराष्ट्रीय तलाश शुरू

सारांश

विदेश में बैठकर झारखंड में दहशत फैलाने वाले दो कुख्यात गैंगस्टरों पर अब अंतरराष्ट्रीय शिकंजा कसा गया है। इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के साथ पुलिस की लड़ाई अब राज्य की सीमाओं से निकलकर वैश्विक मंच पर पहुँच गई है।

मुख्य बातें

इंटरपोल ने 2 नवंबर 2026 को गैंगस्टर राहुल सिंह और राहुल दुबे के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया।
दोनों गिरोहों ने पिछले दो वर्षों में झारखंड में 100 से अधिक आपराधिक वारदातें अंजाम दी हैं।
29 अक्टूबर 2026 को हजारीबाग के एके इंटरनेशनल होटल पर फायरिंग के बाद राहुल दुबे के नाम से धमकी भरी पोस्ट सामने आई थी।
30 अक्टूबर 2026 को रांची पुलिस ने पाँच कथित शूटरों और हथियार सप्लायर जियाउल हबीब को गिरफ्तार किया।
राहुल सिंह ने कथित तौर पर मार्च 2025 में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए अमन साहू के गिरोह की कमान संभाली थी।
रेड कॉर्नर नोटिस अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट नहीं है — गिरफ्तारी पर प्रत्यर्पण प्रक्रिया के जरिए वापसी संभव होगी।

झारखंड पुलिस मुख्यालय की अनुशंसा पर इंटरपोल ने 2 नवंबर 2026 को गैंगस्टर राहुल सिंह और राहुल दुबे के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है। दोनों कथित तौर पर विदेश में सुरक्षित ठिकानों से झारखंड में सक्रिय अपने आपराधिक नेटवर्क को डिजिटल माध्यमों से संचालित करते रहे हैं। पुलिस मुख्यालय के आधिकारिक सूत्रों ने इस नोटिस की पुष्टि की है।

गिरोहों का दायरा और वारदातें

आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में इन दोनों गिरोहों के गुर्गों ने कोयलांचल धनबाद, हजारीबाग, रामगढ़, चतरा, लातेहार और राजधानी रांची में 100 से अधिक आपराधिक वारदातें अंजाम दी हैं। झारखंड के कारोबारी, कोयला व्यापारी, ठेकेदार और निर्माण कंपनियाँ इनके प्रमुख निशाने रही हैं।

पुलिस के अनुसार, पहले फोन या अन्य माध्यमों से रंगदारी माँगी जाती है और रकम न मिलने पर कारोबारी प्रतिष्ठानों तथा निर्माण स्थलों पर फायरिंग कर दहशत फैलाने की कोशिश की जाती है। 60 से अधिक अपराधियों की गिरफ्तारी के बावजूद धमकी, रंगदारी और फायरिंग की घटनाएँ जारी रहीं।

राहुल सिंह: अमन साहू गिरोह से उभरा सरगना

राहुल सिंह का नाम पहले कुख्यात गैंगस्टर अमन साहू के गिरोह के प्रमुख सदस्यों में शामिल रहा है। मार्च 2025 में पुलिस मुठभेड़ में अमन साहू के मारे जाने के बाद, राहुल सिंह ने कथित तौर पर गिरोह की कमान संभाल ली।

पुलिस के अनुसार, उसका नेटवर्क रांची, रामगढ़, पलामू, बोकारो, चतरा, हजारीबाग और लातेहार सहित राज्य के कई जिलों में सक्रिय है। जाँच एजेंसियाँ इस नेटवर्क के स्थानीय सदस्यों और उनके आर्थिक मददगारों की पहचान कर कार्रवाई कर रही हैं।

राहुल दुबे गिरोह और हालिया फायरिंग

29 अक्टूबर 2026 की रात हजारीबाग के मटवारी स्थित एके इंटरनेशनल होटल पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई। घटना के बाद सोशल मीडिया पर राहुल दुबे के नाम से एक पोस्ट सामने आई, जिसमें कथित तौर पर वारदात की जिम्मेदारी लेने के साथ-साथ होटल संचालक को धमकी दी गई थी।

इस घटना के अगले दिन 30 अक्टूबर 2026 को रांची पुलिस ने एक मुठभेड़ के बाद राहुल दुबे गिरोह के पाँच कथित शूटरों और मुख्य हथियार सप्लायर जियाउल हबीब को गिरफ्तार किया।

पुलिस की रणनीति और रेड कॉर्नर नोटिस का महत्व

झारखंड पुलिस की रणनीति पहले गिरोह के स्थानीय नेटवर्क को तोड़ने और फिर विदेश में बैठे कथित सरगनाओं तक पहुँचने की है। शूटरों, हथियार सप्लायरों और मददगारों की गिरफ्तारी के ज़रिए आपराधिक गतिविधियों से जुड़े साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

यह ध्यान देने योग्य है कि रेड कॉर्नर नोटिस अपने आप में अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट नहीं होता — संबंधित देश के कानून के तहत वहाँ की एजेंसियाँ आगे की कार्रवाई करती हैं। गिरफ्तारी की स्थिति में भारत सरकार प्रत्यर्पण या अन्य कानूनी प्रक्रिया के जरिए दोनों को देश वापस लाने का प्रयास कर सकती है।

आगे की राह

रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बाद अब इंटरपोल सदस्य देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को दोनों गैंगस्टरों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए सूचना उपलब्ध कराई जा सकेगी। यह कदम इसलिए भी अहम है क्योंकि झारखंड में सक्रिय संगठित अपराध गिरोहों के सरगना अक्सर स्थानीय नेटवर्क के जरिए वारदात कराते हैं और खुद देश से बाहर रहकर पुलिस की सीधी पहुँच से बचते रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी सीमाएँ स्पष्ट हैं — दाऊद इब्राहिम से लेकर कई भगोड़े आर्थिक अपराधियों तक, नोटिस जारी होने और वास्तविक प्रत्यर्पण के बीच की खाई अक्सर चौड़ी रही है। झारखंड पुलिस की स्थानीय नेटवर्क तोड़ने की रणनीति सही दिशा में है, परंतु असली परीक्षा यह होगी कि जिस देश में ये सरगना छिपे हैं, वहाँ भारत की प्रत्यर्पण संधि है या नहीं। कोयलांचल में संगठित अपराध और औद्योगिक रंगदारी की जड़ें केवल गिरफ्तारियों से नहीं उखड़तीं — राज्य में आर्थिक शासन और जवाबदेही की कमज़ोरियाँ इन गिरोहों को पनपने की ज़मीन देती हैं।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस क्या होता है और इससे क्या होगा?
रेड कॉर्नर नोटिस इंटरपोल द्वारा किसी वांछित व्यक्ति की पहचान और गिरफ्तारी के लिए सदस्य देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सूचित करने का तंत्र है। यह अपने आप में अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट नहीं होता — संबंधित देश के कानून के तहत वहाँ की एजेंसियाँ आगे की कार्रवाई करती हैं।
राहुल सिंह और राहुल दुबे पर क्या आरोप हैं?
दोनों पर झारखंड में कारोबारियों, कोयला व्यापारियों, ठेकेदारों और निर्माण कंपनियों से रंगदारी वसूलने, फायरिंग कर दहशत फैलाने और डिजिटल माध्यमों से स्थानीय शूटरों तथा हथियार सप्लायरों को निर्देश देने के आरोप हैं। पुलिस के अनुसार पिछले दो वर्षों में इनके गुर्गों ने 100 से अधिक आपराधिक वारदातें की हैं।
राहुल सिंह का अमन साहू गिरोह से क्या संबंध है?
राहुल सिंह पहले कुख्यात गैंगस्टर अमन साहू के गिरोह का प्रमुख सदस्य था। मार्च 2025 में पुलिस मुठभेड़ में अमन साहू के मारे जाने के बाद राहुल सिंह ने कथित तौर पर गिरोह की कमान संभाल ली।
हजारीबाग होटल फायरिंग मामला क्या है?
29 अक्टूबर 2026 की रात हजारीबाग के मटवारी स्थित एके इंटरनेशनल होटल पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई। इसके बाद सोशल मीडिया पर राहुल दुबे के नाम से एक पोस्ट सामने आई, जिसमें कथित तौर पर वारदात की जिम्मेदारी लेने के साथ होटल संचालक को धमकी दी गई थी।
झारखंड पुलिस ने अब तक इन गिरोहों के खिलाफ क्या कार्रवाई की है?
पुलिस ने अब तक दोनों गिरोहों के 60 से अधिक अपराधियों को गिरफ्तार किया है। 30 अक्टूबर 2026 को रांची पुलिस ने एक मुठभेड़ के बाद राहुल दुबे गिरोह के पाँच कथित शूटरों और मुख्य हथियार सप्लायर जियाउल हबीब को पकड़ा। अब इंटरपोल नोटिस के जरिए विदेश में बैठे सरगनाओं तक पहुँचने की कोशिश की जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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