इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस: झारखंड के गैंगस्टर राहुल सिंह और राहुल दुबे की अंतरराष्ट्रीय तलाश शुरू
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड पुलिस मुख्यालय की अनुशंसा पर इंटरपोल ने 2 नवंबर 2026 को गैंगस्टर राहुल सिंह और राहुल दुबे के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है। दोनों कथित तौर पर विदेश में सुरक्षित ठिकानों से झारखंड में सक्रिय अपने आपराधिक नेटवर्क को डिजिटल माध्यमों से संचालित करते रहे हैं। पुलिस मुख्यालय के आधिकारिक सूत्रों ने इस नोटिस की पुष्टि की है।
गिरोहों का दायरा और वारदातें
आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में इन दोनों गिरोहों के गुर्गों ने कोयलांचल धनबाद, हजारीबाग, रामगढ़, चतरा, लातेहार और राजधानी रांची में 100 से अधिक आपराधिक वारदातें अंजाम दी हैं। झारखंड के कारोबारी, कोयला व्यापारी, ठेकेदार और निर्माण कंपनियाँ इनके प्रमुख निशाने रही हैं।
पुलिस के अनुसार, पहले फोन या अन्य माध्यमों से रंगदारी माँगी जाती है और रकम न मिलने पर कारोबारी प्रतिष्ठानों तथा निर्माण स्थलों पर फायरिंग कर दहशत फैलाने की कोशिश की जाती है। 60 से अधिक अपराधियों की गिरफ्तारी के बावजूद धमकी, रंगदारी और फायरिंग की घटनाएँ जारी रहीं।
राहुल सिंह: अमन साहू गिरोह से उभरा सरगना
राहुल सिंह का नाम पहले कुख्यात गैंगस्टर अमन साहू के गिरोह के प्रमुख सदस्यों में शामिल रहा है। मार्च 2025 में पुलिस मुठभेड़ में अमन साहू के मारे जाने के बाद, राहुल सिंह ने कथित तौर पर गिरोह की कमान संभाल ली।
पुलिस के अनुसार, उसका नेटवर्क रांची, रामगढ़, पलामू, बोकारो, चतरा, हजारीबाग और लातेहार सहित राज्य के कई जिलों में सक्रिय है। जाँच एजेंसियाँ इस नेटवर्क के स्थानीय सदस्यों और उनके आर्थिक मददगारों की पहचान कर कार्रवाई कर रही हैं।
राहुल दुबे गिरोह और हालिया फायरिंग
29 अक्टूबर 2026 की रात हजारीबाग के मटवारी स्थित एके इंटरनेशनल होटल पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई। घटना के बाद सोशल मीडिया पर राहुल दुबे के नाम से एक पोस्ट सामने आई, जिसमें कथित तौर पर वारदात की जिम्मेदारी लेने के साथ-साथ होटल संचालक को धमकी दी गई थी।
इस घटना के अगले दिन 30 अक्टूबर 2026 को रांची पुलिस ने एक मुठभेड़ के बाद राहुल दुबे गिरोह के पाँच कथित शूटरों और मुख्य हथियार सप्लायर जियाउल हबीब को गिरफ्तार किया।
पुलिस की रणनीति और रेड कॉर्नर नोटिस का महत्व
झारखंड पुलिस की रणनीति पहले गिरोह के स्थानीय नेटवर्क को तोड़ने और फिर विदेश में बैठे कथित सरगनाओं तक पहुँचने की है। शूटरों, हथियार सप्लायरों और मददगारों की गिरफ्तारी के ज़रिए आपराधिक गतिविधियों से जुड़े साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
यह ध्यान देने योग्य है कि रेड कॉर्नर नोटिस अपने आप में अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट नहीं होता — संबंधित देश के कानून के तहत वहाँ की एजेंसियाँ आगे की कार्रवाई करती हैं। गिरफ्तारी की स्थिति में भारत सरकार प्रत्यर्पण या अन्य कानूनी प्रक्रिया के जरिए दोनों को देश वापस लाने का प्रयास कर सकती है।
आगे की राह
रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बाद अब इंटरपोल सदस्य देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को दोनों गैंगस्टरों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए सूचना उपलब्ध कराई जा सकेगी। यह कदम इसलिए भी अहम है क्योंकि झारखंड में सक्रिय संगठित अपराध गिरोहों के सरगना अक्सर स्थानीय नेटवर्क के जरिए वारदात कराते हैं और खुद देश से बाहर रहकर पुलिस की सीधी पहुँच से बचते रहे हैं।