आईओएस सागर-26 मिशन पूर्ण: आईएनएस सुनयना 16 देशों के नौसैनिकों संग स्वदेश लौटा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय नौसेना का आईओएस सागर-26 मिशन 20 मई 2026 को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जब आईएनएस सुनयना 16 मित्र देशों के नौसैनिक प्रतिनिधियों के साथ स्वदेश लौटा। नई दिल्ली में आयोजित भव्य फ्लैग-इन समारोह में जहाज का स्वागत किया गया, जो हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती समुद्री कूटनीतिक भूमिका का प्रतीक बना।
मिशन का स्वरूप और उद्देश्य
'वन ओशन, वन मिशन' की अवधारणा पर आधारित इस मिशन में भारत सहित 17 देशों के नौसैनिक आईएनएस सुनयना पर एक साथ तैनात रहे। मिशन की शुरुआत हार्बर प्रशिक्षण से हुई और फिर समुद्री तैनाती, संयुक्त अभ्यास तथा विभिन्न देशों के बंदरगाह दौरों तक यह पहल निरंतर सक्रिय रही। भारतीय नौसेना के अधिकारियों के अनुसार, यह केवल एक तैनाती नहीं, बल्कि एक चलता-फिरता बहुराष्ट्रीय समुद्री सहयोग मंच बन गया था।
भाग लेने वाले देश
इस अनूठी पहल में बांग्लादेश, इंडोनेशिया, केन्या, मलेशिया, मालदीव, मॉरीशस, मोजाम्बिक, म्यांमार, सेशेल्स, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, तंजानिया, थाईलैंड, तिमोर-लेस्ते और संयुक्त अरब अमीरात के नौसैनिक प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों और सैन्य परंपराओं के बावजूद सभी का साझा लक्ष्य एक सुरक्षित, स्थिर और सहयोगपूर्ण हिंद महासागर था।
संयुक्त अभ्यास और प्रशिक्षण
समुद्र में संयुक्त सैन्य गतिविधियों के दौरान संचार समन्वय, समुद्री निगरानी, खोज एवं बचाव अभियान, आपदा राहत संचालन और समुद्री सुरक्षा प्रक्रियाओं का व्यापक अभ्यास किया गया। भारतीय नौसेना के अनुसार इन गतिविधियों का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं था — भविष्य की किसी भी क्षेत्रीय चुनौती के समय संयुक्त रूप से त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की तैयारी भी इसका अभिन्न हिस्सा थी। यह ऐसे समय में आया है जब हिंद महासागर वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और सामरिक संतुलन का प्रमुख केंद्र बन चुका है।
भारत के 'महासागर' विजन को नई मजबूती
भारतीय नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने फ्लैग-इन समारोह में कहा कि क्षेत्रीय देशों के बीच विश्वास और समन्वय पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। आईएनएस सुनयना की वापसी के साथ यह मिशन भारत के 'महासागर' विजन — यानी हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के साथ सुरक्षा, विकास और समृद्धि की साझेदारी — को व्यावहारिक रूप देता दिखा। गौरतलब है कि इस मिशन ने न केवल सैन्य इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाई, बल्कि क्षमता निर्माण और मानवीय सहयोग के क्षेत्र में भी नए मानदंड स्थापित किए।
आगे की दिशा
विशेषज्ञों का मानना है कि आईओएस सागर-26 जैसे मिशन भारत की हिंद महासागर नीति को ठोस कूटनीतिक आधार देते हैं। मिशन से जुड़े अधिकारियों और नाविकों को फ्लैग-इन समारोह में सम्मानित किया गया। भारतीय नौसेना के अनुसार, इस श्रृंखला के अगले चरण की योजना पहले से अधिक व्यापक भागीदारी के साथ तैयार की जाएगी।