ईरान-इजरायल संघर्ष पर संसद में चर्चा की अनदेखी, वारिस पठान ने मोदी सरकार को घेरा

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ईरान-इजरायल संघर्ष पर संसद में चर्चा की अनदेखी, वारिस पठान ने मोदी सरकार को घेरा

सारांश

मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध को लेकर वारिस पठान ने मोदी सरकार पर सवाल उठाते हुए संसद में चर्चा की आवश्यकता पर जोर दिया है। क्या सरकार इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर गंभीरता से विचार करेगी?

Key Takeaways

  • युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है।
  • सरकार को इस मुद्दे पर चर्चा करनी चाहिए।
  • ईरान के साथ भारत के अच्छे संबंध हैं।
  • असामान्य स्थिति में पैनिक का माहौल है।
  • सरकार को स्टेटमेंट देना चाहिए।

मुंबई, २६ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मध्य-पूर्व में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रही युद्ध की स्थिति को लेकर राजनीतिक चर्चाएँ बढ़ गई हैं। इसी बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करने जा रहे हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

वारिस पठान ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा, "संसद का सत्र चल रहा है। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध को देखते हुए सरकार को संसद में चर्चा करनी चाहिए। यदि सरकार चर्चा आयोजित करती, तो सभी विपक्षी पार्टियों को इस पर बोलने का अवसर मिलता। इससे यह स्पष्ट होता कि भारत की नीति क्या है। हम मौजूदा परिस्थितियों के मद्देनजर क्या कदम उठा रहे हैं, लेकिन सरकार ने इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाई। इसमें सभी को २-३ मिनट बोलने का मौका मिलता है और वे सब बोलकर चले जाते हैं। अब सरकार सभी मुख्यमंत्रियों से चर्चा करने वाली है। देखते हैं कि इसमें क्या बातें होती हैं?"

उन्होंने आगे कहा, "मेरा मानना है कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। इसे रोकना चाहिए। भारत को विश्वगुरु और प्रधानमंत्री को ५६ इंच का सीना बताने वालों को पहले ही कदम उठाना चाहिए था, ताकि युद्ध इस स्थिति में नहीं पहुँचता। अगर आप युद्ध की निंदा नहीं करते तो हम क्या सोचें? ईरान के साथ भारत के बहुत अच्छे संबंध रहे हैं। युद्ध के हालात में स्थिति पैनिक बन गई है। लोग घरों में राशन भर रहे हैं, पेट्रोल की अधिक मात्रा ले रहे हैं, क्योंकि उनका मानना है कि अगर युद्ध जारी रहा, तो इन सभी चीजों की कमी हो जाएगी। कुछ लोग मिनी लॉकडाउन की चर्चा कर रहे हैं। इसलिए सरकार को इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए सामने आकर स्टेटमेंट देना चाहिए।"

वारिस पठान ने सर्वदलीय बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर द्वारा पाकिस्तान को दलाल देश कहे जाने पर कहा, "इस प्रकार की भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए। पाकिस्तान आतंकवादियों को पैदा करता है और उन्हें बढ़ावा देता है। इजरायल और पाकिस्तान ने बेड़ा गर्क कर रखा है। हमारे पार्टी के अध्यक्ष ने पूरी दुनिया में पाकिस्तान को एक्सपोज कर दिया है। पाकिस्तान की कोई हैसियत नहीं है। भारत एक शक्तिशाली देश है, उसे इस मुद्दे पर कदम उठाना चाहिए।"

Point of View

ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष पर भारतीय राजनीति में एक नई बहस शुरू हो गई है। वारिस पठान की चिंताएँ इस मुद्दे की गहराई को स्पष्ट करती हैं। यह महत्वपूर्ण है कि सरकार इस पर समुचित चर्चा करे और स्थिति को समझे।
NationPress
26/03/2026

Frequently Asked Questions

ईरान-इजरायल संघर्ष का भारत पर क्या प्रभाव है?
यह संघर्ष भारत के विदेश नीति और सुरक्षा परिदृश्य को प्रभावित कर सकता है, खासकर ईरान के साथ संबंधों को लेकर।
वारिस पठान ने मोदी सरकार से क्या सवाल उठाए?
उन्होंने संसद में इस मुद्दे पर चर्चा की आवश्यकता और सर्वदलीय बैठक की सीमाओं पर सवाल उठाए।
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