ISIS से जुड़ी बायो-टेरर साजिश: NIA ने तीन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की, 'रिसिन' से जनता को निशाना बनाने की थी योजना
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 5 अप्रैल 2026 को ISIS से जुड़े तीन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, जिन पर सार्वजनिक स्थानों पर जहरीले जैविक रसायन 'रिसिन' के ज़रिए बड़े पैमाने पर जनहानि करने की साजिश रचने का आरोप है। NIA के अनुसार, यह एक सुनियोजित जिहादी बायो-टेरर षड्यंत्र था, जिसे विदेशी ISIS हैंडलर्स के निर्देश पर अंजाम देने की तैयारी थी।
मुख्य आरोपी और आरोप
इस मामले में मुख्य आरोपी हैदराबाद निवासी डॉ. सैयद अहमद मोहिउद्दीन हैं। उनके साथ उत्तर प्रदेश के रहने वाले दो अन्य आरोपी — आजाद और मोहम्मद सुहेल — भी चार्जशीट में शामिल हैं। तीनों के खिलाफ अहमदाबाद की विशेष NIA अदालत में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम [UA(P)A], भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल की गई है।
साजिश की पूरी कहानी
जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपी विदेशी ISIS हैंडलर्स के इशारे पर काम कर रहे थे और उन्होंने युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर जिहाद के नाम पर आतंक फैलाने की योजना बनाई। साजिश के तहत 'रिसिन' नामक अत्यंत जहरीले पदार्थ का इस्तेमाल करने की तैयारी थी, जो अरंडी के बीज से तैयार होता है और केमिकल वेपन्स कन्वेंशन की प्रतिबंधित सूची में दर्ज है।
NIA की जांच में सामने आया कि डॉ. मोहिउद्दीन ने हैंडलर के कहने पर अपने हैदराबाद स्थित घर को गुप्त प्रयोगशाला में तब्दील कर 'रिसिन' तैयार करने की कोशिश की। वहीं, आजाद और सुहेल ने राजस्थान के हनुमानगढ़ में एक डेड-ड्रॉप साइट से पैसे और हथियार उठाकर गुजरात के छत्राल तक पहुँचाए, जहाँ से मोहिउद्दीन ने उन्हें प्राप्त किया।
गिरफ्तारी और जांच का क्रम
यह मामला सबसे पहले गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने नवंबर 2025 में दर्ज किया था, जब डॉ. मोहिउद्दीन को एक टोल प्लाजा पर अवैध हथियार, 4 लीटर अरंडी तेल और अन्य संदिग्ध सामग्री के साथ गिरफ्तार किया गया। उसी दिन आजाद और सुहेल को भी हिरासत में लिया गया। इसके बाद जनवरी 2026 में NIA ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ले ली।
सुहेल की भूमिका और नेटवर्क
मोहम्मद सुहेल को इस साजिश की अहम कड़ी बताया गया है। जांच के अनुसार, सुहेल हैंडलर और अन्य आरोपियों के बीच हथियारों के प्रबंधन का काम कर रहा था — उसने हथियारों की ढुलाई की, रेकी की और ISIS के झंडे भी तैयार किए। इसके अलावा, दोनों आरोपी आतंक से जुड़े फंड का इस्तेमाल करते हुए विदेशी हैंडलर्स के संपर्क में बने हुए थे।
जांच की आगे की दिशा
NIA ने स्पष्ट किया है कि इस मामले की जांच अभी जारी है और एजेंसी इस षड्यंत्र में शामिल अन्य संदिग्धों तथा विदेशी हैंडलर्स की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास में लगी है। यह मामला इस बात की ओर इशारा करता है कि ISIS से जुड़े नेटवर्क भारत में जैविक हथियारों के इस्तेमाल की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहे थे — जो देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक नई और गंभीर चुनौती है।