ISIS से जुड़ी बायो-टेरर साजिश: NIA ने तीन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की, 'रिसिन' से जनता को निशाना बनाने की थी योजना

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ISIS से जुड़ी बायो-टेरर साजिश: NIA ने तीन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की, 'रिसिन' से जनता को निशाना बनाने की थी योजना

सारांश

ISIS से जुड़े तीन आरोपियों ने विदेशी हैंडलर्स के निर्देश पर भारत में 'रिसिन' जैसे जैविक जहर से सार्वजनिक स्थानों पर बड़े पैमाने पर जनहानि की साजिश रची। NIA की चार्जशीट दर्शाती है कि यह नेटवर्क हैदराबाद से गुजरात तक फैला था और देश की सुरक्षा के लिए एक नई किस्म का खतरा पेश करता है।

मुख्य बातें

NIA ने 5 अप्रैल 2026 को ISIS से जुड़े तीन आरोपियों के खिलाफ अहमदाबाद की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की।
सैयद अहमद मोहिउद्दीन (हैदराबाद) ने अपने घर को गुप्त लैब में बदलकर जहरीला 'रिसिन' तैयार करने की कोशिश की।
आजाद और मोहम्मद सुहेल (उत्तर प्रदेश) ने राजस्थान के हनुमानगढ़ से हथियार और पैसे उठाकर गुजरात के छत्राल तक पहुँचाए।
मामला पहले गुजरात ATS ने नवंबर 2025 में दर्ज किया था; जनवरी 2026 में NIA ने जांच अपने हाथ में ली।
तीनों पर UA(P)A , BNS और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज।
NIA ने कहा कि जांच जारी है और विदेशी हैंडलर्स की तलाश अभी भी चल रही है।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 5 अप्रैल 2026 को ISIS से जुड़े तीन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, जिन पर सार्वजनिक स्थानों पर जहरीले जैविक रसायन 'रिसिन' के ज़रिए बड़े पैमाने पर जनहानि करने की साजिश रचने का आरोप है। NIA के अनुसार, यह एक सुनियोजित जिहादी बायो-टेरर षड्यंत्र था, जिसे विदेशी ISIS हैंडलर्स के निर्देश पर अंजाम देने की तैयारी थी।

मुख्य आरोपी और आरोप

इस मामले में मुख्य आरोपी हैदराबाद निवासी डॉ. सैयद अहमद मोहिउद्दीन हैं। उनके साथ उत्तर प्रदेश के रहने वाले दो अन्य आरोपी — आजाद और मोहम्मद सुहेल — भी चार्जशीट में शामिल हैं। तीनों के खिलाफ अहमदाबाद की विशेष NIA अदालत में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम [UA(P)A], भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल की गई है।

साजिश की पूरी कहानी

जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपी विदेशी ISIS हैंडलर्स के इशारे पर काम कर रहे थे और उन्होंने युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर जिहाद के नाम पर आतंक फैलाने की योजना बनाई। साजिश के तहत 'रिसिन' नामक अत्यंत जहरीले पदार्थ का इस्तेमाल करने की तैयारी थी, जो अरंडी के बीज से तैयार होता है और केमिकल वेपन्स कन्वेंशन की प्रतिबंधित सूची में दर्ज है।

NIA की जांच में सामने आया कि डॉ. मोहिउद्दीन ने हैंडलर के कहने पर अपने हैदराबाद स्थित घर को गुप्त प्रयोगशाला में तब्दील कर 'रिसिन' तैयार करने की कोशिश की। वहीं, आजाद और सुहेल ने राजस्थान के हनुमानगढ़ में एक डेड-ड्रॉप साइट से पैसे और हथियार उठाकर गुजरात के छत्राल तक पहुँचाए, जहाँ से मोहिउद्दीन ने उन्हें प्राप्त किया।

गिरफ्तारी और जांच का क्रम

यह मामला सबसे पहले गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने नवंबर 2025 में दर्ज किया था, जब डॉ. मोहिउद्दीन को एक टोल प्लाजा पर अवैध हथियार, 4 लीटर अरंडी तेल और अन्य संदिग्ध सामग्री के साथ गिरफ्तार किया गया। उसी दिन आजाद और सुहेल को भी हिरासत में लिया गया। इसके बाद जनवरी 2026 में NIA ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ले ली।

सुहेल की भूमिका और नेटवर्क

मोहम्मद सुहेल को इस साजिश की अहम कड़ी बताया गया है। जांच के अनुसार, सुहेल हैंडलर और अन्य आरोपियों के बीच हथियारों के प्रबंधन का काम कर रहा था — उसने हथियारों की ढुलाई की, रेकी की और ISIS के झंडे भी तैयार किए। इसके अलावा, दोनों आरोपी आतंक से जुड़े फंड का इस्तेमाल करते हुए विदेशी हैंडलर्स के संपर्क में बने हुए थे।

जांच की आगे की दिशा

NIA ने स्पष्ट किया है कि इस मामले की जांच अभी जारी है और एजेंसी इस षड्यंत्र में शामिल अन्य संदिग्धों तथा विदेशी हैंडलर्स की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास में लगी है। यह मामला इस बात की ओर इशारा करता है कि ISIS से जुड़े नेटवर्क भारत में जैविक हथियारों के इस्तेमाल की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहे थे — जो देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक नई और गंभीर चुनौती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दर्शाता है कि सुरक्षा एजेंसियों को अब केवल हथियारों और विस्फोटकों की निगरानी से आगे बढ़कर जैव-रासायनिक खतरों पर भी ध्यान केंद्रित करना होगा। गौरतलब है कि हनुमानगढ़ से गुजरात तक फैला यह नेटवर्क बताता है कि ISIS के विदेशी हैंडलर्स अभी भी भारत में सक्रिय कोशिकाओं को संचालित कर रहे हैं। असली सवाल यह है कि इस नेटवर्क की और कितनी शाखाएँ अभी उजागर होनी बाकी हैं।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NIA ने ISIS बायो-टेरर साजिश में किन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की?
NIA ने हैदराबाद निवासी डॉ. सैयद अहमद मोहिउद्दीन और उत्तर प्रदेश के आजाद व मोहम्मद सुहेल के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। तीनों पर अहमदाबाद की विशेष NIA अदालत में UA(P)A, BNS और आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
'रिसिन' क्या है और यह इतना खतरनाक क्यों है?
'रिसिन' एक अत्यंत जहरीला जैविक पदार्थ है जो अरंडी के बीज से बनाया जाता है। यह केमिकल वेपन्स कन्वेंशन की प्रतिबंधित सूची में शामिल है और इसकी बेहद कम मात्रा भी घातक हो सकती है।
यह मामला सबसे पहले कब और कैसे सामने आया?
यह मामला नवंबर 2025 में गुजरात ATS ने दर्ज किया था, जब डॉ. मोहिउद्दीन को एक टोल प्लाजा पर अवैध हथियार, 4 लीटर अरंडी तेल और संदिग्ध सामग्री के साथ गिरफ्तार किया गया था। उसी दिन आजाद और सुहेल को भी हिरासत में लिया गया।
NIA ने इस मामले की जांच कब शुरू की?
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने जनवरी 2026 में इस मामले की जांच अपने हाथ में ली। एजेंसी ने पाया कि आरोपी विदेशी ISIS हैंडलर्स के निर्देश पर काम कर रहे थे और नेटवर्क हैदराबाद से गुजरात तक फैला हुआ था।
इस साजिश में विदेशी हैंडलर्स की क्या भूमिका थी?
NIA के अनुसार, विदेशी ISIS हैंडलर्स ही इस पूरी साजिश के सूत्रधार थे। वे आरोपियों को निर्देश दे रहे थे, आतंक से जुड़ा फंड मुहैया करा रहे थे और रिसिन तैयार करने तथा हथियार जुटाने की पूरी योजना चला रहे थे। एजेंसी अभी भी इन हैंडलर्स की पहचान के प्रयास में लगी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 दिन पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले