चित्तौड़गढ़ किले का साथी देवरी जैन मंदिर: मारू-गुर्जर शैली की नक्काशी और 27 तीर्थंकर मंदिरों का ऐतिहासिक समूह

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चित्तौड़गढ़ किले का साथी देवरी जैन मंदिर: मारू-गुर्जर शैली की नक्काशी और 27 तीर्थंकर मंदिरों का ऐतिहासिक समूह

सारांश

चित्तौड़गढ़ किले में 11वीं शताब्दी में निर्मित साथी देवरी जैन मंदिर परिसर — 27 मंदिरों का यह समूह मारू-गुर्जर स्थापत्य, आदिनाथ की ध्यान मुद्रा प्रतिमा और यूनेस्को विश्व धरोहर दर्जे के कारण इतिहास, आस्था और कला का अनूठा संगम है।

मुख्य बातें

साथी देवरी मंदिर राजस्थान के चित्तौड़गढ़ किले में फतेह प्रकाश पैलेस के निकट स्थित है।
यह परिसर 27 जैन मंदिरों का समूह है, जिसका निर्माण 11वीं शताब्दी ईस्वी में हुआ था।
मंदिर मारू-गुर्जर स्थापत्य शैली में निर्मित है, जिसमें बारीक नक्काशीदार खंभे और कमल-अंकित छतें हैं।
गर्भगृह में प्रथम जैन तीर्थंकर आदिनाथ की ध्यान मुद्रा में भव्य प्रतिमा स्थापित है।
चित्तौड़गढ़ किले का हिस्सा होने के कारण यह परिसर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त है।

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ किले में फतेह प्रकाश पैलेस के निकट स्थित साथी देवरी मंदिर — जिसे सती देवरी मंदिर या सत्तविश देवरी भी कहा जाता है — जैन स्थापत्य कला और आध्यात्मिकता का एक दुर्लभ संगम है। 27 जैन मंदिरों के इस परिसर का निर्माण 11वीं शताब्दी ईस्वी में हुआ था और यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल चित्तौड़गढ़ किले का अभिन्न हिस्सा है। बारीक नक्काशीदार खंभों से लेकर मारू-गुर्जर शैली की भव्य छतों तक, यह मंदिर परिसर जैन तीर्थंकरों को समर्पित अपनी अद्वितीय भव्यता के लिए देशभर के श्रद्धालुओं और इतिहास-प्रेमियों को आकर्षित करता है।

मंदिर का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व

भारत सरकार के अतुल्य भारत पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, किंवदंतियों में इस स्थल का संबंध महाभारत काल के पांडवों द्वारा भगवान शिव को समर्पित सतीश देवरी मंदिर से जोड़ा जाता है। कालांतर में यह स्थल जैन तीर्थंकरों के प्रमुख उपासना केंद्र के रूप में विकसित हुआ। 11वीं शताब्दी में जैन समुदाय के उत्कर्ष काल में इस परिसर का निर्माण हुआ, जो आज भी अपनी वास्तुकला और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए विख्यात है। यद्यपि समय के प्रभाव से कई संरचनाएँ आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, परंतु मुख्य मंदिर अपनी मूल भव्यता को आज भी संजोए हुए है।

मारू-गुर्जर स्थापत्य का अद्भुत नमूना

साथी देवरी मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही बारीक नक्काशीदार खंभे दर्शकों का ध्यान खींचते हैं, जिन पर जैन तीर्थंकरों की सूक्ष्म मूर्तियाँ उकेरी गई हैं। पॉलिश किए हुए संगमरमर के फर्श पर खिड़कियों से छनकर आने वाली धूप एक दिव्य आभा उत्पन्न करती है। मारू-गुर्जर शैली में निर्मित छतों पर कमल के फूल, पौराणिक जीवों और जैन ग्रंथों की घटनाओं को अंकित करती नक्काशी देखने को मिलती है।

गलियारों में खड़े खंभे और ऊँची छतें प्राचीन कारीगरों की असाधारण कुशलता और समर्पण की जीवंत गवाही देते हैं। मंदिर का आंतरिक वातावरण शांत और शीतल रहता है, जहाँ धूप की सुगंध और धीमे मंत्रों की ध्वनि मन को गहरी शांति प्रदान करती है।

गर्भगृह और तीर्थंकरों की प्रतिमाएँ

मंदिर के गर्भगृह में प्रथम जैन तीर्थंकर आदिनाथ की शांत ध्यान मुद्रा में भव्य प्रतिमा स्थापित है। यह मूर्ति भक्तों के मन में अहिंसा, सत्य, शांति और वैराग्य की भावना जागृत करती है। परिसर में स्थित छोटे-छोटे मंदिर अन्य तीर्थंकरों को समर्पित हैं, जहाँ श्रद्धालु रंग-बिरंगे पुष्प अर्पित कर ध्यान में लीन होते हैं।

जैन संस्कृति और आध्यात्मिक अनुभव

साथी देवरी मंदिर की यात्रा जैन संस्कृति से गहरा जुड़ाव स्थापित कराती है। यहाँ श्वेत वस्त्र धारण किए जैन साधु-मुनियों को ध्यान और प्रार्थना में लीन देखा जा सकता है। यह मंदिर केवल आराधना का स्थान नहीं, बल्कि आंतरिक शांति और आत्म-चिंतन का केंद्र भी है।

पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण

यहाँ आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु प्रार्थना, ध्यान और चिंतन के लिए समय निकालते हैं। यह मंदिर धार्मिक यात्रा के साथ-साथ इतिहास और स्थापत्य कला की अमूल्य विरासत से भी परिचित कराता है। चित्तौड़गढ़ किले के यूनेस्को विश्व धरोहर दर्जे के कारण यह परिसर अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण गंतव्य बनता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जैन और लोक परंपराएँ एक ही भूमि पर सदियों से सह-अस्तित्व में रही हैं। चिंताजनक यह है कि कई संरचनाएँ पहले ही क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, और यूनेस्को का दर्जा मिलने के बावजूद संरक्षण की गति पर्यटन के विस्तार के अनुरूप नहीं दिखती। मारू-गुर्जर शैली की यह कारीगरी अगर अगली पीढ़ी तक पहुँचनी है, तो दस्तावेज़ीकरण और पुनर्स्थापना में निवेश अब और टाला नहीं जा सकता।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

साथी देवरी मंदिर कहाँ स्थित है?
साथी देवरी मंदिर राजस्थान के चित्तौड़गढ़ किले में फतेह प्रकाश पैलेस के निकट स्थित है। यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल चित्तौड़गढ़ किले का अभिन्न हिस्सा है।
साथी देवरी मंदिर का निर्माण कब हुआ था?
इस मंदिर परिसर का निर्माण 11वीं शताब्दी ईस्वी में जैन समुदाय के उत्कर्ष काल में हुआ था। यह 27 जैन मंदिरों का एक समूह है जिसे सत्तविश देवरी भी कहा जाता है।
साथी देवरी मंदिर में कौन-सी स्थापत्य शैली है?
यह मंदिर मारू-गुर्जर स्थापत्य शैली में निर्मित है, जिसमें बारीक नक्काशीदार खंभे, कमल-अंकित छतें और पॉलिश किए संगमरमर के फर्श शामिल हैं। छतों पर जैन ग्रंथों की घटनाओं और पौराणिक जीवों की नक्काशी विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
साथी देवरी मंदिर किसे समर्पित है?
यह परिसर जैन तीर्थंकरों को समर्पित है। मुख्य गर्भगृह में प्रथम जैन तीर्थंकर आदिनाथ की ध्यान मुद्रा में भव्य प्रतिमा स्थापित है, जबकि छोटे मंदिर अन्य तीर्थंकरों को समर्पित हैं।
क्या साथी देवरी मंदिर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है?
साथी देवरी मंदिर परिसर स्वयं में यूनेस्को सूचीबद्ध नहीं है, परंतु यह चित्तौड़गढ़ किले का हिस्सा है, जिसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त है। इस कारण यह परिसर भी उस संरक्षित क्षेत्र के अंतर्गत आता है।
राष्ट्र प्रेस