जयपुर अवैध पटाखा फैक्ट्री अग्निकांड: 8 की मौत के बाद 2 पुलिसकर्मी सस्पेंड, 5 गोदाम सील
सारांश
मुख्य बातें
जयपुर के खोह नागोरियन इलाके में एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में लगी भीषण आग में एक बच्चे समेत 8 लोगों की मौत के ठीक एक दिन बाद, बुधवार, 11 जून 2025 को प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए खोह नागोरियन थाने के दो पुलिसकर्मियों — असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (एएसआई) अमर सिंह और हेड कॉन्स्टेबल पप्पू राम — को सस्पेंड कर दिया। इसके साथ ही पुलिस ने आस-पास के इलाकों में ताबड़तोड़ छापेमारी कर अब तक 5 फैक्ट्रियों और गोदामों को सील किया है।
मुख्य घटनाक्रम
मंगलवार सुबह करीब 11 बजे खोह नागोरियन इलाके की आयशा कॉलोनी में स्थित एक मकान में भीषण आग भड़की, जहाँ कथित तौर पर अवैध रूप से पटाखे बनाए जा रहे थे। यह संपत्ति याकूब की बताई जाती है, जो नजीर खान का बेटा है और 'रक्षा की ढाणी' का निवासी है। आग में 8 लोगों की जान गई, जिनमें एक बच्चा और दो सगे भाई भी शामिल थे — यह हाल के वर्षों में जयपुर के सबसे घातक औद्योगिक हादसों में से एक है।
जाँच में सामने आया कि मकान को एक दीवार से दो हिस्सों में बाँटा गया था, ताकि पटाखा निर्माण की गतिविधि बाहर से नज़र न आए। फैक्ट्री में मुख्य रूप से कोल्ड फायर पटाखे बनाए जा रहे थे, जिनका उपयोग शादियों और उत्सवों में होता है।
छापेमारी और बरामदगी
मंगलवार रात से ही पुलिस टीमें खोह नागोरियन और जावेद विहार समेत आस-पास के इलाकों में छापेमारी कर रही हैं। जावेद विहार में एक ही परिसर में बने तीन गोदामों को सील किया गया, जहाँ से भारी मात्रा में अवैध बारूद बरामद हुआ और पटाखे बनाने में इस्तेमाल होने वाली दो मशीनें जब्त की गईं। रिपोर्टों के अनुसार, ये गोदाम याकूब और उसके भतीजे कय्यूम के हैं, जिन्हें इस मामले में मुख्य आरोपी बनाया गया है।
आयशा कॉलोनी के कई घरों में भी छापेमारी की गई, जहाँ कथित तौर पर पटाखे बनाने का काम चल रहा था। तीन अलग-अलग ठिकानों से गैरकानूनी तरीके से रखी गई विस्फोटक सामग्री बरामद की गई।
आरोपी फरार, गिरफ्तारी अब तक नहीं
पुलिस के अनुसार, मकान मालिक याकूब और कथित फैक्ट्री संचालक फिरोज — जो दिल्ली का निवासी बताया जाता है — घटना के बाद से फरार हैं। बुधवार दोपहर तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई थी।
प्रशासन पर लापरवाही के आरोप
इस हादसे के बाद प्रशासनिक लापरवाही और पुलिस की निष्क्रियता को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। आलोचकों का कहना है कि घनी आबादी वाले रिहायशी इलाके में इतने बड़े पैमाने पर अवैध पटाखा निर्माण इकाइयाँ लंबे समय से चल रही थीं, जबकि सुरक्षा और नियमों के पालन को लेकर बार-बार चिंताएँ जताई जाती रही थीं। यही कारण है कि दो पुलिसकर्मियों को निलंबित कर बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की गई।
आगे क्या होगा
जाँचकर्ता अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि इन अवैध इकाइयों को किसकी संरक्षण प्राप्त थी और नियामक तंत्र कहाँ चूका। सील की गई संपत्तियों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि छापेमारी अभी भी जारी है। फरार आरोपियों की तलाश के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं।