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राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने मुंबई में किया डॉ. दीपक सावंत की पुस्तक 'क्लाइमेट चेंज: एक चक्रव्यूह' का विमोचन

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राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने मुंबई में किया डॉ. दीपक सावंत की पुस्तक 'क्लाइमेट चेंज: एक चक्रव्यूह' का विमोचन

सारांश

महाराष्ट्र के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. दीपक सावंत की पुस्तक 'क्लाइमेट चेंज: एक चक्रव्यूह' का राजभवन मुंबई में विमोचन हुआ। 2010 की संसदीय चेतावनी से जोशीमठ तक — यह किताब जलवायु संकट को वैज्ञानिक गहराई और जन-भाषा में समझाने का प्रयास है।

मुख्य बातें

राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने 1 जुलाई 2026 को मुंबई राजभवन में डॉ.
दीपक सावंत की पुस्तक 'क्लाइमेट चेंज: एक चक्रव्यूह' का विमोचन किया।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
पुस्तक में जलवायु परिवर्तन और मिट्टी , खाद्य सुरक्षा , जानलेवा बीमारियाँ और कुपोषण जैसे अध्याय शामिल हैं।
मिलेट्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को जलवायु संकट के समाधान के रूप में रेखांकित किया गया है।
सावंत ने 2010 में विधान परिषद में दी गई चेतावनी का हवाला देते हुए कहा कि आज वह सच साबित हो रही है।

महाराष्ट्र के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. दीपक सावंत द्वारा लिखित पुस्तक 'क्लाइमेट चेंज: एक चक्रव्यूह' का बुधवार, 1 जुलाई 2026 को मुंबई स्थित लोक भवन (राजभवन) में विधिवत विमोचन किया गया। महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की उपस्थिति में इस पुस्तक का लोकार्पण किया। जलवायु परिवर्तन जैसे जटिल वैश्विक संकट को आम भाषा में समझाने का यह प्रयास राजनीतिक और वैज्ञानिक दोनों हलकों में चर्चा का विषय बना।

पुस्तक की विषय-वस्तु और उद्देश्य

विमोचन समारोह में डॉ. दीपक सावंत ने बताया कि यह पुस्तक वैश्विक जलवायु परिवर्तन पर प्रकाशित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध लेखों तथा विविध अध्ययनों के गहन विश्लेषण पर आधारित है। उनके अनुसार, पुस्तक का मुख्य उद्देश्य इस गंभीर विषय पर वैज्ञानिक जानकारी को जनसाधारण तक पहुँचाना और बढ़ते जलवायु प्रभावों के प्रति व्यापक जागरूकता उत्पन्न करना है।

पुस्तक में जलवायु परिवर्तन की जटिलता, जलवायु परिवर्तन और मिट्टी, जानलेवा बीमारियाँ, खाद्य सुरक्षा और कुपोषण जैसे महत्त्वपूर्ण अध्याय शामिल किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, मोटे अनाज (मिलेट्स) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की इस संकट से निपटने में संभावित भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की गई है।

16 साल पुरानी चेतावनी और आज की सच्चाई

डॉ. सावंत ने कहा कि वर्ष 2010 में विधान परिषद में जब ग्लोबल वॉर्मिंग के खतरनाक प्रभावों पर चर्चा की गई थी, तब यह विषय बहुतों के लिए अपरिचित था। आज वही चेतावनी सच साबित हो रही है — बढ़ती बीमारियाँ, बेमौसम वर्षा, भीषण गर्मी, बदलता मौसमचक्र और किसानों की आत्महत्याएँ उसी संकट के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं।

उन्होंने जोशीमठ के धीरे-धीरे धँसने का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रकृति के इस संकट के सामने मनुष्य की असहायता स्पष्ट रूप से सामने आई है। उनके शब्दों में, 'सिर्फ सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखने से यह संकट दूर नहीं होगा' — इसी विचार ने उन्हें यह पुस्तक लिखने की प्रेरणा दी।

अतिथियों और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने पुस्तक को जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर वैश्विक मुद्दे पर जनजागरूकता की दिशा में एक सार्थक पहल बताया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह पुस्तक आम नागरिकों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं — सभी के लिए उपयोगी संदर्भ सामग्री सिद्ध होगी।

आगे की राह: समाधान की ओर

पुस्तक केवल समस्याओं का विवरण नहीं देती, बल्कि जलवायु परिवर्तन के इस 'चक्रव्यूह' से बाहर निकलने के व्यावहारिक रास्ते भी सुझाती है। डॉ. सावंत के अनुसार, मिलेट्स को बढ़ावा देना और AI का सटीक उपयोग इस संकट से निपटने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। यह पुस्तक पाठकों को यह समझाने का प्रयास करती है कि इस वैश्विक संकट में प्रत्येक व्यक्ति की व्यक्तिगत भूमिका क्या हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

असली सवाल यह है कि राजभवन के भव्य विमोचन से आगे यह पुस्तक नीति-निर्माण को कितना प्रभावित करती है। महाराष्ट्र में किसान आत्महत्याएँ और अनियमित मानसून जैसी समस्याएँ दशकों से चर्चा में हैं, लेकिन ठोस जलवायु अनुकूलन नीतियाँ अभी भी अधूरी हैं। यदि यह पुस्तक केवल जागरूकता तक सीमित रहती है और नीति-निर्माताओं तक इसकी सिफारिशें नहीं पहुँचतीं, तो यह एक और सुविचारित लेकिन अप्रभावी प्रयास बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'क्लाइमेट चेंज: एक चक्रव्यूह' पुस्तक किसने लिखी है और इसमें क्या है?
यह पुस्तक महाराष्ट्र के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. दीपक सावंत ने लिखी है। इसमें जलवायु परिवर्तन की जटिलता, मिट्टी पर प्रभाव, जानलेवा बीमारियाँ, खाद्य सुरक्षा, कुपोषण और मिलेट्स व AI की भूमिका जैसे अध्याय शामिल हैं।
पुस्तक का विमोचन कब और कहाँ हुआ?
पुस्तक का विमोचन 1 जुलाई 2026 को मुंबई स्थित लोक भवन (राजभवन) में हुआ। महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की उपस्थिति में इसका लोकार्पण किया।
डॉ. दीपक सावंत ने यह पुस्तक क्यों लिखी?
डॉ. सावंत के अनुसार, 2010 में विधान परिषद में ग्लोबल वॉर्मिंग के खतरों पर दी गई उनकी चेतावनी आज सच साबित हो रही है। उनका मानना है कि सोशल मीडिया पोस्ट से यह संकट नहीं टलेगा, इसलिए वैज्ञानिक जानकारी को जन-भाषा में पेश करना ज़रूरी था।
यह पुस्तक किन लोगों के लिए उपयोगी है?
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने इसे आम नागरिकों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं — सभी के लिए उपयोगी बताया। पुस्तक जलवायु संकट से निपटने में व्यक्तिगत भूमिका भी स्पष्ट करती है।
पुस्तक में जलवायु संकट के समाधान के रूप में क्या सुझाया गया है?
पुस्तक में मोटे अनाज (मिलेट्स) को बढ़ावा देने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के सटीक उपयोग को जलवायु परिवर्तन के 'चक्रव्यूह' से बाहर निकलने के प्रमुख उपायों के रूप में रेखांकित किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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