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क्या जम्मू-कश्मीर में पारा फ्रीजिंग पॉइंट से नीचे चला गया?

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क्या जम्मू-कश्मीर में पारा फ्रीजिंग पॉइंट से नीचे चला गया?

सारांश

श्रीनगर में तापमान फ्रीजिंग पॉइंट से नीचे गिरने से डल झील के जमने की स्थिति बन गई है। यह मौसम कृषि और जलस्रोतों पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। जानें इस ठंड के कारण क्या हो रहा है जम्मू-कश्मीर में।

मुख्य बातें

श्रीनगर में न्यूनतम तापमान माइनस 5.7 डिग्री दर्ज किया गया।
डल झील आंशिक रूप से जम गई है।
ठंड के कारण स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं।
जल स्रोतों पर बर्फबारी का प्रभाव पड़ सकता है।
मौसम में बदलाव की संभावना कम है।

श्रीनगर, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। शनिवार को श्रीनगर और जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी क्षेत्रों में तापमान फ्रीजिंग पॉइंट से कई डिग्री नीचे गिर गया। राजधानी श्रीनगर में न्यूनतम तापमान माइनस 5.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि पिछले दिन यह माइनस 6 डिग्री था।

कड़ाके की ठंड के कारण यहाँ की प्रसिद्ध डल झील आंशिक रूप से जम गई है, जिससे नाविकों को अपनी नावें चलाने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, पानी के नल, सड़क पर बने गड्ढे और उथले जलाशय भी जम गए हैं।

श्रीनगर में अधिकतम और न्यूनतम तापमान के बीच का अंतर भी घट गया है। शुक्रवार को अधिकतम तापमान केवल 10.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों के लिए ठंडी और शुष्क हवाओं की भविष्यवाणी की है और कहा कि 20 जनवरी तक बारिश या बर्फबारी की संभावना बहुत कम है, केवल ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी हो सकती है।

इस लगातार शुष्क मौसम ने जम्मू और कश्मीर में चिंता बढ़ा दी है। यहाँ के सभी जल स्रोत भारी हिमपात पर निर्भर करते हैं, जो कृषि, बागवानी और पीने के पानी की आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह हिमपात 'चिल्लई कलां' की अवधि के दौरान होता है, जो 40 दिन लंबी होती है। इस महत्वपूर्ण समय का आधा हिस्सा पहले ही गुजर चुका है, लेकिन वादी के मैदानों में अब तक इस मौसम की पहली बर्फबारी नहीं हुई है। चिल्लई कलां की अवधि 30 जनवरी को समाप्त होगी। इसके बाद फरवरी और मार्च में होने वाली बर्फ जल्दी पिघल जाती है, जिससे स्थायी जलाशयों को भरने में अधिक मदद नहीं मिलती।

श्रीनगर के अलावा, गुलमर्ग में न्यूनतम तापमान माइनस 6.8 डिग्री और पहलगाम में माइनस 7.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जम्मू शहर में रात का न्यूनतम तापमान 3.6 डिग्री, कटरा में 5.3 डिग्री, बाटोटे में 1.3 डिग्री, बानिहाल में माइनस 0.4 डिग्री और भद्रवाह में माइनस 2.8 डिग्री था।

कडाके की ठंड और शुष्क मौसम के कारण फेफड़ों और दिल की बीमारियों के मरीज अस्पतालों और क्लीनिकों में बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों ने लोगों को चेतावनी दी है कि यदि किसी को पहले से दिल या छाती की समस्या है, तो उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। इस प्रकार के मौसम में गर्म कपड़े पहनना, शरीर को पूरी तरह से ढकना और समय पर दवाओं का सेवन करना अति आवश्यक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो भविष्य में जल संकट हो सकता है, जो कि हमारे लिए एक गंभीर मुद्दा है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू-कश्मीर में तापमान इतना क्यों गिरा?
जम्मू-कश्मीर में ठंडी हवाएं और मौसमी परिवर्तन के कारण तापमान फ्रीजिंग पॉइंट से नीचे गिर गया है।
डल झील का जमना क्या दर्शाता है?
डल झील का जमना इस क्षेत्र में कड़ाके की ठंड और शुष्क मौसम का संकेत है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
क्या अगले दिनों में बर्फबारी की संभावना है?
मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों में बर्फबारी की संभावना बहुत कम है, केवल ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी हो सकती है।
ठंड से स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
कड़ाके की ठंड से फेफड़ों और दिल की बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है, इसलिए लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए।
चिल्लई कलां क्या है?
चिल्लई कलां 40 दिनों की कठोर सर्दी की अवधि है, जो जम्मू-कश्मीर में महत्वपूर्ण होती है।
राष्ट्र प्रेस
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