रवीन्द्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि: ओम बिड़ला, अमित शाह, योगी समेत दर्जनों नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
नोबेल पुरस्कार विजेता और राष्ट्रगान 'जन-गण-मन' के रचयिता गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि पर 7 अगस्त 2026 को देशभर के वरिष्ठ नेताओं ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। लोकसभा अध्यक्ष से लेकर कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों तक — सभी ने गुरुदेव की साहित्यिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक विरासत को नमन किया।
लोकसभा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्रियों की श्रद्धांजलि
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने एक्स पर लिखा कि गुरुदेव टैगोर 'भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण के महान शिल्पी' थे। उन्होंने कहा कि टैगोर केवल महान कवि नहीं, बल्कि दार्शनिक, शिक्षाविद्, संगीतकार, चित्रकार, समाज सुधारक और मानवतावादी चिंतक भी थे। बिड़ला ने यह भी रेखांकित किया कि वर्ष 1913 में 'गीतांजलि' के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार प्राप्त कर गुरुदेव ने भारतीय साहित्य को वैश्विक पहचान दिलाई।
गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा कि गुरुदेव ने 'अपनी लेखनी से भारत की आत्मा को स्वर दिया और स्वतंत्रता आंदोलन में नई चेतना का संचार किया।' उन्होंने विश्व भारती विश्वविद्यालय की स्थापना को भी भारतीय संस्कृति और दर्शन को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने वाला कदम बताया।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक्स पर पोस्ट करते हुए टैगोर को 'महान कवि व अद्वितीय कथाकार' बताया और कहा कि उनकी अमर कृतियाँ सदैव राष्ट्र की उन्नति के लिए प्रेरित करती रहेंगी। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने उन्हें 'भारतीय विद्वान और नोबेल पुरस्कार विजेता' के रूप में सादर नमन किया। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि गुरुदेव ने शिक्षा, कला और स्वराज के विचार को नई दिशा दी।
मुख्यमंत्रियों ने किया नमन
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर लिखा कि गुरुदेव ने 'भारत के मस्तक पर साहित्य, संस्कृति और स्वाभिमान का स्वर्णिम मुकुट सजाया।' राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि उनके विचार और कालजयी रचनाएँ आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरणा प्रदान करती रहेंगी।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने टैगोर को 'सशक्त लेखनी के माध्यम से भारतीय साहित्य को विश्व पटल पर गौरवान्वित करने वाले महान कवि' बताया। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि भारतीय साहित्य, संगीत, कला और संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने में उनका योगदान अमूल्य है।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि गुरुदेव का संदेश 'विकसित, समरस और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की यात्रा को आलोकित करता है।' बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उन्हें 'शत-शत नमन' अर्पित किया। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गुरुदेव को 'राष्ट्रऋषि' की संज्ञा देते हुए कहा कि उनका जीवन समाज को कर्तव्य और सांस्कृतिक गौरव के पथ पर अग्रसर करता रहेगा।
गुरुदेव की विरासत: एक संक्षिप्त परिचय
गुरतलब है कि रवीन्द्रनाथ टैगोर एशिया के पहले नोबेल पुरस्कार विजेता थे, जिन्हें 1913 में 'गीतांजलि' के लिए साहित्य का यह सर्वोच्च सम्मान मिला था। उन्होंने विश्व भारती विश्वविद्यालय की स्थापना की, जो आज भी शांतिनिकेतन में शिक्षा और संस्कृति का केंद्र है। उनकी रचनाओं में कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक और संगीत — सभी विधाएँ शामिल हैं।
राजनीतिक एकता का संदेश
यह ऐसे समय में उल्लेखनीय है जब विभिन्न दलों और विचारधाराओं के नेता एक साथ किसी सांस्कृतिक विभूति को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। गुरुदेव टैगोर की पुण्यतिथि पर यह व्यापक श्रद्धांजलि दर्शाती है कि उनकी विरासत आज भी राजनीतिक सीमाओं से परे राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बनी हुई है। आने वाले वर्षों में भी उनकी रचनाएँ और दर्शन भारतीय समाज को दिशा देते रहेंगे।