जनसांख्यिकीय बदलाव पर केंद्र की उच्चस्तरीय समिति: बिहार के BJP-JDU ने किया स्वागत, अवैध घुसपैठ पर जताई चिंता
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जनसांख्यिकीय बदलाव की जाँच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया है, जिसके बाद पटना सहित पूरे देश के राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। बिहार के सत्तारूढ़ गठबंधन — भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (यूनाइटेड) — ने 27 मई 2025 को इस कदम का खुलकर स्वागत किया और सीमावर्ती जिलों में अवैध घुसपैठ को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया।
मुख्य घटनाक्रम
बिहार BJP अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा, 'यह राष्ट्रीय चिंता का विषय है। जिन राज्यों में विपक्षी दलों का शासन रहा है, जैसे पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासनकाल में वहाँ के कई जिलों की जनसांख्यिकी पूरी तरह बदल गई। आरोप है कि उनके शासन में बांग्लादेशी घुसपैठियों को बसाया गया। अवैध घुसपैठ एक बड़ी समस्या बनी हुई है।' उन्होंने यह भी याद दिलाया कि केंद्रीय गृह मंत्री ने हाल ही में बिना किसी चुनावी संदर्भ के बिहार का दौरा किया था और सीमावर्ती जिलों में तीन दिन बिताए थे।
सरावगी ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा केवल बिहार या बंगाल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश की सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है।
सरकार की प्रतिक्रिया
बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा, 'हाल के वर्षों में बांग्लादेश से सीमावर्ती जिलों में बड़े पैमाने पर अवैध घुसपैठ हुई है। कई जिलों की जनसांख्यिकीय बनावट बदल रही है, जो चिंता का विषय है। कुछ जगहों पर यह बदलाव कथित तौर पर लगभग 100 प्रतिशत तक पहुँच गया है।' यादव ने आगे कहा कि गृह मंत्री ने भी इस बात पर चिंता जताई है कि विदेशों से घुसपैठिये आ रहे हैं और जनसांख्यिकीय स्वरूप बदल रहा है, जिससे देश की सुरक्षा प्रभावित हो रही है।
जदयू का पक्ष
जनता दल (यूनाइटेड) के प्रवक्ता राजीव रंजन ने भी इस मुद्दे की गंभीरता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, 'ऐसे तमाम लोग जिनके पास इस देश की नागरिकता नहीं है या वैध कागजात नहीं हैं, राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से चिंता का कारण हैं। यह बेहद आवश्यक है कि संसाधनों का बंटवारा इस 140 करोड़ की आबादी वाले देश में सिर्फ भारतीयों के बीच हो। जो लोग यहाँ अवैध रूप से रह रहे हैं, उन्हें देश से बाहर जाना होगा।'
समिति का दायरा
गठित की जाने वाली यह समिति अवैध घुसपैठ, फर्जी दस्तावेजों और जनसांख्यिकीय असंतुलन की वास्तविक स्थिति का आकलन करेगी। BJP-JDU गठबंधन ने इसे एक सकारात्मक और आवश्यक कदम बताया है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब सीमावर्ती राज्यों में जनसंख्या-संरचना को लेकर बहस राष्ट्रीय स्तर पर तीव्र हो रही है।
आगे क्या
समिति की संरचना, कार्यक्षेत्र और रिपोर्ट की समयसीमा अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस समिति की सिफारिशें सीमा-प्रबंधन नीति और नागरिकता सत्यापन प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकती हैं।