रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने हिरोशिमा में जापान के स्टील्थ युद्धपोत 'नियोदो' का किया निरीक्षण
सारांश
मुख्य बातें
भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने मंगलवार, 14 जुलाई को हिरोशिमा स्थित जापान की समुद्री आत्मरक्षा सेना (JMSDF) के कुरे नौसैनिक अड्डे का दौरा किया और सातवें 'मोगामी' श्रेणी के अत्याधुनिक स्टील्थ युद्धपोत 'नियोदो' का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते सामरिक समीकरणों के बीच यह यात्रा भारत-जापान रक्षा साझेदारी को नई गहराई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
कुरे नौसैनिक अड्डे पर उच्चस्तरीय मुलाकात
हिरोशिमा में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कुरे जिले के कमांडेंट वाइस एडमिरल मात्सुमोतो तमोत्सु से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने जापानी नौसेना की आधुनिक युद्धक क्षमताओं का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। मोगामी श्रेणी का स्टील्थ युद्धपोत जापान की नौसैनिक शक्ति का एक अहम स्तंभ माना जाता है, और इसका निरीक्षण दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग की बढ़ती गहराई को रेखांकित करता है।
टोक्यो में रक्षा नीति संवाद का आठवां दौर
गौरतलब है कि रक्षा सचिव के हिरोशिमा पहुंचने से ठीक एक दिन पहले, 13 जुलाई को टोक्यो में भारत और जापान के बीच रक्षा नीति संवाद का आठवां दौर आयोजित हुआ था। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व स्वयं राजेश कुमार सिंह ने किया, जबकि जापानी पक्ष की अगुवाई अंतरराष्ट्रीय मामलों के लिए रक्षा उपमंत्री कानो कोजी ने की। इस उच्चस्तरीय वार्ता में दोनों देशों ने पिछली बैठकों के बाद रक्षा सहयोग में हुई प्रगति की समीक्षा की और विशेष सामरिक एवं वैश्विक साझेदारी को और सुदृढ़ बनाने पर सहमति जताई।
श्रद्धांजलि से हुई यात्रा की शुरुआत
जापान यात्रा की शुरुआत रक्षा सचिव ने टोक्यो स्थित आत्मरक्षा बल स्मारक शिला पर पुष्पचक्र अर्पित कर की। उन्होंने उन जापानी सैनिकों को श्रद्धांजलि दी जिन्होंने अपने देश की सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दोनों देशों के बीच बढ़ते पारस्परिक विश्वास और सम्मान का प्रतीक है।
हिंद-प्रशांत में बढ़ती साझेदारी का महत्व
विशेषज्ञों के अनुसार, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री मार्गों की सुरक्षा, नियम-आधारित व्यवस्था और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने में भारत-जापान साझेदारी लगातार अधिक प्रासंगिक होती जा रही है। दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय शांति के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह दौरा संकेत देता है कि भारत और जापान आने वाले वर्षों में समुद्री सुरक्षा एवं सैन्य समन्वय में और अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।
आगे क्या
रक्षा सचिव की इस यात्रा को भारत-जापान के बीच बढ़ते सामरिक सहयोग की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच रक्षा नीति संवाद के आठवें दौर के बाद अब अपेक्षा है कि आगामी महीनों में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास और तकनीकी सहयोग के नए आयाम सामने आएंगे।