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झारखंड में 8 लाख से अधिक राशन कार्ड रद्द होने की कगार पर, फर्जी-निष्क्रिय कार्डधारियों का राज्यव्यापी सत्यापन जारी

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झारखंड में 8 लाख से अधिक राशन कार्ड रद्द होने की कगार पर, फर्जी-निष्क्रिय कार्डधारियों का राज्यव्यापी सत्यापन जारी

सारांश

झारखंड में 8 लाख से अधिक राशन कार्ड रद्द होने की कगार पर हैं — राज्यव्यापी सत्यापन में 21,750 डुप्लीकेट और 12,284 संदिग्ध कार्ड पकड़े गए हैं। अपात्रों को 30 जून तक कार्ड सरेंडर का अल्टीमेटम दिया गया है, और नई ई-केवाईसी अनिवार्यता से असली जरूरतमंदों को प्राथमिकता मिलेगी।

मुख्य बातें

झारखंड सरकार ने 8,02,685 राशन कार्डधारियों की पहचान की है जिन्होंने 6 महीने से 1 वर्ष या अधिक समय से PDS राशन नहीं लिया।
अब तक 4.61 लाख कार्डधारियों का भौतिक सत्यापन पूरा; 21,750 डुप्लीकेट और 12,284 संदिग्ध कार्ड पकड़े गए।
पूर्वी सिंहभूम , गिरिडीह और पश्चिमी सिंहभूम में सर्वाधिक अनियमित कार्ड मिले।
चार पहिया वाहन मालिक, 5 एकड़ से अधिक भूमि स्वामी और आयकरदाताओं को 30 जून तक कार्ड स्वेच्छा से सरेंडर करने का निर्देश।
नए नाम जोड़ने के लिए अब आधार ई-केवाईसी और बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य।
राज्य में 5.50 लाख से अधिक नए राशन कार्ड आवेदन लंबित; निष्क्रिय कार्ड हटने के बाद इन्हें प्राथमिकता मिलेगी।

झारखंड सरकार के खाद्य आपूर्ति विभाग ने राज्य में 8,02,685 राशन कार्डधारियों की पहचान की है, जिन्होंने पिछले छह महीने से एक वर्ष या उससे भी अधिक समय से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत राशन नहीं उठाया है। इन कार्डों को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है और राज्यभर में व्यापक सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। विभाग का मानना है कि इनमें बड़ी संख्या में निष्क्रिय, डुप्लीकेट अथवा अपात्र व्यक्तियों के नाम पर चल रहे कार्ड शामिल हो सकते हैं।

सत्यापन अभियान की स्थिति

अब तक 4.61 लाख से अधिक कार्डधारियों का भौतिक सत्यापन पूरा किया जा चुका है। इस अभियान के दौरान 21,750 डुप्लीकेट राशन कार्ड और 12,284 संदिग्ध कार्ड सामने आए हैं। जिन कार्डधारियों का पता नहीं चल रहा है या जो लंबे समय से योजना का लाभ नहीं उठा रहे हैं, उनके कार्ड रद्द किए जाने की संभावना है।

जिलेवार आँकड़ों के अनुसार, पूर्वी सिंहभूम, गिरिडीह और पश्चिमी सिंहभूम में ऐसे मामलों की संख्या सबसे अधिक बताई जा रही है। गौरतलब है कि यह अभियान ऐसे समय में चलाया जा रहा है जब राज्य में 5.50 लाख से अधिक नए राशन कार्ड और नाम जोड़ने के आवेदन लंबित पड़े हैं।

नई ई-केवाईसी अनिवार्यता

सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब राशन कार्ड में कोई नया नाम जोड़ने के लिए आधार आधारित ई-केवाईसी और बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य होगा। बिना इस प्रक्रिया के किसी भी नए सदस्य का नाम कार्ड में दर्ज नहीं किया जाएगा। यह कदम भविष्य में फर्जी नामांकन रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।

अपात्र लाभार्थियों को चेतावनी

विभाग ने उन लोगों को भी आगाह किया है जो आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद राशन योजना का लाभ ले रहे हैं। चार पहिया वाहन रखने वाले, पाँच एकड़ या उससे अधिक भूमि के स्वामी अथवा आयकरदाता व्यक्तियों से 30 जून तक स्वेच्छा से राशन कार्ड सरेंडर करने को कहा गया है। अधिकारियों के अनुसार, ऐसा न करने पर जाँच में पकड़े जाने की स्थिति में वसूली की कार्रवाई की जा सकती है।

असली जरूरतमंदों तक पहुँचेगा लाभ

खाद्य आपूर्ति विभाग का कहना है कि निष्क्रिय और फर्जी कार्ड हटने के बाद बड़ी संख्या में नए पात्र परिवारों को PDS से जोड़ा जा सकेगा। 5.50 लाख से अधिक लंबित आवेदनों में से अधिकांश वास्तविक जरूरतमंद परिवार हैं, जिन्हें इस सफाई अभियान के बाद प्राथमिकता के आधार पर लाभ दिया जाएगा। यह अभियान राज्य सरकार की उस नीति का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य सब्सिडी का लाभ सही व्यक्ति तक पहुँचाना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की पारदर्शिता में है — क्योंकि देशभर में ऐसे अभियानों में वास्तविक जरूरतमंद परिवार भी गलती से सूची से बाहर होते रहे हैं। 8 लाख कार्डों की समीक्षा में से केवल 4.61 लाख का भौतिक सत्यापन अब तक हुआ है, यानी बड़ी संख्या अभी भी अधूरी है। 30 जून की सरेंडर डेडलाइन दबाव बनाने का साधन है, लेकिन बिना शिकायत निवारण तंत्र के यह उन ग्रामीण परिवारों के लिए नुकसानदेह हो सकती है जो दस्तावेज़ी कमियों के कारण 'अपात्र' दिखते हैं पर असल में जरूरतमंद हैं।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड में कितने राशन कार्ड रद्द होने वाले हैं?
झारखंड सरकार ने 8,02,685 राशन कार्डधारियों की पहचान की है जिन्होंने छह महीने से एक वर्ष या उससे अधिक समय से PDS राशन नहीं लिया। इन सभी के कार्ड रद्द किए जा सकते हैं, हालाँकि अंतिम निर्णय सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद होगा।
झारखंड राशन कार्ड सत्यापन अभियान में क्या पाया गया?
अब तक के सत्यापन में 21,750 डुप्लीकेट राशन कार्ड और 12,284 संदिग्ध कार्ड सामने आए हैं। पूर्वी सिंहभूम , गिरिडीह और पश्चिमी सिंहभूम जिलों में ऐसे मामलों की संख्या सर्वाधिक बताई जा रही है।
कौन से लोग राशन कार्ड सरेंडर करने के लिए कहे गए हैं?
चार पहिया वाहन रखने वाले, 5 एकड़ या उससे अधिक भूमि के मालिक और आयकरदाता व्यक्तियों को 30 जून तक स्वेच्छा से राशन कार्ड सरेंडर करने का निर्देश दिया गया है। ऐसा न करने पर जाँच में पकड़े जाने पर वसूली की कार्रवाई हो सकती है।
झारखंड में नए राशन कार्ड के लिए क्या नियम बदले हैं?
अब राशन कार्ड में नया नाम जोड़ने के लिए आधार आधारित ई-केवाईसी और बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। बिना इस प्रक्रिया के कोई भी नया नाम कार्ड में नहीं जोड़ा जाएगा।
इस सत्यापन अभियान से वास्तविक जरूरतमंदों को क्या फायदा होगा?
फर्जी और निष्क्रिय कार्ड हटने के बाद राज्य में लंबित 5.50 लाख से अधिक नए राशन कार्ड आवेदनों में से पात्र परिवारों को PDS से जोड़ा जा सकेगा। विभाग का लक्ष्य सब्सिडी का लाभ सही व्यक्ति तक पहुँचाना है।
राष्ट्र प्रेस
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