झारखंड: भाजपा नेताओं ने राज्यपाल संतोष गंगवार से मिलकर 24 दिनों से जारी छात्र आंदोलन पर हस्तक्षेप की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी-जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरुद्ध 24 दिनों से जारी छात्र आंदोलन के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शीर्ष नेताओं ने 17 अगस्त 2025 को लोकभवन पहुँचकर राज्यपाल संतोष गंगवार से मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह शामिल थे।
मुख्य घटनाक्रम
भाजपा नेताओं ने राज्यपाल को छात्र आंदोलन की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के नेतृत्व में छात्र जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने और भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की सीबीआई जाँच की माँग को लेकर आंदोलनरत हैं। कई छात्र लंबे समय से आमरण अनशन पर हैं और स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है।
भाजपा के आरोप और माँग
भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार छात्रों की माँगों को लेकर गंभीर नहीं है। उनके अनुसार, सरकार की ओर से बातचीत की पहल तो की जा रही है, लेकिन प्रमुख माँगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। नेताओं ने राज्यपाल से इस गतिरोध में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया, ताकि सरकार पर छात्रों की जायज माँगें तत्काल स्वीकार करने का दबाव बने।
छात्रों की स्वास्थ्य स्थिति पर चिंता
भाजपा नेताओं ने राज्यपाल के समक्ष यह भी रेखांकित किया कि आंदोलन के लंबा खिंचने से कई छात्रों की स्वास्थ्य स्थिति चिंताजनक हो गई है। उन्होंने माँग की कि सरकार संवेदनशीलता दिखाते हुए छात्रों के साथ सार्थक संवाद करे और उनकी माँगों पर शीघ्र निर्णय ले। गौरतलब है कि यह आंदोलन झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर बढ़ती बेचैनी का प्रतिबिंब है।
राज्यपाल का आश्वासन
भाजपा नेताओं के अनुसार, राज्यपाल संतोष गंगवार ने उन्हें आश्वस्त किया कि राज्य में उपजे समस्त हालात पर उनकी पैनी नज़र है और वे पूरे घटनाक्रम से भलीभाँति अवगत हैं। मुलाकात के दौरान राज्य की वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच भर्ती परीक्षा सुधारों को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है। अब सभी की निगाहें इस पर होंगी कि राज्यपाल का हस्तक्षेप राज्य सरकार को छात्रों की माँगों पर ठोस कदम उठाने के लिए प्रेरित कर पाता है या नहीं।