गढ़वा की सरस्वतीया नदी को बचाने के लिए 'आपन सरस्वतीया' अभियान, जनता-अधिकारी एकजुट
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के गढ़वा जिले में सरस्वतीया नदी को पुनर्जीवित करने के लिए 14 जून 2026 से एक अनूठा जन-प्रशासन अभियान चल रहा है, जिसे 'आपन सरस्वतीया' नाम दिया गया है। गढ़वा सदर के एसडीएम संजय कुमार की पहल पर शुरू हुए इस अभियान में स्थानीय नागरिक और सरकारी अधिकारी मिलकर लगभग 14 किलोमीटर लंबी इस नदी की सफाई और डी-सिल्टिंग में जुटे हैं।
अभियान की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
सरस्वतीया नदी का गढ़वा शहर से गहरा सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जुड़ाव रहा है। हालाँकि, बीते वर्षों में यह नदी कूड़े-कचरे, मिट्टी के भराव और अतिक्रमण की शिकार हो गई थी। एक सप्ताह पूर्व तक यह नदी पूरी तरह कचरे से पटी हुई थी। 'आपन सरस्वतीया' नाम के पीछे मूल भावना यह है कि गढ़वा का हर नागरिक इस नदी को अपनी धरोहर समझे और इसके संरक्षण को अपनी सामूहिक जिम्मेदारी माने।
मुख्य घटनाक्रम
पिछले एक सप्ताह से जेसीबी मशीनों की मदद से नदी के विभिन्न क्षेत्रों में सफाई और डी-सिल्टिंग का कार्य जारी है। यह अभियान सरकारी फंड पर निर्भर नहीं है — गौरतलब है कि झारखंड की राजधानी रांची में नालों की सफाई के लिए सरकारी धन का उपयोग होता है, जबकि गढ़वा में यह पूरा अभियान सामाजिक सहयोगकर्ताओं के सहयोग से चलाया जा रहा है। यह मॉडल राज्य में नागरिक-प्रशासन साझेदारी की एक नई मिसाल पेश करता है।
प्रशासन की सख्त चेतावनी
एसडीएम संजय कुमार ने स्पष्ट किया कि जब तक जनसहयोग मिलता रहेगा, यह अभियान सरस्वतीया नदी की पूर्ण सफाई तक जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि नदी में जानबूझकर कचरा डालने, मिट्टी से भराव करने या बिल्डिंग मटेरियल फेंकने वालों पर दंड लगाया जाएगा और कचरा हटवाने का खर्च भी उन्हीं से वसूला जाएगा। नगर परिषद को जगह-जगह चेतावनी बोर्ड लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
उपायुक्त की अपील
गढ़वा उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा ने कहा कि नदियाँ राज्य की धरोहर हैं और इन्हें बचाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने जनता से अपील की कि सफाई का कार्य दस दिनों में पूरा हो जाएगा, लेकिन नदी को स्वच्छ बनाए रखना हर नागरिक का दायित्व है। उन्होंने चेतावनी दी कि नदी में अतिक्रमण करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
आगे की राह
अभियान के पूरा होने के बाद नदी के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए निगरानी तंत्र और जागरूकता कार्यक्रमों की योजना है। 'आपन सरस्वतीया' अभियान यह संदेश देता है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार का नहीं, बल्कि समाज का भी दायित्व है।