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गढ़वा की सरस्वतीया नदी को बचाने के लिए 'आपन सरस्वतीया' अभियान, जनता-अधिकारी एकजुट

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गढ़वा की सरस्वतीया नदी को बचाने के लिए 'आपन सरस्वतीया' अभियान, जनता-अधिकारी एकजुट

सारांश

गढ़वा में कूड़े से पटी सरस्वतीया नदी को बचाने के लिए एसडीएम संजय कुमार की पहल पर 'आपन सरस्वतीया' अभियान शुरू हुआ है। जनता और अधिकारी मिलकर 14 किमी नदी की सफाई कर रहे हैं — बिना सरकारी फंड के, सामाजिक सहयोग से।

मुख्य बातें

गढ़वा में सरस्वतीया नदी को पुनर्जीवित करने के लिए 'आपन सरस्वतीया' अभियान शुरू किया गया है।
एसडीएम संजय कुमार की पहल पर चल रहे इस अभियान में 14 किलोमीटर नदी की सफाई और डी-सिल्टिंग जारी है।
अभियान सामाजिक सहयोगकर्ताओं के सहयोग से चल रहा है, सरकारी फंड पर नहीं।
नदी में कचरा डालने वालों पर दंड और कचरा हटवाने का खर्च वसूला जाएगा।
उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा के अनुसार सफाई कार्य दस दिनों में पूरा होने की उम्मीद है।

झारखंड के गढ़वा जिले में सरस्वतीया नदी को पुनर्जीवित करने के लिए 14 जून 2026 से एक अनूठा जन-प्रशासन अभियान चल रहा है, जिसे 'आपन सरस्वतीया' नाम दिया गया है। गढ़वा सदर के एसडीएम संजय कुमार की पहल पर शुरू हुए इस अभियान में स्थानीय नागरिक और सरकारी अधिकारी मिलकर लगभग 14 किलोमीटर लंबी इस नदी की सफाई और डी-सिल्टिंग में जुटे हैं।

अभियान की पृष्ठभूमि और उद्देश्य

सरस्वतीया नदी का गढ़वा शहर से गहरा सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जुड़ाव रहा है। हालाँकि, बीते वर्षों में यह नदी कूड़े-कचरे, मिट्टी के भराव और अतिक्रमण की शिकार हो गई थी। एक सप्ताह पूर्व तक यह नदी पूरी तरह कचरे से पटी हुई थी। 'आपन सरस्वतीया' नाम के पीछे मूल भावना यह है कि गढ़वा का हर नागरिक इस नदी को अपनी धरोहर समझे और इसके संरक्षण को अपनी सामूहिक जिम्मेदारी माने।

मुख्य घटनाक्रम

पिछले एक सप्ताह से जेसीबी मशीनों की मदद से नदी के विभिन्न क्षेत्रों में सफाई और डी-सिल्टिंग का कार्य जारी है। यह अभियान सरकारी फंड पर निर्भर नहीं है — गौरतलब है कि झारखंड की राजधानी रांची में नालों की सफाई के लिए सरकारी धन का उपयोग होता है, जबकि गढ़वा में यह पूरा अभियान सामाजिक सहयोगकर्ताओं के सहयोग से चलाया जा रहा है। यह मॉडल राज्य में नागरिक-प्रशासन साझेदारी की एक नई मिसाल पेश करता है।

प्रशासन की सख्त चेतावनी

एसडीएम संजय कुमार ने स्पष्ट किया कि जब तक जनसहयोग मिलता रहेगा, यह अभियान सरस्वतीया नदी की पूर्ण सफाई तक जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि नदी में जानबूझकर कचरा डालने, मिट्टी से भराव करने या बिल्डिंग मटेरियल फेंकने वालों पर दंड लगाया जाएगा और कचरा हटवाने का खर्च भी उन्हीं से वसूला जाएगा। नगर परिषद को जगह-जगह चेतावनी बोर्ड लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

उपायुक्त की अपील

गढ़वा उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा ने कहा कि नदियाँ राज्य की धरोहर हैं और इन्हें बचाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने जनता से अपील की कि सफाई का कार्य दस दिनों में पूरा हो जाएगा, लेकिन नदी को स्वच्छ बनाए रखना हर नागरिक का दायित्व है। उन्होंने चेतावनी दी कि नदी में अतिक्रमण करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

आगे की राह

अभियान के पूरा होने के बाद नदी के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए निगरानी तंत्र और जागरूकता कार्यक्रमों की योजना है। 'आपन सरस्वतीया' अभियान यह संदेश देता है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार का नहीं, बल्कि समाज का भी दायित्व है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा सफाई के बाद शुरू होती है। भारत में दर्जनों नदी-पुनर्जीवन अभियान जोश के साथ शुरू होकर निगरानी तंत्र के अभाव में दम तोड़ चुके हैं। गढ़वा में सरकारी फंड की जगह सामाजिक सहयोग का मॉडल प्रेरणादायक है, परंतु दीर्घकालिक स्वच्छता के लिए केवल दंड की चेतावनी पर्याप्त नहीं — नागरिक जागरूकता और संस्थागत जवाबदेही दोनों जरूरी हैं। यह देखना होगा कि दस दिन बाद प्रशासनिक ध्यान हटने पर यह नदी फिर से अतिक्रमण और कचरे की शिकार तो नहीं हो जाती।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'आपन सरस्वतीया' अभियान क्या है?
यह झारखंड के गढ़वा जिले में सरस्वतीया नदी को पुनर्जीवित करने के लिए शुरू किया गया जन-प्रशासन अभियान है। गढ़वा सदर एसडीएम संजय कुमार की पहल पर सामाजिक सहयोग से 14 किलोमीटर नदी की सफाई और डी-सिल्टिंग की जा रही है।
यह अभियान सरकारी फंड से क्यों नहीं चलाया जा रहा?
रांची जैसे बड़े शहरों में नालों की सफाई के लिए सरकारी धन उपलब्ध होता है, लेकिन गढ़वा में यह अभियान सामाजिक सहयोगकर्ताओं के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य नागरिकों में यह भावना जगाना है कि नदी उनकी अपनी धरोहर है।
नदी में कचरा डालने वालों पर क्या कार्रवाई होगी?
एसडीएम संजय कुमार के अनुसार, सरस्वतीया नदी में जानबूझकर कचरा डालने, मिट्टी से भराव करने या बिल्डिंग मटेरियल फेंकने वालों पर दंड लगाया जाएगा और कचरा हटवाने का खर्च भी उन्हीं से वसूला जाएगा। नगर परिषद को चेतावनी बोर्ड लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
सरस्वतीया नदी की सफाई कब तक पूरी होगी?
गढ़वा उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा के अनुसार सफाई का कार्य दस दिनों में पूरा होने की उम्मीद है। हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि नदी को स्वच्छ बनाए रखना हर नागरिक की दीर्घकालिक जिम्मेदारी है।
इस अभियान का नाम 'आपन सरस्वतीया' क्यों रखा गया?
इस नाम के पीछे भावना यह है कि गढ़वा शहर का हर नागरिक सरस्वतीया नदी को अपनी धरोहर समझे और इसके संरक्षण को अपनी सामूहिक जिम्मेदारी माने। 'आपन' का अर्थ है 'अपना' — यानी यह नदी हम सभी की है।
राष्ट्र प्रेस
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