गढ़वा में 'आपन सरस्वतिया' अभियान: जनता-प्रशासन ने मिलकर शुरू की नदी की सफाई
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के गढ़वा जिले में सरस्वतिया नदी को पुनर्जीवित करने के लिए जनता और प्रशासन ने हाथ मिलाया है। गढ़वा सदर एसडीएम संजय कुमार की पहल पर शुरू हुए 'आपन सरस्वतिया' अभियान के तहत नदी की सफाई और डी-सिल्टिंग का कार्य लगातार जारी है। यह अभियान एक युवक की अथक मेहनत और सामाजिक जागरूकता का परिणाम है, जिसने अब सामूहिक जनआंदोलन का रूप ले लिया है।
अभियान का दूसरा दिन: तीन मशीनों से हुई सफाई
अभियान के दूसरे दिन नदी के विभिन्न क्षेत्रों में तीन मशीनों — दो जेसीबी और एक पोकलेन — की सहायता से सफाई एवं डी-सिल्टिंग का कार्य किया गया। नगर परिषद ने दो जेसीबी उपलब्ध कराए, जबकि दो नगर प्रबंधक और स्वच्छता पर्यवेक्षक भी मौके पर सक्रिय रहे।
इस दिन का अभियान शिवालया कंस्ट्रक्शन कंपनी, नगर परिषद तथा 'सिग्नेचर वाटर' के प्रोपराइटर कुंदन यादव सहित अन्य सामाजिक सहयोगकर्ताओं के संयुक्त प्रयास से संचालित हुआ। मशीनों के लिए डीजल का खर्च व्यवसायी कुंदन यादव ने वहन किया।
'आपन सरस्वतिया' — नाम के पीछे की भावना
जिला प्रशासन के अनुसार, इस अभियान को 'आपन सरस्वतिया' नाम देने के पीछे मूल उद्देश्य यह है कि गढ़वा शहर का प्रत्येक नागरिक इस नदी को अपनी धरोहर समझे और इसे बचाए रखना अपनी सामूहिक जिम्मेदारी माने। यह केवल प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि एक सामाजिक-प्रशासनिक साझेदारी है।
जनसहयोग की अपील और आगे की योजना
अधिकारियों ने शहर के अन्य समाजसेवी संगठनों और सक्षम नागरिकों से अभियान में भागीदारी की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन अलग-अलग प्रायोजकों को आगे आना चाहिए — जो एक दिन के लिए जेसीबी उपलब्ध करा सकें, मशीन का डीजल खर्च उठा सकें, या अन्य संसाधन दे सकें, वे स्वैच्छिक रूप से जुड़ सकते हैं। बताया गया है कि कई लोग स्वतः प्रेरित होकर पहले से इस मुहिम से जुड़ रहे हैं।
कचरा डालने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई
एसडीएम संजय कुमार ने स्पष्ट किया कि सरस्वतिया नदी में जानबूझकर कचरा, मिट्टी या बिल्डिंग मटेरियल डालने वालों पर न केवल दंड लगाया जाएगा, बल्कि उस कचरे को हटवाने का खर्च भी संबंधित व्यक्तियों से ही वसूला जाएगा। इसके साथ ही नगर परिषद को नदी के किनारे जगह-जगह चेतावनी बोर्ड लगाने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक सरस्वतिया नदी की पूर्ण सफाई नहीं हो जाती — बशर्ते जनसहयोग इसी तरह मिलता रहे।