4 अगस्त 2026
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झारखंड राज्यसभा चुनाव: सीपीआई(एमएल) का पलटवार — 'कांग्रेस पहले अपने विधायक संभाले'

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झारखंड राज्यसभा चुनाव: सीपीआई(एमएल) का पलटवार — 'कांग्रेस पहले अपने विधायक संभाले'

सारांश

झारखंड राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद इंडिया गठबंधन में खुला टकराव सामने आया। सीपीआई(एमएल) ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि पहले अपने घर की सफाई करो — यह विवाद 2026-27 विधानसभा चुनावों से पहले गठबंधन की एकता के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

मुख्य बातें

सीपीआई(एमएल) लिबरेशन ने 18 जून को एक्स पोस्ट के जरिए कांग्रेस पर पलटवार किया।
पार्टी का दावा है कि उसके विधायकों ने कांग्रेस उम्मीदवार को ईमानदारी से वोट दिया था।
क्रॉस वोटिंग के लिए कांग्रेस ने सहयोगी दलों पर आरोप लगाए थे, जिसे सीपीआई(एमएल) ने खारिज किया।
सीपीआई(एमएल) ने चेतावनी दी कि इस विवाद से पूरे इंडिया ब्लॉक की छवि को नुकसान पहुंच रहा है।
यह तनाव झारखंड में 2026-27 के विधानसभा चुनावों से पहले गठबंधन की एकता के लिए गंभीर चुनौती है।

झारखंड में हाल ही में संपन्न राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने इंडिया गठबंधन के भीतर गहरी दरार उजागर कर दी है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन ने 18 जून को कांग्रेस पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि वह अपने ही विधायकों को एकजुट रखने में नाकाम रही, और अब बिना वजह सहयोगी दलों पर दोष मढ़ा जा रहा है। पार्टी ने स्पष्ट किया कि उसके विधायकों ने कांग्रेस उम्मीदवार को ईमानदारी से वोट दिया था।

क्या है पूरा विवाद

झारखंड राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग की खबरें सामने आने के बाद कांग्रेस ने अपने सहयोगी दलों — जिनमें सीपीआई(एमएल) लिबरेशन भी शामिल है — पर आरोप लगाए थे। इसके जवाब में सीपीआई(एमएल) ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक तीखी पोस्ट जारी की।

पार्टी ने लिखा, 'झारखंड राज्यसभा वोटिंग के नतीजों से यह साफ हो गया है कि कांग्रेस अपने ही सभी विधायकों का समर्थन हासिल करने में नाकाम रही। दूसरों पर उंगली उठाने से पहले, बड़ी पार्टियों को पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए।'

सीपीआई(एमएल) की मुख्य आपत्तियाँ

पार्टी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ नेता अपनी पार्टी या नेतृत्व को बचाने के लिए सीपीआई(एमएल) और उन विधायकों की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में ईमानदारी से मतदान किया था।

पार्टी ने चेतावनी दी कि यह केवल सीपीआई(एमएल) को बदनाम करने की कोशिश नहीं है, बल्कि इससे पूरे 'इंडिया' ब्लॉक की साख पर बट्टा लग रहा है। उसने कहा, 'यह एक ऐसी कोशिश है जिससे पूरे इंडिया ब्लॉक की छवि को नुकसान पहुंचता है।'

गठबंधन की एकता पर सवाल

गौरतलब है कि झारखंड में 2026-27 के विधानसभा चुनावों से पहले यह आंतरिक कलह इंडिया गठबंधन के लिए गंभीर संकेत है। सीपीआई(एमएल) लिबरेशन का राज्य के आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत जनाधार है, और गठबंधन के लिए उसका समर्थन रणनीतिक रूप से अहम माना जाता है।

यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी एकता पहले से ही कई राज्यों में परीक्षण के दौर से गुजर रही है। सीट-बंटवारे और नेतृत्व के सवाल पर इंडिया ब्लॉक के घटक दलों के बीच खींचतान कोई नई बात नहीं है, लेकिन राज्यसभा जैसे महत्वपूर्ण चुनाव में सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप गठबंधन की परिपक्वता पर सवाल खड़े करते हैं।

सीपीआई(एमएल) का रुख

पार्टी ने अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि उसके विधायकों ने अपना दायित्व निभाया। उसके अनुसार, कांग्रेस को पहले यह जाँचना चाहिए कि उसके अपने विधायक क्यों पार्टी लाइन से भटके। आलोचकों का कहना है कि इस विवाद ने झारखंड में गठबंधन की आंतरिक प्रबंधन क्षमता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

आगे की राह में दोनों दलों के बीच संवाद और विश्वास-निर्माण की दरकार होगी, अन्यथा आगामी विधानसभा चुनावों में यह亲दरार और गहरी हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दोनों ही नेतृत्व की कमज़ोरी के संकेत हैं। सीपीआई(एमएल) का आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में मज़बूत आधार है — उसे नाराज़ करना झारखंड में विपक्ष के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है वह यह है कि इस विवाद की असली कीमत 2026-27 के विधानसभा चुनावों में सीट-बंटवारे की मेज़ पर चुकानी पड़ सकती है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग का विवाद क्या है?
झारखंड में हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग की खबरें सामने आईं, जिसके बाद कांग्रेस ने अपने सहयोगी दलों पर आरोप लगाए। सीपीआई(एमएल) लिबरेशन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस पहले अपने विधायकों की जवाबदेही तय करे।
सीपीआई(एमएल) लिबरेशन ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
सीपीआई(एमएल) ने कहा कि कांग्रेस अपने ही सभी विधायकों का समर्थन हासिल करने में नाकाम रही और अब दूसरों पर दोष मढ़ रही है। पार्टी ने यह भी कहा कि इस तरह के बयानों से पूरे इंडिया ब्लॉक की साख को नुकसान पहुंच रहा है।
इस विवाद का झारखंड की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
यह विवाद 2026-27 के झारखंड विधानसभा चुनावों से पहले इंडिया गठबंधन की एकता पर सवाल खड़े करता है। सीपीआई(एमएल) का आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में मज़बूत जनाधार है, और उसकी नाराज़गी गठबंधन की चुनावी संभावनाओं को प्रभावित कर सकती है।
क्या सीपीआई(एमएल) के विधायकों ने कांग्रेस उम्मीदवार को वोट दिया था?
सीपीआई(एमएल) लिबरेशन का दावा है कि उसके विधायकों ने कांग्रेस उम्मीदवार को ईमानदारी से वोट दिया था। पार्टी के अनुसार, क्रॉस वोटिंग कांग्रेस के अपने विधायकों की ओर से हुई, न कि उसके विधायकों की ओर से।
इंडिया गठबंधन में यह दरार कितनी गंभीर है?
यह सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप इंडिया गठबंधन के लिए गंभीर संकेत है, खासकर झारखंड जैसे राज्य में जहाँ 2026-27 में विधानसभा चुनाव होने हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, गठबंधन के घटक दलों के बीच इस तरह का खुला टकराव मतदाताओं में अविश्वास पैदा कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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