27 जुलाई 2026
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झारखंड ट्रेजरी घोटाला: BJP का आरोप — CID बचा रही हेमंत सरकार के चहेते अफसरों को, ₹10,000 करोड़ का हिसाब नहीं

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झारखंड ट्रेजरी घोटाला: BJP का आरोप — CID बचा रही हेमंत सरकार के चहेते अफसरों को, ₹10,000 करोड़ का हिसाब नहीं

सारांश

झारखंड में कथित ट्रेजरी घोटाले की CID जांच पर BJP ने सीधा हमला बोला है — ₹10,000 करोड़ का हिसाब नहीं, प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल के 87 दस्तावेज़ों की मांग ढाई महीने बाद भी अधूरी, और SIT में वही अफसर जो आरोपी जिलों में तैनात रहे। हेमंत सोरेन सरकार की चुप्पी सवाल और गहरे कर रही है।

मुख्य बातें

BJP प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने 27 जुलाई 2026 को रांची में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हेमंत सोरेन सरकार पर ट्रेजरी घोटाले में चहेते अफसरों को बचाने का आरोप लगाया।
राज्य के वित्त मंत्री खुद मान चुके हैं कि ₹10,000 करोड़ के सरकारी धन का हिसाब नहीं मिल रहा।
प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल ने 11 मई 2026 को 87 प्रकार के दस्तावेज मांगे थे, ढाई महीने बाद भी नहीं मिले।
BJP का आरोप — SIT में ऐसे अधिकारी शामिल, जो आरोपी जिलों में SP रह चुके हैं; DDO और ट्रेजरी अधिकारियों को बिना कारण क्लीनचिट।
चाईबासा ट्रेजरी घोटाले में भी सीआईडी पर वरिष्ठ अधिकारियों को बचाने का आरोप।
उत्पाद सचिव नेतृत्व वाली SIT ने अभी तक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की।

झारखंड के कथित ट्रेजरी घोटाले की सीआईडी जांच पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सोमवार, 27 जुलाई 2026 को गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का आरोप है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार झारखंड कोषागार संहिता, 2016 और वित्तीय नियमों की अनदेखी करते हुए अपने चहेते वरिष्ठ अधिकारियों को जांच के दायरे से बाहर रख रही है।

मुख्य आरोप: CID बनी 'एजेंसी ऑफ चॉइस'

BJP प्रदेश इकाई के मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने रांची में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सीआईडी इस मामले में निष्पक्ष जांच एजेंसी की भूमिका निभाने के बजाय सरकार की 'एजेंसी ऑफ चॉइस' बन गई है। उन्होंने कहा कि राज्य के वित्त मंत्री स्वयं स्वीकार कर चुके हैं कि पिछले कुछ वर्षों में ₹10,000 करोड़ के सरकारी धन का हिसाब नहीं मिल रहा — फिर भी जांच में बड़े अधिकारियों को क्लीनचिट दी जा रही है और केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई हो रही है।

SIT की संरचना पर उठाए सवाल

शाहदेव ने आरोप लगाया कि ट्रेजरी घोटाले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) में ऐसे अधिकारियों को शामिल किया गया जो उन जिलों में पुलिस अधीक्षक रह चुके हैं, जहां कथित घोटाले से संबंधित चार्जशीट पहले ही दाखिल की जा चुकी है। उनके अनुसार, ऐसे अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की उम्मीद करना बेमानी है।

उन्होंने चारा घोटाले का उदाहरण देते हुए कहा कि उस मामले में सीबीआई अदालत ने ट्रेजरी अधिकारियों को भी दोषी ठहराया था, जिसे बाद में उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा था। उनका सवाल है कि वर्तमान मामले में सीआईडी ने आरोपपत्र दाखिल करते समय DDO और ट्रेजरी अधिकारियों को क्लीनचिट क्यों दी, जबकि झारखंड वित्त नियमावली और झारखंड कोषागार संहिता में सरकारी धन की निकासी के संबंध में उनकी स्पष्ट जिम्मेदारी निर्धारित है।

दस्तावेज़ न देने का आरोप

BJP प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने विशेष ऑडिट के लिए आवश्यक दस्तावेज़ भी समय पर उपलब्ध नहीं कराए। उनके अनुसार, प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल ने 11 मई 2026 को गृह विभाग की अपर मुख्य सचिव से 87 प्रकार के दस्तावेज मांगे थे, लेकिन ढाई महीने बीत जाने के बाद भी सरकार ने उन्हें उपलब्ध नहीं कराया है।

यह ऐसे समय में आया है जब उत्पाद सचिव के नेतृत्व में गठित SIT ने भी अब तक अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है। गौरतलब है कि चाईबासा ट्रेजरी घोटाले में भी सीआईडी पर केवल निचले स्तर के कर्मचारियों को आरोपी बनाने और वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की अनदेखी करने का आरोप लग चुका है।

वित्तीय नियमों की अनदेखी का दावा

शाहदेव ने स्पष्ट किया कि झारखंड वित्त नियमावली की विभिन्न धाराओं और झारखंड कोषागार संहिता, 2016 के प्रावधानों के तहत DDO और ट्रेजरी अधिकारियों का दायित्व है कि वे बिल, दस्तावेजों और हस्ताक्षरों की वैधता की जांच करें तथा किसी भी संदेह की स्थिति में भुगतान रोककर जांच करें। BJP का कहना है कि इन कानूनी प्रावधानों के बावजूद सीआईडी ने संबंधित अधिकारियों को जांच के दायरे से बाहर रखा।

आगे क्या होगा

BJP ने मांग की है कि इस मामले की जांच किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष एजेंसी को सौंपी जाए। आलोचकों का कहना है कि जब तक प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल को मांगे गए दस्तावेज़ नहीं मिलते और SIT अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपती, तब तक घोटाले की वास्तविक सीमा का आकलन संभव नहीं होगा। हेमंत सोरेन सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जांच एजेंसी की संरचना और दायरे पर सवाल उठते हैं। SIT में उन्हीं जिलों के पूर्व SP को शामिल करना, जहां चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, प्रक्रियागत रूप से संदिग्ध है — चाहे इरादा कुछ भी हो। असली कसौटी यह है कि प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल के मांगे 87 दस्तावेज़ कब और किस रूप में सामने आते हैं — यही तय करेगा कि जांच ऊपर तक पहुंचती है या निचले स्तर पर ही खत्म होती है। हेमंत सोरेन सरकार की चुप्पी इस मामले में उसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी बनती जा रही है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड ट्रेजरी घोटाला क्या है?
झारखंड ट्रेजरी घोटाला राज्य के सरकारी कोषागारों से कथित अनियमित धन निकासी का मामला है, जिसमें राज्य के वित्त मंत्री के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में ₹10,000 करोड़ के सरकारी धन का हिसाब नहीं मिल रहा। इस मामले की जांच सीआईडी और एक SIT कर रही है।
BJP ने CID जांच पर क्या आरोप लगाए हैं?
BJP प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव का आरोप है कि CID निष्पक्ष जांच के बजाय हेमंत सोरेन सरकार के चहेते वरिष्ठ अधिकारियों को बचाने का काम कर रही है। उनका कहना है कि DDO और ट्रेजरी अधिकारियों को बिना उचित कारण क्लीनचिट दी गई, जबकि झारखंड कोषागार संहिता, 2016 में उनकी जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय है।
SIT की संरचना पर क्या सवाल उठाए गए हैं?
BJP का कहना है कि ट्रेजरी घोटाले की SIT में ऐसे अधिकारियों को शामिल किया गया जो उन जिलों में पुलिस अधीक्षक रह चुके हैं, जहां घोटाले से संबंधित चार्जशीट पहले ही दाखिल हो चुकी है। ऐसे में उनसे निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती।
प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल ने कौन से दस्तावेज़ मांगे थे?
प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल ने 11 मई 2026 को गृह विभाग की अपर मुख्य सचिव से 87 प्रकार के दस्तावेज़ मांगे थे, जो विशेष ऑडिट के लिए आवश्यक थे। BJP के अनुसार ढाई महीने बाद भी राज्य सरकार ने ये दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं कराए हैं।
चारा घोटाले से इस मामले की तुलना क्यों की जा रही है?
BJP ने चारा घोटाले का उदाहरण इसलिए दिया क्योंकि उस मामले में सीबीआई अदालत ने ट्रेजरी अधिकारियों को भी दोषी ठहराया था, जिसे उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा था। BJP का तर्क है कि वर्तमान मामले में भी ट्रेजरी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, लेकिन सीआईडी ने उन्हें जांच से बाहर रखा है।
राष्ट्र प्रेस
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