झारखंड ट्रेजरी घोटाला: BJP का आरोप — CID बचा रही हेमंत सरकार के चहेते अफसरों को, ₹10,000 करोड़ का हिसाब नहीं
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के कथित ट्रेजरी घोटाले की सीआईडी जांच पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सोमवार, 27 जुलाई 2026 को गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का आरोप है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार झारखंड कोषागार संहिता, 2016 और वित्तीय नियमों की अनदेखी करते हुए अपने चहेते वरिष्ठ अधिकारियों को जांच के दायरे से बाहर रख रही है।
मुख्य आरोप: CID बनी 'एजेंसी ऑफ चॉइस'
BJP प्रदेश इकाई के मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने रांची में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सीआईडी इस मामले में निष्पक्ष जांच एजेंसी की भूमिका निभाने के बजाय सरकार की 'एजेंसी ऑफ चॉइस' बन गई है। उन्होंने कहा कि राज्य के वित्त मंत्री स्वयं स्वीकार कर चुके हैं कि पिछले कुछ वर्षों में ₹10,000 करोड़ के सरकारी धन का हिसाब नहीं मिल रहा — फिर भी जांच में बड़े अधिकारियों को क्लीनचिट दी जा रही है और केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई हो रही है।
SIT की संरचना पर उठाए सवाल
शाहदेव ने आरोप लगाया कि ट्रेजरी घोटाले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) में ऐसे अधिकारियों को शामिल किया गया जो उन जिलों में पुलिस अधीक्षक रह चुके हैं, जहां कथित घोटाले से संबंधित चार्जशीट पहले ही दाखिल की जा चुकी है। उनके अनुसार, ऐसे अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की उम्मीद करना बेमानी है।
उन्होंने चारा घोटाले का उदाहरण देते हुए कहा कि उस मामले में सीबीआई अदालत ने ट्रेजरी अधिकारियों को भी दोषी ठहराया था, जिसे बाद में उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा था। उनका सवाल है कि वर्तमान मामले में सीआईडी ने आरोपपत्र दाखिल करते समय DDO और ट्रेजरी अधिकारियों को क्लीनचिट क्यों दी, जबकि झारखंड वित्त नियमावली और झारखंड कोषागार संहिता में सरकारी धन की निकासी के संबंध में उनकी स्पष्ट जिम्मेदारी निर्धारित है।
दस्तावेज़ न देने का आरोप
BJP प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने विशेष ऑडिट के लिए आवश्यक दस्तावेज़ भी समय पर उपलब्ध नहीं कराए। उनके अनुसार, प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल ने 11 मई 2026 को गृह विभाग की अपर मुख्य सचिव से 87 प्रकार के दस्तावेज मांगे थे, लेकिन ढाई महीने बीत जाने के बाद भी सरकार ने उन्हें उपलब्ध नहीं कराया है।
यह ऐसे समय में आया है जब उत्पाद सचिव के नेतृत्व में गठित SIT ने भी अब तक अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है। गौरतलब है कि चाईबासा ट्रेजरी घोटाले में भी सीआईडी पर केवल निचले स्तर के कर्मचारियों को आरोपी बनाने और वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की अनदेखी करने का आरोप लग चुका है।
वित्तीय नियमों की अनदेखी का दावा
शाहदेव ने स्पष्ट किया कि झारखंड वित्त नियमावली की विभिन्न धाराओं और झारखंड कोषागार संहिता, 2016 के प्रावधानों के तहत DDO और ट्रेजरी अधिकारियों का दायित्व है कि वे बिल, दस्तावेजों और हस्ताक्षरों की वैधता की जांच करें तथा किसी भी संदेह की स्थिति में भुगतान रोककर जांच करें। BJP का कहना है कि इन कानूनी प्रावधानों के बावजूद सीआईडी ने संबंधित अधिकारियों को जांच के दायरे से बाहर रखा।
आगे क्या होगा
BJP ने मांग की है कि इस मामले की जांच किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष एजेंसी को सौंपी जाए। आलोचकों का कहना है कि जब तक प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल को मांगे गए दस्तावेज़ नहीं मिलते और SIT अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपती, तब तक घोटाले की वास्तविक सीमा का आकलन संभव नहीं होगा। हेमंत सोरेन सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।