झारखंड में गेतलसूद डैम पर बना पहला फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट, उत्पादन एक महीने में शुरू होगा

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झारखंड में गेतलसूद डैम पर बना पहला फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट, उत्पादन एक महीने में शुरू होगा

सारांश

रांची के गेतलसूद डैम पर स्थापित हो रहे पहले फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट से एक लाख घरों को निरंतर बिजली मिल सकेगी। यह प्लांट अगले महीने से उत्पादन शुरू करने की संभावना है।

मुख्य बातें

राज्य का पहला फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट 100 मेगावाट क्षमता 800 करोड़ रुपये की लागत स्थानीय रोजगार के अवसर स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन

रांची, 24 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड में पहले फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट का निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण में है। गेतलसूद डैम में स्थापित होने जा रहा यह 100 मेगावाट क्षमता का प्लांट मार्च से अप्रैल के बीच बिजली उत्पादन शुरू करने की संभावना रखता है।

परियोजना के सफल होने पर, शहर के लगभग एक लाख घरों को निरंतर बिजली आपूर्ति मिलने की उम्मीद है। इस प्रोजेक्ट की लागत लगभग 800 करोड़ रुपए है और इसका निर्माण जेबीवीएनएल तथा सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सेकी) के सहयोग से किया जा रहा है। यह प्लांट 172 हेक्टेयर क्षेत्र में स्थापित किया जाएगा और राज्य का पहला बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट होगा।

केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री और रांची के सांसद संजय सेठ ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात की और परियोजना की प्रगति की जानकारी दी। केंद्रीय मंत्री ने इस परियोजना के लोकार्पण पर सहमति जताई।

इस प्लांट से हर साल लगभग 60 करोड़ रुपये मूल्य की बिजली का उत्पादन होगा, जिसे हटिया और नामकुम ग्रिड को आपूर्ति की जाएगी। जेबीवीएनएल इस बिजली को उपभोक्ताओं तक पहुंचाएगा।

अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना से उत्पादित बिजली की लागत कम होगी, जिससे सस्ती और निरंतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इस परियोजना की विशेषता यह है कि सोलर पैनल डैम के पानी की सतह पर तैरते रहेंगे, जिससे वाष्पीकरण कम होगा और जल संरक्षण में मदद मिलेगी।

अलबत्ता, पानी की ठंडक के कारण पैनलों की कार्यक्षमता जमीन पर लगे सोलर पैनलों की तुलना में बेहतर होगी। यह प्लांट स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन करेगा, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और भूमि उपयोग की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

राज्य सरकार की सोलर ऊर्जा नीति के तहत अगले पांच वर्षों में झारखंड के तीन दर्जन से अधिक डैम और जलाशयों पर फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट लगाने का लक्ष्य है। इसके अंतर्गत चांडिल डैम में 600 मेगावाट और तेनुघाट डैम में 400 मेगावाट क्षमता के फ्लोटिंग सोलर प्लांट स्थापित करने की योजना है।

चांडिल परियोजना का सर्वे कार्य पूर्ण हो चुका है, और दोनों परियोजनाएं पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर विकसित की जाएंगी। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से न केवल बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और मछुआरों के हितों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो न केवल ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भरता लाएगी, बल्कि स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ाएगी।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट क्या है?
यह एक ऐसा सोलर पैनल है जो पानी की सतह पर तैरता है, जिससे वाष्पीकरण कम होता है और जल संरक्षण में मदद मिलती है।
इस प्लांट से कितनी बिजली का उत्पादन होगा?
इस प्लांट से हर साल लगभग 60 करोड़ रुपये मूल्य की बिजली का उत्पादन होगा।
यह प्लांट कब चालू होगा?
यह प्लांट संभवतः मार्च से अप्रैल के बीच चालू होगा।
इस परियोजना की लागत कितनी है?
इस परियोजना की लागत लगभग 800 करोड़ रुपये है।
इस प्लांट का लाभ किसे मिलेगा?
इस प्लांट से रांची शहर के लगभग एक लाख घरों को निरंतर बिजली आपूर्ति मिलेगी।
राष्ट्र प्रेस