पुलवामा में भाजपा किसान मोर्चा नेता एजाज अहमद शाह पर धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी का मुकदमा दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में पुलिस ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) किसान मोर्चा के नेता एजाज अहमद शाह के विरुद्ध धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी का मामला दर्ज किया है। अधिकारियों ने बुधवार, 19 अगस्त 2026 को यह जानकारी दी। शाह पर आरोप है कि उन्होंने एक पुलिस मामले में मदद दिलाने का झूठा वादा करके शिकायतकर्ता से रकम ऐंठी।
मुख्य घटनाक्रम
त्राल पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी) और धारा 506 (आपराधिक धमकी) के तहत यह मुकदमा दर्ज किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, कथित अपराध 2022 में हुआ था, इसलिए वर्तमान में लागू भारतीय न्याय संहिता (BNS) के बजाय उस समय प्रभावी IPC के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया — क्योंकि BNS जुलाई 2024 में लागू हुई थी।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि एजाज अहमद शाह ने पुलिस से सहायता दिलाने का बहाना बनाकर उनसे धनराशि ली, लेकिन वादे के अनुसार कोई मदद नहीं मिली।
आरोपी की पृष्ठभूमि
एजाज अहमद शाह को नवंबर 2025 में पुलवामा भाजपा किसान मोर्चा का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। अधिकारियों के अनुसार, 2016 से अब तक जिले के कम से कम चार पुलिस थानों में उनके विरुद्ध इसी प्रकृति के आठ मामले दर्ज हो चुके हैं। यह इस वर्ष उनके खिलाफ तीसरा मुकदमा है।
भाजपा पुलवामा में बढ़ते मामले
गौरतलब है कि इससे पूर्व 11 अगस्त 2026 को भाजपा के पुलवामा जिला अध्यक्ष शौकत गयूर के विरुद्ध कथित जबरन वसूली और धमकी के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसके बाद भाजपा ने गयूर को पार्टी की अनुशासनात्मक प्रक्रिया पूरी होने तक सभी पदों से निलंबित कर दिया।
व्यापक प्रवृत्ति
यह ऐसे समय में आया है जब पुलिस ने विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े कई नेताओं और कार्यकर्ताओं पर जबरन वसूली व धोखाधड़ी के मामले दर्ज किए हैं। इन मामलों में आरोपियों ने सरकारी नौकरी दिलाने अथवा पुलिस व स्थानीय प्रशासन से मदद का झूठा वादा कर पैसे वसूले। कई मामलों में आरोप है कि इन कार्यकर्ताओं ने उन युवाओं के परिजनों से धन ऐंठा, जिन्हें सुरक्षा बलों ने आतंकवाद से जुड़े मामलों में पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था।
आगे क्या
पुलिस मामले की जाँच जारी है। एजाज अहमद शाह के विरुद्ध दर्ज मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि भाजपा पार्टी स्तर पर क्या अनुशासनात्मक कदम उठाती है, जैसा कि शौकत गयूर के मामले में किया गया था।