अजरबैजान सीमा पर फंसे जम्मू-कश्मीर के छात्रों के परिवारों की सरकार से मदद की अपील
सारांश
Key Takeaways
- 200+ छात्र अजरबैजान सीमा पर फंसे हैं।
- परिवारों की चिंता और सरकार से मदद की अपील।
- छात्र गंभीर आर्थिक और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
- छात्रों को यात्रा की व्यवस्था स्वयं करनी पड़ रही है।
- रोजाना केवल 6-10 छात्रों को ही एग्जिट कोड मिल रहा है।
श्रीनगर, 22 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। जम्मू-कश्मीर के 200 से अधिक छात्र अजरबैजान सीमा पर फंसे हुए हैं, जिसके कारण उनके परिवार बेहद चिंतित हैं और केंद्र सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की अपील कर रहे हैं। परिजनों का कहना है कि उनके बच्चे गंभीर आर्थिक और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं और सरकार को उन्हें सुरक्षित भारत लाने के लिए जल्द कदम उठाने चाहिए।
परिजनों के अनुसार, ये छात्र ईरान के इस्फहान और गोलिस्तान प्रांतों में अध्ययन कर रहे थे। वर्तमान परिस्थितियों में, ये छात्र ईरान-आर्मेनिया सीमा पार कर चुके हैं, जो उनकी वापसी की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम है।
हालांकि, परिजनों का आरोप है कि छात्रों को अपनी यात्रा की पूरी व्यवस्था स्वयं करनी पड़ रही है, जिससे पहले से ही परेशान परिवारों पर बड़ा आर्थिक बोझ पड़ रहा है। एक अभिभावक ने कहा, "हम सभी खर्च खुद उठा रहे हैं। ऐसे समय में सरकार को कम से कम उनके लौटने की व्यवस्था करनी चाहिए।"
जानकारी के अनुसार, 20 से 25 मार्च के बीच कई बैच में छात्रों की वापसी की उम्मीद थी, जिनमें शिराज यूनिवर्सिटी के छात्र भी शामिल हैं। वहीं, केर्मन से भारतीय इंजीनियरिंग छात्र भी ईरान-आर्मेनिया सीमा तक पहुँच चुके हैं और वीजा क्लीयरेंस का इंतज़ार कर रहे हैं।
सबसे गंभीर स्थिति अजरबैजान सीमा पर बनी हुई है, जहां 100 से अधिक भारतीय छात्र प्रक्रिया में देरी के कारण फंसे हुए हैं। परिजनों के अनुसार, रोजाना केवल 6 से 10 छात्रों को ही एग्जिट कोड मिल रहा है, जिससे पूरी प्रक्रिया बेहद धीमी हो गई है।
कई छात्र 12 मार्च से ही सीमा पर फंसे हैं, जिसके कारण उनकी फ्लाइट्स छूट गईं और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। परिजनों का दावा है कि करीब 250 कश्मीरी छात्र अभी भी अजरबैजान सीमा पर फंसे हुए हैं, जिनमें से कई को सीने में संक्रमण और फ्लू जैसे लक्षण हो रहे हैं, जबकि वहाँ पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।
पिछले 24 घंटों में 151 भारतीय छात्र ईरान-अजरबैजान सीमा पार करने में सफल रहे हैं। 14, 18, 19 और 20 मार्च की फ्लाइट बुकिंग वाले कुछ छात्रों को जाने की अनुमति मिल गई है, लेकिन 15, 16 और 17 मार्च की बुकिंग वाले छात्र अब भी फंसे हुए हैं।
हालांकि कुछ प्रगति हुई है लेकिन स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है। सैकड़ों छात्र अलग-अलग सीमाओं पर फंसे हैं और आर्थिक, स्वास्थ्य और अनिश्चितता के संकट से जूझ रहे हैं। इस बीच, परिजन सरकार से लगातार अपील कर रहे हैं कि उनके बच्चों को सुरक्षित घर वापस लाने के लिए जल्द और प्रभावी कदम उठाए जाएं।
बताया जा रहा है कि 28 फरवरी को मौजूदा संघर्ष शुरू होने के समय ईरान में 1,200 से अधिक कश्मीरी छात्र पढ़ाई कर रहे थे। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह ईरानी अधिकारियों के संपर्क में है, ताकि सभी भारतीय छात्रों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जा सके।