अर्मेनिया और अजरबैजान पहुंचे 600+ भारतीय नागरिक, सरकार की सहायता जारी
सारांश
Key Takeaways
- भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए सक्रिय है।
- 650 नागरिकों ने ईरान की सीमा पार की है।
- सरकार की प्राथमिकता नागरिकों की मदद करना है।
- किसी गंभीर चोट की सूचना नहीं है।
- 44 हजार लोग भारत लौट चुके हैं।
नई दिल्ली, 17 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत सरकार अपने समुद्री जहाजों को सुरक्षित तरीके से होर्मुज जलडमरूमध्य से निकालने और वहां फंसे भारतीय नागरिकों को सहायता प्रदान करने में जुटी हुई है। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने मंगलवार को आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग में जानकारी दी कि संकटग्रस्त मध्य पूर्व के क्षेत्रों में फंसे भारतीयों को बाहर निकालने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। मंत्रालय ने कहा कि स्थिति पर 24/7 निगरानी रखी जा रही है।
शिपिंग, पेट्रोलियम, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और एमईए द्वारा आयोजित इस संयुक्त प्रेस ब्रीफिंग में सरकार के प्रयासों की जानकारी दी गई।
इस अवसर पर, शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि भारत सरकार ईरान सहित अन्य देशों के साथ निरंतर संपर्क में है, और हमारा उद्देश्य भारतीय जहाजों का सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना है।
वहीं, एमईए प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सोमवार को छात्रों सहित 650 भारतीय नागरिकों ने ईरान की सीमा पार की और वे अर्मेनिया और अजरबैजान पहुंचे। 284 जायरीनों ने भी अर्मेनिया की सीमा पार की है, जिनमें से 130 स्वदेश लौट रहे हैं। इस पूरे क्षेत्र में निवास करने वाले भारतीयों की सुरक्षा, कल्याण और संरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि मंत्रालय का विशेष कंट्रोल रूम लगातार काम कर रहा है, जो भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों की मदद के लिए उपलब्ध है। इसके साथ ही राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वय बनाए रखा जा रहा है।
इसके अलावा, विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (खाड़ी क्षेत्र) असीम आर. महाजन ने बताया कि ओमान के सोहर शहर में हुए एक हमले में मारे गए दो भारतीयों के शव मंगलवार को जयपुर में उनके परिवारों को सौंप दिए गए हैं। सरकार ने मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है।
मंत्रालय के अनुसार, घायलों की स्थिति पर भी ध्यान रखा जा रहा है और किसी भी भारतीय के गंभीर रूप से घायल होने की खबर नहीं है। अब तक मध्य पूर्व से लगभग 44 हजार लोग भारत लौट चुके हैं।