जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक गलियारों पर UT-स्तरीय कार्यशाला, DPIIT के राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन की तैयारी
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग ने 8 जून 2026 को जम्मू के कन्वेंशन सेंटर में 'औद्योगिक गलियारे और प्लग एंड प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर: वैश्विक विनिर्माण के लिए राज्य की तैयारी' विषय पर केंद्र शासित प्रदेश स्तरीय आंतरिक परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया। यह कार्यशाला वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा जुलाई 2026 में प्रस्तावित राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन की तैयारी के लिए आयोजित संरचित परामर्श श्रृंखला का हिस्सा है।
कार्यशाला की पृष्ठभूमि
यह परामर्श अभ्यास मुख्य सचिवों के 5वें राष्ट्रीय सम्मेलन से उभरे व्यापक केंद्र-राज्य परामर्श ढाँचे का अंग है। इसका मुख्य उद्देश्य औद्योगिक अवसंरचना विकास, रसद एकीकरण, निवेश सुविधा, कौशल विकास और वैश्विक विनिर्माण मूल्य श्रृंखलाओं के साथ एकीकरण के लिए नीतिगत सुधारों में समन्वित प्रयास सुनिश्चित करना है। गौरतलब है कि यह कार्यशाला ऐसे समय में हुई है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में चीन के विकल्प के रूप में अपनी स्थिति मज़बूत करने की कोशिश कर रहा है।
उद्घाटन और मुख्य वक्तव्य
कार्यशाला का शुभारंभ जम्मू के उद्योग एवं वाणिज्य निदेशक डॉ. अरुण कुमार मनहास के स्वागत भाषण से हुआ। उद्योग एवं वाणिज्य आयुक्त सचिव विक्रमजीत सिंह ने उद्घाटन भाषण में भारत के पक्ष में बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य का लाभ उठाने की आवश्यकता पर बल दिया।
विक्रमजीत सिंह ने इस परामर्श प्रक्रिया को जम्मू-कश्मीर के लिए अपनी औद्योगिक क्षमताओं को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने, बुनियादी ढाँचे की कमियों को चिह्नित करने और क्षेत्र-विशिष्ट चुनौतियों को नीति निर्माताओं के समक्ष रखने का 'मूल्यवान अवसर' बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में विनिर्माण-आधारित विकास की अपार संभावनाएँ हैं और लक्षित निवेश व नीतिगत समर्थन के लिए ऐसे मंचों का प्रभावी उपयोग होना चाहिए।
चर्चा के चार प्रमुख स्तंभ
कार्यशाला में इन्वेस्ट इंडिया की टीम द्वारा संचालित दो विषयगत सत्र हुए, जिनके बाद विस्तृत खुली चर्चा की गई। चर्चाएँ DPIIT द्वारा पहचाने गए चार स्तंभों पर केंद्रित रहीं:
पहला — भूमि एवं औद्योगिक अवसंरचना परिसंपत्तियाँ; दूसरा — कनेक्टिविटी एवं गेटवे अवसंरचना; तीसरा — कौशल एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र; और चौथा — नीति, संस्थाएँ एवं विनियम। इन स्तंभों पर जम्मू-कश्मीर की स्थिति और अपेक्षाओं को दस्तावेज़ीकृत किया गया ताकि उन्हें राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में प्रस्तुत किया जा सके।
आगे की राह
इस कार्यशाला से प्राप्त सिफारिशें और क्षेत्रीय इनपुट DPIIT के जुलाई 2026 के राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन में जम्मू-कश्मीर का पक्ष रखने का आधार बनेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन सुझावों को राष्ट्रीय नीति में समुचित स्थान मिला, तो केंद्र शासित प्रदेश अपनी भौगोलिक स्थिति और उपलब्ध भूमि का लाभ उठाकर औद्योगिक निवेश आकर्षित करने में सक्षम हो सकता है।