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सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों को न्याय दिया, केंद्र सरकार के रवैये पर झामुमो का तीखा हमला

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सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों को न्याय दिया, केंद्र सरकार के रवैये पर झामुमो का तीखा हमला

सारांश

झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडे ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा छात्रों को राहत मिलने पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया — दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को 'बर्बर' बताया, विदेश नीति को 'विफल' करार दिया और राम मंदिर के नए सीईओ को लेकर सवाल खड़े किए।

मुख्य बातें

झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडे ने 2 सितंबर को रांची में केंद्र सरकार पर 'तानाशाही रवैये' का आरोप लगाया।
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रदर्शनकारी छात्रों को राहत को झामुमो ने न्यायपालिका की विश्वसनीयता की जीत बताया।
दिल्ली पुलिस पर आरोप — छात्रों पर 'कील लगी लाठियाँ' भाँजने और एफआईआर दर्ज करने का।
देश की जीडीपी 7.8% के करीब होने के बावजूद विदेशी कर्ज तीन गुना बढ़ने और व्यापारियों के पलायन पर सवाल।
बंगाल में 30 लाख मतदाताओं को वंचित किए जाने पर सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप का स्वागत।
झारखंड में छात्रों पर कोई मुकदमा नहीं; सभी केस 'असामाजिक तत्वों' पर दर्ज — पांडे का स्पष्टीकरण।

झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के प्रवक्ता मनोज पांडे ने बुधवार, 2 सितंबर को रांची में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रदर्शनकारी छात्रों को राहत दिया जाना केंद्र सरकार के 'तानाशाही रवैये' पर करारा जवाब है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की इस भूमिका से उसकी विश्वसनीयता और मजबूत हुई है।

छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और न्यायालय का हस्तक्षेप

पांडे ने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रों के साथ दिल्ली पुलिस ने 'बर्बरतापूर्ण व्यवहार' किया और उन पर 'कील लगी हुई लाठियाँ' भाँजी गईं। उन्होंने कहा, 'इसके बावजूद पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली।' उनके अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने छात्रों को न्याय देकर यह साबित किया कि संस्थागत जवाबदेही अभी जीवित है। उन्होंने न्यायपालिका के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि 'हमें न्याय की उम्मीद थी और छात्रों को न्याय मिला।'

केंद्र सरकार पर राजनीतिक हमला

झामुमो प्रवक्ता ने कहा कि छात्रों के प्रदर्शन से केंद्र सरकार 'डरी हुई' है और इसीलिए वह 'कभी वंदे मातरम, कभी मल्लिकार्जुन खड़गे, तो कभी जीडीपी जैसे मसलों' का उल्लेख कर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। पांडे ने सवाल उठाया कि यदि देश की जीडीपी 7.8 फीसदी के करीब है, तो जनता सरकारी अनाज पर आश्रित क्यों है, विदेशी कर्ज तीन गुना क्यों बढ़ा और व्यापारी पलायन पर क्यों मजबूर हैं।

विदेश नीति और एससीओ शिखर सम्मेलन पर सवाल

पांडे ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भारत के आतंकवाद-विरोधी रुख को लेकर भी प्रधानमंत्री को घेरा। उन्होंने कहा कि चीन ने भारतीय भूमि पर कब्जा किया हुआ है और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों पर उसके दावों पर कोई ठोस बातचीत नहीं हो रही। उनके अनुसार, 'संकट की घड़ी में हमारा कोई मित्र नहीं है, पड़ोसी भी साथ नहीं खड़े होते।' उन्होंने विदेश नीति और रक्षा नीति दोनों को 'पूरी तरह विफल' करार दिया। पाकिस्तान द्वारा SCO बैठक की तस्वीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को क्रॉप किए जाने पर उन्होंने कहा कि इसका जवाब तो पाकिस्तान ही दे सकता है।

राम मंदिर के नए सीईओ और लोकतंत्र पर चिंता

राम मंदिर को मिलने वाले नए सीईओ के संदर्भ में पांडे ने कहा कि 'आखिर नया चंपत राय कौन होगा' — यह बड़ा सवाल है। उन्होंने आरोप लगाया कि 'भगवान राम को भी बदनाम किया गया और उनकी चरणपादुका तक गायब कर दी गई।' उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल में 30 लाख लोगों को मताधिकार से वंचित किया गया था, जिन्हें सर्वोच्च न्यायालय ने बहाल किया — और ये वोट मुख्यतः अल्पसंख्यक व आदिवासी समुदायों के थे।

नेपाल बाढ़ और झारखंड में छात्र मामले

नेपाल में आई बाढ़ की त्रासदी पर पांडे ने कहा कि भारत को बड़े पैमाने पर राहत सामग्री के साथ सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए थी, जो नहीं हुई — और यह भी विदेश नीति की विफलता का प्रमाण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि झारखंड में छात्रों पर कोई मामला दर्ज नहीं किया गया; जो मुकदमे हुए वे 'असामाजिक तत्वों' पर हैं। आगे चलकर न्यायपालिका पर भरोसा बनाए रखना ही विपक्ष की प्राथमिकता रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक विरोधाभास है: वही दल जो संस्थाओं की स्वायत्तता का दावा करते हैं, अदालती फैसलों को चुनिंदा रूप से अपनी जीत बताते हैं। जीडीपी और विदेश नीति पर उठाए गए सवाल वैध हैं, लेकिन बिना आँकड़ों के स्रोत के ये आरोप राजनीतिक बयानबाजी से आगे नहीं जाते। नेपाल बाढ़ राहत पर भारत की निष्क्रियता का मुद्दा वास्तव में गंभीर है और मुख्यधारा की कवरेज में इसे पर्याप्त जगह नहीं मिली।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झामुमो ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर क्या कहा?
झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडे ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने प्रदर्शनकारी छात्रों को न्याय देकर अपनी विश्वसनीयता को मजबूत किया है। उन्होंने इसे केंद्र सरकार के 'तानाशाही रवैये' पर 'करारा तमाचा' बताया।
दिल्ली पुलिस पर क्या आरोप लगाए गए?
मनोज पांडे ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रों पर 'कील लगी हुई लाठियाँ' भाँजीं और बाद में उनके खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कर ली। उन्होंने इसे 'दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया।
झामुमो ने भारत की विदेश नीति पर क्या सवाल उठाए?
पांडे ने SCO शिखर सम्मेलन के संदर्भ में कहा कि चीन द्वारा भारतीय भूमि पर कब्जे और अरुणाचल प्रदेश के मुद्दे पर कोई ठोस बातचीत नहीं हुई। उन्होंने नेपाल बाढ़ में भारत की निष्क्रियता को भी विदेश नीति की विफलता बताया।
झारखंड में छात्रों पर मुकदमे दर्ज हुए या नहीं?
मनोज पांडे ने स्पष्ट किया कि झारखंड में छात्रों पर कोई केस दर्ज नहीं किया गया। जो भी मुकदमे हुए हैं, वे 'असामाजिक तत्वों' के खिलाफ हैं।
बंगाल में मतदाताओं के मताधिकार पर झामुमो का क्या रुख है?
पांडे ने कहा कि बंगाल में 30 लाख लोगों को मताधिकार से वंचित किया गया था, जिन्हें सर्वोच्च न्यायालय ने बहाल किया। उन्होंने कहा कि ये वोट मुख्यतः अल्पसंख्यक और आदिवासी समुदायों के थे और इस तरह 'लोकतंत्र का चीरहरण' हो रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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