नितेश राणे का बयान: 'हिंदू हित की बात करने वाला ही देश पर राज करेगा', पश्चिम बंगाल नतीजों का दिया हवाला
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नितेश राणे ने 4 मई को मुंबई में राष्ट्र प्रेस से बातचीत में पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों का हवाला देते हुए कहा कि जो हिंदू हित की बात करेगा, वही देश पर राज करेगा। उनका यह बयान बंगाल चुनाव परिणामों के संदर्भ में आया, जिसे उन्होंने हिंदू समाज की राजनीतिक जागरूकता की जीत के रूप में व्याख्यायित किया।
सनातन धर्म विरोधियों पर तीखा प्रहार
राणे ने कहा कि इस बात को किसी भी सूरत में खारिज नहीं किया जा सकता कि जिन लोगों ने भी सनातन धर्म को समाप्त करने की बात की, वे आज राजनीतिक रूप से हाशिये पर पहुँच चुके हैं। उनके अनुसार, ऐसे लोगों की विश्वसनीयता राजनीतिक गलियारों में पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और उन्हें पूछने वाला कोई नहीं बचा।
उन्होंने आगे कहा कि जिन लोगों ने हिंदुओं पर अत्याचार किए, उन्हें उनकी पूजा-पद्धति से दूर रखने की कोशिश की और तरह-तरह से प्रताड़ित करने का प्रयास किया, उन्हें पश्चिम बंगाल की जनता ने चुनावी नतीजों के ज़रिए करारा जवाब दिया है।
बंगाल के नतीजों को बताया ऐतिहासिक संदेश
मंत्री राणे ने ज़ोर देकर कहा कि पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि कोई भी हिंदुओं पर बुरी नज़र न डाले। उनके शब्दों में, बंगाल की जनता ने साफ कर दिया है कि किसी भी परिस्थिति में हिंदुओं का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और उन्हें उनकी संस्कृति से दूर नहीं किया जाना चाहिए।
राणे ने चेतावनी के स्वर में कहा कि यदि कोई भी हिंदुओं के हितों के साथ कुठाराघात करेगा, तो राजनीति में उसका अस्तित्व निश्चित रूप से खतरे में आएगा। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजे राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श में केंद्र बने हुए हैं।
मोदी और शाह का किया उल्लेख
राणे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सभी को यह संदेश दिया है कि हिंदू राष्ट्र में हिंदुओं के साथ किसी भी प्रकार का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनके अनुसार, यह नतीजे उसी राजनीतिक दिशा की पुष्टि करते हैं।
आगे की राजनीतिक दिशा
राणे का यह बयान महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें हिंदुत्व को केंद्रीय चुनावी मुद्दा बनाए रखने पर जोर दिया जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम बंगाल के नतीजों की व्याख्या विभिन्न दलों द्वारा अपने-अपने राजनीतिक एजेंडे के अनुसार की जा रही है। आने वाले समय में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि इस बयानबाज़ी का असर महाराष्ट्र की स्थानीय राजनीति पर किस रूप में पड़ता है।