जोशीमठ हेलीकॉप्टर हादसा: कर्नाटक राज्यपाल डॉ. सुधा यादव ने जताया शोक, 6 की मौत पर परिवारों को दिलाया साथ का भरोसा
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक की राज्यपाल डॉ. सुधा यादव ने 31 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड के जोशीमठ के निकट हुए दर्दनाक हेलीकॉप्टर हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया, जिसमें कर्नाटक के पाँच तीर्थयात्रियों और एक पायलट की जान चली गई। राज्यपाल ने पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएँ प्रकट करते हुए उन्हें इस कठिन घड़ी में कर्नाटक की ओर से पूरी सहायता का आश्वासन दिया।
राज्यपाल का शोक संदेश
डॉ. सुधा यादव ने कहा, 'जोशीमठ के पास हुए इस दुखद हेलीकॉप्टर हादसे से मुझे गहरा आघात लगा है, जिसमें छह लोगों की जान चली गई। इस हादसे में हुई जान-माल की हानि अत्यंत पीड़ादायक है।' उन्होंने हादसे में जान गँवाने वाले सीसीबी इंस्पेक्टर अरुण सालंके, प्रताप बी. निंगराजू, कैप्टन हिमांशु सभरवाल, एचएस नटराजू, सुधीर के. और शंकरगौड़ा वीबी की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
राज्यपाल ने यह भी कहा कि 'अपनों का अचानक बिछड़ जाना एक ऐसी त्रासदी है, जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती, और इतने गहरे दुख के समय में शब्द भी सांत्वना देने के लिए नाकाफी हैं।' उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं को शांति और शोकाकुल परिवारों को यह भारी दुख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की।
हादसे का विवरण
ट्रांसभारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड का हेलीकॉप्टर 30 अक्टूबर को दोपहर 1 बजकर 14 मिनट पर बद्रीनाथ हेलीपैड से उड़ान भरकर देहरादून के सहस्त्रधारा हेलीपैड की ओर जा रहा था। उड़ान के दौरान यह जोशीमठ के निकट चाई गाँव के पास वन क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हेलीकॉप्टर में एक पायलट सहित कुल छह लोग सवार थे।
दुर्घटनास्थल पर मलबा मिलने के बाद खोज एवं बचाव अभियान चलाया गया। गौरतलब है कि बद्रीनाथ क्षेत्र में तीर्थयात्रियों के लिए हेलीकॉप्टर सेवा एक महत्वपूर्ण यातायात माध्यम है, और यह हादसा उस क्षेत्र की विमानन सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जाँच और सरकारी कार्रवाई
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 30 अक्टूबर को बताया कि हादसे की प्रारंभिक एवं नियामकीय जाँच के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की एक टीम देहरादून भेजी गई है। इससे पहले, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस हादसे की जाँच के आदेश दे दिए थे।
यह ऐसे समय में आया है जब पहाड़ी क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर हादसों की पुनरावृत्ति पर विशेषज्ञ चिंता जता चुके हैं। DGCA की जाँच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि हादसे की तकनीकी अथवा मौसम-सम्बन्धी वजह क्या थी।
पार्थिव शरीरों की वापसी और परिवारों को सहायता
राज्यपाल कार्यालय संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है, ताकि पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता और सहयोग मिल सके। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि दिवंगत तीर्थयात्रियों के पार्थिव शरीर सम्मानपूर्वक कर्नाटक वापस लाए जाएँ।
डॉ. यादव ने स्पष्ट किया कि 'इस कठिन समय में कर्नाटक के लोग पीड़ित परिवारों के साथ एकजुट होकर खड़े हैं।' राज्यपाल के इस आश्वासन से प्रभावित परिवारों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
आगे क्या
DGCA की जाँच रिपोर्ट आने के बाद हेलीकॉप्टर सेवा संचालकों की जवाबदेही तय होने और सुरक्षा मानकों में संशोधन की माँग तेज़ होने की संभावना है। पीड़ित परिवारों को राज्य सरकार की ओर से मुआवजे और सहायता की प्रक्रिया भी शुरू होने की प्रतीक्षा है।