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जेपी नड्डा का भोपाल पदयात्रा में विपक्ष पर हमला: 'ईवीएम छोड़ें, आत्मचिंतन करें'

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जेपी नड्डा का भोपाल पदयात्रा में विपक्ष पर हमला: 'ईवीएम छोड़ें, आत्मचिंतन करें'

सारांश

भोपाल में BJP की 'लोकतंत्र बचाओ' पदयात्रा में जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर सीधा हमला किया — आपातकाल की याद दिलाई, बैलेट पेपर चुनावों में कांग्रेस की शून्य सीटों का हवाला दिया, और राहुल गांधी को ईवीएम की चिंता छोड़ आत्मचिंतन की सलाह दी।

मुख्य बातें

जेपी नड्डा ने 4 नवंबर 2026 को भोपाल में BJP की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा को संबोधित किया।
नड्डा ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह चुनाव आयोग की साख 'तार-तार' करने का प्रयास कर रही है।
हाल के 28 एमएलसी बैलेट पेपर चुनावों में कांग्रेस यूपी, बिहार में शून्य और कर्नाटक में 4 में से शून्य सीट पर रही।
नड्डा ने आपातकाल में 1 लाख 30 हज़ार लोगों को 22 महीने जेल में डालने का उल्लेख किया।
SIR प्रक्रिया यह 12वीं बार हो रही है; 10 लाख 24 हज़ार BLO ने 96 करोड़ नागरिकों को कवर किया।
सर्वोच्च न्यायालय ने SIR प्रक्रिया को उचित ठहराया है।

भाजपा की ओर से आयोजित 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा 4 नवंबर 2026 को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में निकाली गई, जिसमें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा ने शिरकत की। इस अवसर पर नड्डा ने विपक्ष — विशेषकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) — पर तीखे प्रहार करते हुए चुनाव आयोग की साख पर सवाल उठाने की प्रवृत्ति को देश की संस्थाओं को कमज़ोर करने का प्रयास बताया।

पदयात्रा का मकसद और मुख्य संदेश

नड्डा ने पदयात्रा में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा, 'जिस तरह से गैरजिम्मेदाराना व्यवहार विपक्ष की ओर से किया जा रहा है, यह देश में अस्थिरता पैदा करने और देश की संस्थाओं के प्रति बने विश्वास को अस्थिर करने की कोशिश है।' उन्होंने भारत को 'लोकतंत्र की जननी' बताते हुए कहा कि भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने वर्षों की मेहनत से वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई है, और कांग्रेस उसे 'तार-तार' करने का प्रयास कर रही है।

उनका तर्क था कि कांग्रेस को जनसमर्थन न मिलने के कारण वह चुनाव आयोग को दोष देने की राह पर चल पड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया, 'कांग्रेस के लोग समझ चुके हैं कि आने वाले 20-30 वर्षों में जनता उसे मौका नहीं देने वाली है।'

ईवीएम और बैलेट पेपर पर सीधा जवाब

नड्डा ने हाल ही में बैलेट पेपर से कराए गए 28 एमएलसी चुनावों का हवाला देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश और बिहार में कांग्रेस शून्य पर रही, महाराष्ट्र में सहयोगियों के बल पर एक सीट आई, और कर्नाटक — जहाँ कांग्रेस की सरकार है — में 4 में से शून्य सीट मिली। उन्होंने कटाक्ष किया, 'कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश में जीत होती है तो वे पहलवान, और जब चुनाव हारें तो आयोग बेईमान।'

उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि वे ईवीएम और बैलेट पेपर की चिंता छोड़कर आत्मचिंतन शुरू करें। नड्डा ने यह भी बताया कि चुनाव आयोग ने ईवीएम हैक करने की खुली चुनौती दी थी, जिसे विपक्ष स्वीकार करने नहीं आया।

आपातकाल का संदर्भ और कांग्रेस पर हमला

नड्डा ने खुद को आपातकाल का 'भुक्तभोगी' बताते हुए कहा कि आपातकाल के दौरान 1 लाख 30 हज़ार लोगों को मीसा और डीआईआर कानून के तहत 22 महीने तक बिना दलील के जेल में डाला गया था। उन्होंने कहा, 'मुझे दो बार क्लास से पकड़कर पुलिस ले गई थी। पूरे परिवार के लोग जेल में डाल दिए गए थे।' उनका तर्क था कि ऐसे दल के नेता लोकतंत्र के 'बड़े रक्षक' बनने का दावा नहीं कर सकते।

एसआईआर प्रक्रिया का बचाव

नड्डा ने विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का भी बचाव किया और कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी इसे उचित ठहराया है। उन्होंने बताया कि यह 12वीं बार हो रहा है — 10 बार कांग्रेस शासनकाल में, एक बार अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में, और एक बार वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में। इस प्रक्रिया में 10 लाख 24 हज़ार बूथ स्तरीय अधिकारियों (BLO) ने 96 करोड़ नागरिकों को कवर किया।

यह पदयात्रा ऐसे समय में आई है जब विपक्ष लगातार चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहा है, और भाजपा इसे संस्थाओं पर 'सुनियोजित हमला' बता रही है। आने वाले दिनों में इस राजनीतिक बहस के और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह आँकड़ा चुनिंदा है — MLC चुनाव में मतदाता आधार और समीकरण आम चुनाव से भिन्न होते हैं। आपातकाल का संदर्भ भावनात्मक रूप से प्रभावी है, परंतु असली सवाल — ईवीएम की तकनीकी पारदर्शिता और चुनावी जवाबदेही — इस बहस में पीछे रह जाता है। जब तक दोनों पक्ष संस्थागत सुधार की बात करने के बजाय एक-दूसरे पर दोषारोपण करते रहेंगे, मतदाता का भरोसा — जिसकी दोनों दुहाई देते हैं — कमज़ोर होता रहेगा।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भोपाल में 'लोकतंत्र बचाओ' पदयात्रा क्या थी?
यह भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा आयोजित 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा थी, जो 4 नवंबर 2026 को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में निकाली गई। इसमें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भाग लिया और विपक्ष — खासकर कांग्रेस — पर जमकर हमला बोला।
जेपी नड्डा ने राहुल गांधी को क्या सलाह दी?
नड्डा ने राहुल गांधी को सलाह दी कि वे ईवीएम और बैलेट पेपर की चिंता छोड़कर आत्मचिंतन शुरू करें। उन्होंने तर्क दिया कि हाल के बैलेट पेपर चुनावों में भी कांग्रेस का प्रदर्शन खराब रहा, इसलिए पराजय का दोष मतदान प्रणाली पर नहीं थोपा जाना चाहिए।
नड्डा ने बैलेट पेपर चुनावों के किन आँकड़ों का हवाला दिया?
नड्डा ने बताया कि हाल ही में 28 एमएलसी सीटों पर बैलेट पेपर से चुनाव हुए, जिनमें कांग्रेस उत्तर प्रदेश और बिहार में शून्य पर रही। महाराष्ट्र में सहयोगियों के समर्थन से एक सीट आई, जबकि कर्नाटक — जहाँ कांग्रेस की सरकार है — में 4 में से शून्य सीट मिली।
SIR (विशेष सारांश पुनरीक्षण) प्रक्रिया क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
SIR मतदाता सूची को अद्यतन करने की एक आधिकारिक प्रक्रिया है, जिसमें बूथ स्तरीय अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं का विवरण सत्यापित करते हैं। नड्डा के अनुसार यह 12वीं बार हो रहा है और सर्वोच्च न्यायालय ने भी इसे उचित ठहराया है; इस बार 10 लाख 24 हज़ार BLO ने 96 करोड़ नागरिकों को कवर किया।
नड्डा ने आपातकाल का ज़िक्र क्यों किया?
नड्डा ने खुद को आपातकाल का भुक्तभोगी बताते हुए कांग्रेस के 'लोकतंत्र के रक्षक' होने के दावे को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान 1 लाख 30 हज़ार लोगों को मीसा और डीआईआर कानून के तहत 22 महीने बिना दलील के जेल में रखा गया था, और वे स्वयं दो बार पुलिस द्वारा उठाए गए थे।
राष्ट्र प्रेस
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