1 अगस्त 2026
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प्रोजेक्ट सारथी का राष्ट्रव्यापी विस्तार: नड्डा ने की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक, 2,500 स्वयंसेवक पहले ही दे चुके हैं 1.5 लाख घंटे सेवा

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प्रोजेक्ट सारथी का राष्ट्रव्यापी विस्तार: नड्डा ने की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक, 2,500 स्वयंसेवक पहले ही दे चुके हैं 1.5 लाख घंटे सेवा

सारांश

प्रोजेक्ट सारथी अब पायलट से राष्ट्रव्यापी मिशन बनने की राह पर है। पीजीआईएमईआर में 2,500 स्वयंसेवकों ने 1.5 लाख घंटे सेवा देकर मरीजों का अस्पताल पहुँचने का समय 26% घटाया। नड्डा की बैठक में इसे 'माई भारत' से जोड़ते हुए देश के केंद्रीय अस्पतालों तक फैलाने का खाका तैयार किया गया।

मुख्य बातें

स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने 1 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में प्रोजेक्ट सारथी के राष्ट्रव्यापी विस्तार पर उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।
पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ में 2,500 से अधिक स्वयंसेवक अब तक 1.5 लाख घंटे से अधिक सेवा दे चुके हैं।
पीजीआईएमईआर के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के अध्ययन के अनुसार, सारथी सहायता से मरीजों के अस्पताल पहुँचने के समय में 26 प्रतिशत की कमी आई।
प्रोजेक्ट सारथी को युवा मामले एवं खेल मंत्रालय की 'माई भारत' पहल के साथ एकीकृत करने और डिजिटल निगरानी प्रणाली लागू करने पर चर्चा हुई।
स्वयंसेवक केवल गैर-नैदानिक सहायता देंगे — नैदानिक या प्रशासनिक जिम्मेदारियाँ उन पर नहीं डाली जाएँगी।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने 1 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें देश भर के अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में प्रोजेक्ट सारथी के विस्तार की संभावनाओं का आकलन किया गया। श्रम एवं रोजगार तथा युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया भी इस बैठक में उपस्थित रहे। चंडीगढ़ के पीजीआईएमईआर में पायलट के रूप में लागू इस पहल के तहत अब तक 2,500 से अधिक स्वयंसेवक 1.5 लाख घंटे से अधिक सेवा दे चुके हैं।

मुख्य घटनाक्रम

बैठक में पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ में प्रोजेक्ट सारथी के कार्यान्वयन और उसके प्रभाव की विस्तृत समीक्षा की गई। इसके साथ ही केंद्रीय सरकारी अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में इसे लागू करने पर गहन विचार-विमर्श हुआ। यह पहल प्रशिक्षित युवा स्वयंसेवकों के माध्यम से मरीजों के अनुभव को बेहतर बनाने और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा में सामुदायिक भागीदारी को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

पीजीआईएमईआर में पहल का प्रभाव

मंत्रियों को बताया गया कि पीजीआईएमईआर में सारथी स्वयंसेवकों ने अस्पताल तक पहुँचने में सहायता, व्हीलचेयर और स्ट्रेचर पर मदद, निदान सेवाओं के लिए मार्गदर्शन तथा अन्य गैर-नैदानिक सहायता प्रदान कर मरीजों की सुविधा में उल्लेखनीय सुधार किया है। पीजीआईएमईआर के सामुदायिक चिकित्सा विभाग द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, इस पहल से लाभान्वित रोगियों के लिए अस्पताल तक पहुँचने में लगने वाले कुल समय में 26 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

नड्डा का जोर — रोगी-केंद्रित सेवा

बैठक के दौरान नड्डा ने रेखांकित किया कि रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा का दायरा नैदानिक देखभाल से कहीं अधिक व्यापक है। उन्होंने कहा कि मरीजों और उनके परिजनों को अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान समय पर मार्गदर्शन, सहायता और सहानुभूतिपूर्ण सहयोग मिलना उतना ही आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि सुनियोजित स्वयंसेवी सहायता से स्वास्थ्य पेशेवर अपनी नैदानिक जिम्मेदारियों पर अधिक प्रभावी ढंग से ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

माई भारत के साथ एकीकरण और डिजिटल ढाँचा

बैठक में प्रोजेक्ट सारथी को युवा मामले एवं खेल मंत्रालय की 'माई भारत' पहल के साथ एकीकृत करने की योजना की भी समीक्षा की गई। संरचित मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और डिजिटल निगरानी प्रणालियों के माध्यम से स्वास्थ्य संस्थानों में युवाओं की भागीदारी को संस्थागत रूप देने पर जोर दिया गया। स्वयंसेवकों के पंजीकरण, उपस्थिति, रोगी प्रतिक्रिया और आभा आईडी निर्माण में डिजिटल प्लेटफार्मों की भूमिका को भी रेखांकित किया गया।

बैठक में उपस्थित वरिष्ठ अधिकारी

इस बैठक में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इनमें केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव, परिवार कल्याण मंत्रालय के अपर सचिव विजय नेहरा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के संयुक्त सचिव एवं एमडी (एबीडीएम) किरण गोपाल वास्का, एम्स नई दिल्ली के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. निरुपम मदान, एबीवीआईएमएस एवं डॉ. आरएमएल अस्पताल के निदेशक डॉ. अखिलंदेश्वरी प्रसाद, वीएमएमसी एवं सफदरजंग अस्पताल की निदेशक डॉ. कविता रानी शर्मा और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज (एलएचएमसी) की निदेशक डॉ. हिमानी अहलूवालिया प्रमुख रूप से उपस्थित थीं। यह बैठक देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में स्वयंसेवी सहायता को संस्थागत ढाँचे में ढालने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न केवल घोषणाएँ। लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब यह मॉडल दिल्ली के एम्स जैसे उच्च-दबाव वाले केंद्रीय अस्पतालों में उतरेगा, जहाँ रोगी-भार और संसाधन-दबाव चंडीगढ़ से कहीं अधिक है। 'माई भारत' के साथ एकीकरण युवा ऊर्जा को स्वास्थ्य सेवा से जोड़ने का सही दिशा में कदम है, पर डिजिटल निगरानी और स्वयंसेवक प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित किए बिना स्केल-अप से सेवा की एकरूपता खतरे में पड़ सकती है। जवाबदेही का ढाँचा — विशेष रूप से रोगी प्रतिक्रिया तंत्र — इस पहल की दीर्घकालिक सफलता तय करेगा।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रोजेक्ट सारथी क्या है और यह कैसे काम करता है?
प्रोजेक्ट सारथी एक स्वयंसेवी पहल है जिसमें प्रशिक्षित युवा स्वयंसेवक अस्पतालों में मरीजों को गैर-नैदानिक सहायता — जैसे व्हीलचेयर सहायता, मार्गदर्शन और निदान सेवाओं तक पहुँच — प्रदान करते हैं। इसे पहले पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ में पायलट के रूप में लागू किया गया और अब इसे देश के केंद्रीय अस्पतालों तक विस्तारित करने पर विचार हो रहा है।
पीजीआईएमईआर में प्रोजेक्ट सारथी के क्या परिणाम रहे?
पीजीआईएमईआर के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के अध्ययन के अनुसार, सारथी सहायता प्राप्त मरीजों के अस्पताल पहुँचने के कुल समय में 26 प्रतिशत की कमी आई। 2,500 से अधिक स्वयंसेवकों ने 1.5 लाख घंटे से अधिक सेवा प्रदान की है।
प्रोजेक्ट सारथी को 'माई भारत' से क्यों जोड़ा जा रहा है?
युवा मामले एवं खेल मंत्रालय की 'माई भारत' पहल युवाओं को स्वयंसेवी कार्यों से जोड़ती है। प्रोजेक्ट सारथी के साथ इसके एकीकरण से स्वयंसेवकों की भर्ती, प्रशिक्षण और डिजिटल निगरानी को एक संस्थागत ढाँचे में लाया जा सकेगा, जिससे विस्तार टिकाऊ और मापनीय होगा।
क्या सारथी स्वयंसेवक चिकित्सकीय काम भी करेंगे?
नहीं। बैठक में स्पष्ट किया गया कि सारथी स्वयंसेवक केवल गैर-नैदानिक सहायता प्रदान करेंगे — जैसे मार्गदर्शन, व्हीलचेयर सहायता और रोगी नेविगेशन। नैदानिक या प्रशासनिक जिम्मेदारियाँ उन पर नहीं डाली जाएँगी, ताकि स्वास्थ्य पेशेवर अपने मुख्य कार्य पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
इस बैठक में कौन-से प्रमुख अधिकारी शामिल थे?
बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव , एम्स नई दिल्ली के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. निरुपम मदान , सफदरजंग अस्पताल की निदेशक डॉ. कविता रानी शर्मा और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की निदेशक डॉ. हिमानी अहलूवालिया सहित दोनों मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
राष्ट्र प्रेस
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