2 नवंबर 2026
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14वीं जेपीएससी घोटाला: सीआईडी ने 10 नए आरोपियों के खिलाफ पूरक चार्जशीट दाखिल की, दिसंबर में आएगी अगली

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14वीं जेपीएससी घोटाला: सीआईडी ने 10 नए आरोपियों के खिलाफ पूरक चार्जशीट दाखिल की, दिसंबर में आएगी अगली

सारांश

14वीं जेपीएससी घोटाले में सीआईडी ने 10 नए आरोपियों के खिलाफ पूरक चार्जशीट दाखिल की। मुख्य आरोपी के लैपटॉप से 24 अभ्यर्थियों की गुप्त सूची, शेल कंपनियों से मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका। कुल 34 गिरफ्तार; दिसंबर तक 12 और के खिलाफ चार्जशीट अपेक्षित।

मुख्य बातें

सीआईडी ने 2 नवंबर 2026 को 14वीं जेपीएससी परीक्षा घोटाले में 10 नए आरोपियों के खिलाफ रांची की विशेष अदालत में पहली पूरक चार्जशीट दाखिल की।
नामजद आरोपियों में बुद्धेश्वर भगत , रमेश कुमार , उमेश कुमार , उमाकांत उरांव और रौशन केरकेट्टा सहित 10 लोग शामिल हैं, सभी अगस्त 2026 से न्यायिक हिरासत में हैं।
मुख्य आरोपी के लैपटॉप से 24 अभ्यर्थियों की गुप्त सूची बरामद; इनमें से 11 प्रारंभिक परीक्षा में सफल पाए गए।
रकम वसूली नकद , आरटीजीएस , यूपीआई और हवाला के ज़रिए; शेल कंपनियों में कालाधन निवेश की आशंका।
इस मामले में अब तक कुल 34 आरोपी गिरफ्तार; दिसंबर 2026 तक शेष 12 आरोपियों के खिलाफ अगली पूरक चार्जशीट अपेक्षित।

झारखंड अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) ने 2 नवंबर 2026 को रांची की विशेष अदालत में 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा घोटाले में पहली पूरक चार्जशीट दाखिल कर दी, जिसमें बुद्धेश्वर भगत और रमेश कुमार समेत 10 नए आरोपियों को नामजद किया गया है। इन सभी आरोपियों को अगस्त 2026 में अलग-अलग तारीखों पर गिरफ्तार किया गया था और तब से वे न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं।

चार्जशीट में कौन-कौन नामजद

सीआईडी की इस पूरक चार्जशीट में शामिल 10 आरोपियों में बुद्धेश्वर भगत, रमेश कुमार और उमेश कुमार को 5 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। इसके एक दिन बाद 6 अगस्त को उमाकांत उरांव, मनोज कुमार, धर्मेंद्र कुमार, रक्षक सिंह और रौशन केरकेट्टा की गिरफ्तारी हुई थी। अरुण कुमार को 13 अगस्त और ब्रज कुमार राम को 17 अगस्त को हिरासत में लिया गया था।

जांच एजेंसी के अनुसार, शेष बचे 12 अन्य आरोपियों के खिलाफ जांच पूरी होते ही दिसंबर 2026 तक एक और पूरक चार्जशीट दाखिल की जाएगी। इस पूरे घोटाले में अब तक कुल 34 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

घोटाले का तरीका और साक्ष्य

सीआईडी की विस्तृत जांच में उजागर हुआ है कि गिरोह के सदस्य अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराने के नाम पर भारी रकम वसूलते थे। यह वसूली न केवल नकद, बल्कि आरटीजीएस, यूपीआई और हवाला जैसे अवैध माध्यमों से करोड़ों रुपये की थी।

आरोपियों के बैंक खातों, पासबुक, केवाईसी दस्तावेजों और मोबाइल फोन के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) का बारीकी से विश्लेषण कर वित्तीय लेन-देन का पूरा ब्योरा चार्जशीट में दर्ज किया गया है। जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह अभ्यर्थियों से उनके मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र और हस्ताक्षर किए हुए खाली चेक तक गिरवी रखवाता था।

लैपटॉप से मिली गुप्त सूची

सीआईडी को मुख्य आरोपी बुद्धेश्वर भगत के लैपटॉप से 24 अभ्यर्थियों की एक गुप्त सूची बरामद हुई थी। जांच में पता चला कि इनमें से 11 अभ्यर्थी प्रारंभिक परीक्षा में सफल भी रहे थे। एजेंसी अब इस सूची के आधार पर सफल अभ्यर्थियों और इन दलालों के बीच के संबंधों की गहराई से पड़ताल कर रही है।

इसी क्रम में, एक अन्य आरोपी अभय तिवारी के ठिकानों पर छापेमारी में सीआईडी ने ₹5.50 लाख नकद, एक लैपटॉप और मोबाइल फोन जब्त किया था। जांच में यह आशंका भी गहरी हुई है कि अवैध तरीके से जुटाई गई इस रकम का एक बड़ा हिस्सा कुछ शेल कंपनियों के बैंक खातों में निवेश किया गया था।

जांच का दायरा और पूर्व चार्जशीट

सीआईडी की यह जांच केवल छोटे बिचौलियों और अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं है। एजेंसी परीक्षा से जुड़े मास्टरमाइंड्स, आयोग के संदिग्ध अधिकारियों और परीक्षा संचालन एजेंसी के बीच आर्थिक संबंधों की भी पड़ताल कर रही है। गौरतलब है कि इससे पूर्व तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष एल. खिंग्याते समेत 12 आरोपियों के खिलाफ पहले ही चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।

यह मामला ऐसे समय में सुर्खियों में है जब झारखंड में सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। अनुसंधान की रफ्तार और डिजिटल साक्ष्यों की व्यापकता यह संकेत देती है कि आने वाले महीनों में और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यूपीआई और हवाला जैसे बहुपरतीय वित्तीय चैनलों का इस्तेमाल यह बताता है कि यह महज 'परीक्षा-दलाली' नहीं, बल्कि एक संगठित आर्थिक अपराध का ढाँचा था। असली परीक्षा अब सीआईडी के लिए यह है कि क्या वह शेल कंपनियों और संदिग्ध आयोग अधिकारियों तक की कड़ी को अदालत में साबित कर पाती है — क्योंकि अब तक के अनुभव बताते हैं कि ऐसे मामलों में बिचौलिए पकड़े जाते हैं, मास्टरमाइंड अक्सर बच निकलते हैं। मुख्य आरोपी के लैपटॉप में मिली 24 अभ्यर्थियों की सूची और उसमें 11 का प्रारंभिक परीक्षा में सफल होना — यह सबसे विस्फोटक सुराग है जिस पर दिसंबर से पहले पारदर्शी कार्रवाई ज़रूरी है।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

14वीं जेपीएससी परीक्षा घोटाले में सीआईडी ने क्या कार्रवाई की है?
सीआईडी ने 2 नवंबर 2026 को रांची की विशेष अदालत में 10 नए आरोपियों के खिलाफ पहली पूरक चार्जशीट दाखिल की है। इससे पहले तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष एल. खिंग्याते समेत 12 आरोपियों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल हो चुकी थी, और इस मामले में अब तक कुल 34 लोग गिरफ्तार हैं।
पूरक चार्जशीट में किन आरोपियों के नाम हैं?
इस पूरक चार्जशीट में बुद्धेश्वर भगत, रमेश कुमार, उमेश कुमार, उमाकांत उरांव, मनोज कुमार, धर्मेंद्र कुमार, रक्षक सिंह, रौशन केरकेट्टा, अरुण कुमार और ब्रज कुमार राम — कुल 10 नाम शामिल हैं। इन सभी को अगस्त 2026 में गिरफ्तार किया गया था और ये न्यायिक हिरासत में हैं।
जेपीएससी घोटाले में पैसे की वसूली कैसे की जाती थी?
जांच के अनुसार, गिरोह के सदस्य अभ्यर्थियों से परीक्षा पास कराने के नाम पर नकद के साथ-साथ आरटीजीएस, यूपीआई और हवाला जैसे अवैध माध्यमों से करोड़ों रुपये वसूलते थे। अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र और हस्ताक्षर किए हुए खाली चेक भी गिरवी रखे जाते थे।
बुद्धेश्वर भगत के लैपटॉप से क्या अहम सुराग मिला?
मुख्य आरोपी बुद्धेश्वर भगत के लैपटॉप से 24 अभ्यर्थियों की एक गुप्त सूची बरामद हुई। जांच में पाया गया कि इनमें से 11 अभ्यर्थी प्रारंभिक परीक्षा में सफल भी रहे थे, जिससे दलालों और सफल अभ्यर्थियों के बीच संबंध की जांच और गहरी हो गई है।
इस घोटाले में अगली कार्रवाई कब और क्या होगी?
सीआईडी के अनुसार, शेष 12 आरोपियों के खिलाफ जांच पूरी होते ही दिसंबर 2026 तक एक और पूरक चार्जशीट दाखिल की जाएगी। एजेंसी शेल कंपनियों के ज़रिए मनी लॉन्ड्रिंग और परीक्षा संचालन एजेंसी से जुड़े संदिग्ध अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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