14वीं जेपीएससी घोटाला: सीआईडी ने 10 नए आरोपियों के खिलाफ पूरक चार्जशीट दाखिल की, दिसंबर में आएगी अगली
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) ने 2 नवंबर 2026 को रांची की विशेष अदालत में 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा घोटाले में पहली पूरक चार्जशीट दाखिल कर दी, जिसमें बुद्धेश्वर भगत और रमेश कुमार समेत 10 नए आरोपियों को नामजद किया गया है। इन सभी आरोपियों को अगस्त 2026 में अलग-अलग तारीखों पर गिरफ्तार किया गया था और तब से वे न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं।
चार्जशीट में कौन-कौन नामजद
सीआईडी की इस पूरक चार्जशीट में शामिल 10 आरोपियों में बुद्धेश्वर भगत, रमेश कुमार और उमेश कुमार को 5 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। इसके एक दिन बाद 6 अगस्त को उमाकांत उरांव, मनोज कुमार, धर्मेंद्र कुमार, रक्षक सिंह और रौशन केरकेट्टा की गिरफ्तारी हुई थी। अरुण कुमार को 13 अगस्त और ब्रज कुमार राम को 17 अगस्त को हिरासत में लिया गया था।
जांच एजेंसी के अनुसार, शेष बचे 12 अन्य आरोपियों के खिलाफ जांच पूरी होते ही दिसंबर 2026 तक एक और पूरक चार्जशीट दाखिल की जाएगी। इस पूरे घोटाले में अब तक कुल 34 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
घोटाले का तरीका और साक्ष्य
सीआईडी की विस्तृत जांच में उजागर हुआ है कि गिरोह के सदस्य अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराने के नाम पर भारी रकम वसूलते थे। यह वसूली न केवल नकद, बल्कि आरटीजीएस, यूपीआई और हवाला जैसे अवैध माध्यमों से करोड़ों रुपये की थी।
आरोपियों के बैंक खातों, पासबुक, केवाईसी दस्तावेजों और मोबाइल फोन के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) का बारीकी से विश्लेषण कर वित्तीय लेन-देन का पूरा ब्योरा चार्जशीट में दर्ज किया गया है। जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह अभ्यर्थियों से उनके मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र और हस्ताक्षर किए हुए खाली चेक तक गिरवी रखवाता था।
लैपटॉप से मिली गुप्त सूची
सीआईडी को मुख्य आरोपी बुद्धेश्वर भगत के लैपटॉप से 24 अभ्यर्थियों की एक गुप्त सूची बरामद हुई थी। जांच में पता चला कि इनमें से 11 अभ्यर्थी प्रारंभिक परीक्षा में सफल भी रहे थे। एजेंसी अब इस सूची के आधार पर सफल अभ्यर्थियों और इन दलालों के बीच के संबंधों की गहराई से पड़ताल कर रही है।
इसी क्रम में, एक अन्य आरोपी अभय तिवारी के ठिकानों पर छापेमारी में सीआईडी ने ₹5.50 लाख नकद, एक लैपटॉप और मोबाइल फोन जब्त किया था। जांच में यह आशंका भी गहरी हुई है कि अवैध तरीके से जुटाई गई इस रकम का एक बड़ा हिस्सा कुछ शेल कंपनियों के बैंक खातों में निवेश किया गया था।
जांच का दायरा और पूर्व चार्जशीट
सीआईडी की यह जांच केवल छोटे बिचौलियों और अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं है। एजेंसी परीक्षा से जुड़े मास्टरमाइंड्स, आयोग के संदिग्ध अधिकारियों और परीक्षा संचालन एजेंसी के बीच आर्थिक संबंधों की भी पड़ताल कर रही है। गौरतलब है कि इससे पूर्व तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष एल. खिंग्याते समेत 12 आरोपियों के खिलाफ पहले ही चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
यह मामला ऐसे समय में सुर्खियों में है जब झारखंड में सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। अनुसंधान की रफ्तार और डिजिटल साक्ष्यों की व्यापकता यह संकेत देती है कि आने वाले महीनों में और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।